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बुखार को भी कोरोना समझें:सिंगापुर के मशहूर डॉक्टर शेखावत बोले- सर्दी, खांसी और बुखार है तो बिना किसी टेस्ट का इंतजार किए तुरंत डॉक्टर से ट्रीटमेंट करवाएं

नागौरएक वर्ष पहलेलेखक: मनीष व्यास
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महामारी के इस दौरान में किसी भी तरह के बुखार को कोरोना ही समझें। बिना किसी टेस्ट का इंतजार किए तुरंत डॉक्टर से सलाह कर अपना ट्रीटमेंट करना शुरू करें। ये कहना है सिंगापुर के मशहूर न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर रविंद्र सिंह शेखावत का। उनका कहना है कि लोगों को इस माइंडसेट के साथ चलना चाहिए कि उन्हें जो भी बुखार आ रहा है, वो कोरोना है। साथ ही सरकार के नियमों का भी पालन करें।

शेखावत ने कहा कि कई दूसरे देशों में कोरोना महामारी की भयावहता के बाद भी उनकी गलतियों से सबक नहीं लेना और पहली वेव के बाद लगातार ढिलाई करते रहना भारत में कोरोना की दूसरी लहर की वजह है।

मौजूदा समय में राजस्थान में गांवों में कोरोना के तेजी से बढ़ने का क्या कारण है?

गांवों में लोग कोरोना को आम बीमारियां जैसे टाइफाइड, बुखार या निमोनिया मानकर कई दिनों तक अस्पताल ही नहीं पहुंचते हैं और बिना किसी नियमों की पालना किए घूमते फिरते रहते हैं। इसके बाद 7-8 दिनों बाद कोरोना लंग्स पर इफेक्ट शुरू कर देता है और शरीर में ऑक्सीजन लेवल कम होना शुरू हो जाता है। गांवों में इसी लापरवाही की वजह से केस बहुत ज्यादा आ रहे हैं। शुरुआती दौर में प्रॉपर इलाज नहीं लेने से ही डेथ रेट भी बढ़ रही है।

कोरोना की दूसरी लहर राजस्थान में कितनी घातक है ?

- राजस्थान में B.1.617 स्ट्रेन भी चल रही है, जिसके कुछ म्युटेशन बहुत ही तेजी से कम्युनिटी में फैलने के साथ, लंग्स को भी बहुत जल्दी डैमेज करते हैं। इसके चलते दूसरी वेव में इन्फेक्शन रेट ज्यादा आ रहा है और संक्रमित मरीजों के लंग्स को तेजी से डेमेज भी कर रहा है। इसी के चलते मरीज आ रहे हैं, और 10-12 दिन बाद उन्हें ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है। डॉक्टरों को भी ट्रीटमेंट ऑफ़ टाइम बेहद कम मिल रहा है। इसके चलते यह वेव खतरनाक है।

कोरोना के ट्रीटमेंट को लेकर क्या कहेंगे ?

- राजस्थान सहित पूरे भारत में मेरे कई डॉक्टर दोस्तों से में लगातार जुड़ा हुआ हूं, उनसे बातचीत भी होती रहती है। लंग्स इंफेक्शन रोकने के लिए वहां कई तरह कि एंटी वायरल का यूज किया जा रहा है। इससे काफी मदद भी मिली है और लोग रिकवर भी हो रहे है पर ये सारा ट्रीटमेंट तब काम करता है जब डॉक्टर्स को इलाज के लिए पूरा समय मिले।

रेमडेसिविर इंजेक्शन कितना फायदेमंद व इसका उपयोग कब हो ?

- रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर ऐसा भी नहीं है कि ये कोरोना के लिए रामबाण दवाई है पर हां ये अब तक कई देशों में मिले डेटा में ये जरूर सामने आया है कि ये ड्यूरेशन ऑफ़ इलनेस के टाइम को कम करता है। इसकी मोटेलिटी को लेकर अभी भी कोई सिग्निफिकेंट डेटा नहीं आया है। ये सारी जानकारी डॉक्टर्स के पास तो है, पर आम लोगों तक ये जानकारी नहीं है। लोगों को चाहिए कि रेमडेसिविर का कब उपयोग करना है और किसे करना है, ये सारा कुछ डॉक्टर्स पर छोड़ दें।

सिंगापुर के मुकाबले भारत में कोरोना को काबू करने के प्रयासों में क्या फर्क नजर आता है ?

- भारत बहुत बड़ा देश है और सिंगापुर भारत के किसी महानगर से भी छोटा, तो निश्चित ही यह तुलना गलत होगी। लेकिन सिंगापुर में रूल्स का मतलब उसे फॉलो करना ही है। हर दिन कई तरह के नए नए रूल्स कोविड कंट्रोल के लिए सिंगापुर सरकार ला रही है और पब्लिक उसे कड़ाई से फॉलो भी कर रही है। जबकि भारत में अभी भी लोग इसे महामारी मानने को ही तैयार नहीं है और रूल्स को फॉलो नहीं कर रहे हैं।

आप कोरोना को लेकर लोगों को कुछ सलाह, संदेश देना चाहेंगे?

- वैक्सीन जरूर लगवाएं और मास्क पहनें। अगर जुकाम-बुखार है तो वो कोरोना ही है, तुरंत घर पर आइसोलेट हो डॉक्टर से बात कर इलाज शुरू कर दें। लोगों को लगता है कि मौसम में बदलाव के कारण ऐसा है और वह लापरवाही करते हैं, लेकिन ऐसे में तुरंत इलाज शुरू करने से रिकवरी की जा सकती है। सरकारी नियमों का पालन करे। इतनी सी एहतियात कोरोना की रफ्तार कम कर देगी।

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