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पारिवारिक कलह में संस्कारों की अंत्येष्टि:मौत के बाद पिता का शव घर लाए बेटे, नाराज बहू ने गेट नहीं खोला, 4 घंटे गली में विलाप, पुलिस को तोड़ना पड़ा दरवाजा

मौलासर16 दिन पहले
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मृतक धनराज। - Dainik Bhaskar
मृतक धनराज।
  • मौलासर की घटना, बड़े बेटे के साथ सीकर रहते थे पिता

ससुर के निधन के बाद पुत्रवधू ने अपने ससुर की पार्थिव देह को घर के अंदर लाने से ही मना कर दिया। छोटे बेटे की पत्नी को जब पता चला कि उसके ससुर का निधन हो गया और शव को यहां लाया जा रहा है तो उसने घर के अंदर ताला लगा लिया और गेट तक नहीं खोला। दोनों बेटे अपने पिता के पार्थिव देह को घर के सामने रखकर 4 घंटे तक विलाप करते और बहू से गेट खोने की मिन्नतें करते रहे, मगर बहू ने गेट नहीं खोला। आखिर बेटों को पुलिस बुलानी पड़ी।

बहू जब पुलिस से भी नहीं मानी तो सरपंच व सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में पुलिस को मुख्य गेट को ही तुड़वाना पड़ा और फिर पार्थिव देह को घर के अंदर ले जाकर अंतिम संस्कार से पहले होने वाले क्रियाकर्म करके गांव के मुक्ति धाम में अंत्येष्टि की गई। जानकारी के अनुसार धनकोली रोड स्थित कॉलोनी में मौलासर निवासी धनराज शर्मा 67 वर्ष लंबे समय से थे जिनका मंगलवार देर रात निधन हो गया था।

बहू ने घरेलू हिंसा व दहेज आदि का केस ससुराल वालों पर पहले से करा रखा है, अपने पति से भी रहती है अलग

सुबह 8 बजे : गली में शव रख विलाप।
सुबह 8 बजे : गली में शव रख विलाप।

परिजन सुबह 8 बजे धनराज शर्मा का शव लेकर मौलासर पहुंचे थे। दो घंटे तक अपने घर पर ही बहू को मनाने का प्रयास किया, जब नहीं मानी तो आस-पड़ोस के लोगों ने 10 बजे करीब पुलिस को सूचना दी। पुलिस भी दो घंटे तक दरवाजा खुलवाने का प्रयास करती रही।

12 बजे: दरवाजा तोड़ शव अंदर रखवाया

जब दो घंटे तक समझाने के बाद भी छोटे बेटे की पत्नी नहीं मानी तो आखिर थानाधिकारी कुल्हरि ने उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार दोपहर 12 बजे करीब गेट तुड़वा कर परिजनों को घर में प्रवेश कराया और धनराज के अंतिम संस्कार से पूर्व की रस्में पूरी करवाई।

1:30 बजे: अंतिम संस्कार के लिए रवाना।
1:30 बजे: अंतिम संस्कार के लिए रवाना।

प्रताड़ित सास-ससुर ने 6 माह पहले कोर्ट से मांगी थी इच्छामृत्यु

जानकारी के अनुसार धनराज शर्मा का बड़ा बेटा राजेन्द्र कुमार अपनी पत्नी व बच्चों के साथ सीकर रहता है, जबकि छोटा बेटा महेन्द्र कुमार धनकोली रहता है। महेंद्र की पत्नी की परिवार से अनबन है, जिस वजह से वह पैतृक मकान में रहती है। पत्नी की ओर से पहले से ही परिवार पर मारपीट, दहेज, घरेलू हिंसा सहित अनेक मामले लंबित चल रहे हैं। ऐसे में काफी सालों से धनराज शर्मा व उनकी पत्नी बड़े बेटे के साथ सीकर रहते हैं लेकिन मृत्यु के बाद परिजन धनराज शर्मा की अंत्येष्टि के लिए शव पैतृक गांव लेकर पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि बहू के व्यवहार से दुखी सास-ससुर ने छह माह पहले कोर्ट से इच्छामृत्यु भी मांगी थी।

काफी समझाया, मानने को तैयार नहीं थी
^सुबह सूचना मिली कि स्थानीय धनराज शर्मा का देहांत हो गया, जिनके परिजनों के लिए छोटे बेटे की पत्नी ने मकान खोलने से मना कर दिया। बहू को काफी समझाया मगर वह मानने को तैयार ही नहीं थी, जिस पर उच्चाधिकारियों से बात कर घर का दरवाजा तुड़वाया गया। इसके बाद दाह संस्कार की विधि को पूर्ण करवाया गया।
-सुमन कुल्हरि, थानाधिकारी मौलासर।

पिता भी अपनी बेटी काे समझाने में रहे नाकाम
मौलासर थानाधिकारी सुमन कुल्हरि ने उच्चाधिकारियों के निर्देश पर घर का मुख्य गेट तुड़वा कर शव और परिजनों को घर के अंदर प्रवेश कराया। इस दौरान गांव के सरपंच जोगेन्द्र बलारा, विनोद शर्मा, जोधाराम सोहू, वार्डपंच जुगल टेलर, राजकुमार बलारा, संजय सहल, बंसी बोचलिया, ताराचंद शर्मा सहित गांव के मौजूद लोगों ने छोटे बेटे की पत्नी और उसके पिता से समझाइश की और अंतिम संस्कार से पूर्व के क्रियाकर्म घर में करवाने के बाद शव की अंत्येष्टि गांव के मुक्तिधाम में करवाई गई।

इससे पूर्व जब बहू ने गेट नहीं खोला तो उसके पिता को भी सूचना देकर समझाइश की बात कही गई मगर वे भी अपनी बेटी को समझा नहीं आए और आखिर पुलिस को बुलाना पड़ा। बताया जा रहा है कि बहु की ससुराल पक्ष से कई सालों से नहीं बन रही है।

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