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  • The Constable Used To Sell The Details Of The Police Stations To The Thugs, After That He Also Destroyed The Evidence From The Mail Id.

बड़ा खुलासा:कांस्टेबल ठगों को बेचता था थानों की डिटेल, इसके बाद मेल आईडी से सबूत भी नष्ट करता

नागाैर13 दिन पहले
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लाेगाें काे लाेन दिलाने के नाम पर ठगी भी करते हैं। - Dainik Bhaskar
लाेगाें काे लाेन दिलाने के नाम पर ठगी भी करते हैं।
  • एसओजी तक पहुंच चुका है पूरा मामला, हाल ही लाइन हाजिर हुए कांस्टेबल पर है यह आराेप

काॅल डिटेल का उपयाेग आमताैर पर पुलिस किसी अपराधी की धरपकड़ एवं गुमशुदा की तलाश के लिए करती है। इसमें भी बहुत जरूरी हाेने पर ये कदम उठाए जाते हैं वह भी अधिकारियाें काे सूचित करने के बाद, लेकिन जिले में व्यवस्थाएं इससे उलट हैं। यहां पुलिस के निचले स्तर के कार्मिकाें की मनमर्जी ओसी हावी है कि वे किसी की भी सीडीआर व लाइव लाेकेशन निकाल लेते हैं।

थाना अधिकारियाें के नाम से निकाली गई काॅल डिटेल काे माेटी राशि में ठगाें काे बेचने का एक सनसनी खेज मामला सामने आया है। जाे अब साइबर क्राईम एसओजी जयपुर (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के पास है।

यह आराेप हाल ही काेतवाली थाने से लाइन हाजिर हुए कांस्टेबल राजू खान पर है। एसओजी में इसकी प्राथमिक जांच संख्या 20/2020 भी दर्ज है। इस गंभीर प्रकृति के प्रकरण में पुलिस थाना साईबर क्राईम एसओजी के एक अधिकारी ने राजू खान गाेरान कांस्टेबल नंबर 480 जिला अजमेर हाल कांस्टेबल नंबर 754 के खिलाफ एक जांच रिपाेर्ट एसओजी जयपुर के एसपी द्वितीय काे भी साैंपी है।

सूत्राें के अनुसार इसमें आराेपियाें पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 201, 120बी, 45/66, 72 आईटी एक्ट 2000 (संशाेधित 2008) एवं धारा 23, 24, 25 इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 में मुकदमा दर्ज कर विस्तृत अनुसंधान की अनुशंषा की गई थी।

एसओजी काे प्राप्त हुआ था एक परिवाद

सूत्राें से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले का एसओजी काे एक परिवाद प्राप्त हुआ था। इसके बाद जब इसमें अनुसंधान हुआ ताे सामने आया कि महमूद खान, शहनवाज, रफीक खान काॅल सेंटर चलाने का काम करते हैं, और लाेगाें काे लाेन दिलाने के नाम पर ठगी भी करते हैं।

आराेप है कि इन सभी काे पुलिस में कार्यरत राजू खान गाेरान काॅल डिटेल मुहैया करवाता है। आराेप है कि इसके एवज में राजू व उसका भाई विक्रम खान, महमूद खान माेटी रकम प्राप्त करते हैं। वहीं एसओजी की ओर से की गई एक जांच में यह भी सामने आ चुका है कि राजू कांस्टेबल गलत तरीके से थाना प्रभारियाें के नाम से फर्जी पत्र जारी कर काॅल डिटेल रिपाेर्ट प्राप्त कर उसकाे बिक्री करता है। इसके अलावा इस रिकाॅर्ड काे वह थाने की ई-मेल आईडी से नष्ट भी कर देता था।

सीडीआर निकालते ही सबूत कर देता था नष्ट

जानकाराें के अनुसार कांस्टेबल किसी भी नंबर की सीडीआर निकाल लेता था। इसके लिए वह किसी भी अधिकारी के फर्जी पत्र भी जारी करता और फिर उसके आधार पर सीडीआर मंगवा लेता था। इतना ही नहीं किसी काे इसकी भनक नहीं लगे इसके लिए वह संबंधित मेल काे भी डिलिट कर देता था। आराेप है कि आराेपियाें ने एक महिला कार्मिक की भी सीडीआर निकलवाई थी। जाे उनके कार्यालय में ही काम करती थी। इसके अलावा अधिकारियाें के नामाें से सीडीआर निकालने की एक लंबी सूची है।

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