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कोरोना मुक्त अभियान:राज्य का पहला ऐसा गांव, जहां मरीजों को अस्पताल नहीं जाना पड़ता इलाज करने डॉक्टर आ रहे घर

नागौर9 दिन पहलेलेखक: हिमांशु गौड़
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लैब में होती जांच। - Dainik Bhaskar
लैब में होती जांच।
  • भामाशाह परिवार की ट्रस्ट सुप्रीम फाउंडेशन ने उठाया बीड़ा, एक फोन पर घर बैठे मिल रही सभी तरह की चिकित्सा सुविधाएं
  • कोरोना मुक्त जसवंतगढ़ के लिए यह तापड़िया परिवार का अभियान है

लाडनूं तहसील से 6 किलोमीटर दूर एक गांव है जसवंतगढ़। यहां 15000 से अधिक आबादी है। यह संभवत: राज्य का ऐसा पहला गांव है जहां मरीजों को इलाज लेने के लिए अस्पताल नहीं जाना पड़ता, डॉक्टर ही मरीज के घर आते हैं और फिर दवाएं भी घर पर ही भेजी जा रही है।

एक फोन कॉल पर ही गांव वालों को ये सुविधा मिल रही है। यह सब व्यवस्था भी मुफ्त में है। इतना ही नहीं अगर चिकित्सा टीम को किसी तरह की जांच की जरूरत है तो संबंधित जांच के सैंपल भी घर से जुटाकर चिकित्सा टीम खुद लेबोरेट्री से जांच करवा रही है और उस जांच रिपोर्ट के अनुसार मरीज को फिर घर पहुंच कर इलाज दिया जा रहा है।

यह व्यवस्था सरकारी नहीं, भामाशाह तापड़िया परिवार का अभियान है और इस अभियान का नाम है- कोरोना मुक्त जसवंतगढ़। दरअसल, इस भामाशाह परिवार की ट्रस्ट सुप्रीम फाउंडेशन की ओर से गांव में फिजियोथैरेपी, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक अस्पताल बनवाए हुए हैं जहां हमेशा ही आमजन को निशुल्क उपचार मिलता है लेकिन अब कोरोनाकाल जैसे संकट के वक्त इस ट्रस्ट ने तीनों अस्पतालों के पूरे स्टाफ को अभियान में लगाया है। बकायदा 4 मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं और उन नंबर पर कॉल आते ही नर्सिंग टीम मौके पर पहुंचती है। डॉक्टर से परामर्श कर इलाज देती है। गंभीर मामले पर डॉ. खुद घर पहुंच इलाज करते हैं।

‘चिकित्सा आपके द्वार’ प्रकल्प की शुरुआत, 12 हजार किट बांटे

अपने गांव को कोरोना मुक्त बनाने के लिए तापड़िया परिवार के सूरजमल, बजरंगलाल, महावीर प्रसाद व शिवरतन ने यह अभियान चलाया है और इस अभियान में जितना भी खर्च आ रहा है, सारा खर्च उनका ट्रस्ट सुप्रीम फाउंडेशन, जसवंतगढ़ हितकारिणी सभा और प्राथमिक चिकित्सा और डायनेमिक डाइग्नोस्टिक लेबोरेट्री उठा रही है। इन्होंने जब तक लॉकडाउन रहेगा तब तक के लिए ‘प्राथमिक चिकित्सा आपके द्वार’ प्रकल्प की शुरुआत कर रखी है। इस अभियान के तहत पूरे जसवंतगढ़ और आसपास के 10 किमी के क्षेत्र में 15 गांवों के लोगों को 12 हजार होम्योपैथिक दवाइयों के किट भी बांटे जा चुके हैं।

चूरू जिले के भी 96 हजार घरों में बांटे दवाइयों के किट

चूरू के सुजानगढ़ व बिदासर तहसील में 96 हजार परिवारों के लिए वहां के एसडीएम ने होम्योपैथिक और एलोपैथिक में जिंक, विटामिन और पैरासिटामोल टेबलेट्स की मांग की, जिस पर तापड़िया परिवार की ओर से करीब 20 लाख की लागत से दवाइयां मंगवा प्रशासन को सुपुर्द की। जसवंतगढ़ में रोजाना 15 से 20 मरीजों के घर पहुंच इलाज किया जा रहा है।

पिछले 15 दिनों से सुबह 8 से शाम 6 बजे तक काम कर रही हैं टीमें

​​​​​​​रोजाना सुबह 8 से शाम 6 बजे तक बीमार व्यक्ति के परिवार द्वारा निर्धारित नम्बरों पर कॉल करके मेडिकल स्टाफ को घर पर बुला रहा है। नर्सिंग स्टाफ मरीज की बात चिकित्सक से करवाकर खून या अन्य जरूरी जांच के सैंपल ले रहे हैं । ​​​​​​​

जसवंतगढ़ हितकारिणी सभा की ओर से संचालित डायनामिक डायग्नोस्टिक लेबोरेट्री में जांच करवाकर डॉक्टर से परामर्श लेकर जरूरी दवाइयां भी घर पर पहुंचा रहे हैं। जसवंतगढ़ हितकारिणी सभा अध्यक्ष पवन भंडारी बताते हैं कि उपरोक्त योजना को लेकर सुप्रीम फाउंडेशन के सचिव जुगलकिशोर, कृष्णगोपाल बिहानी और सुमित मूंदड़ा ने सभी से चर्चा की और फिर योजना शुरू की जो आज सार्थक होती दिख रही है।

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