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गुस्सा / अंबुजा फैक्ट्री में फंसे 2500 मजदूरों का धैर्य टूटा, घर जाने की जिद पर पहले सुरक्षा गार्ड फिर पुलिस पर पथराव, चार कांस्टेबल चोटिल

The patience of 2500 workers trapped in Ambuja factory was broken, on the insistence of going home, first the security guard then stoned the police, four constables injured
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The patience of 2500 workers trapped in Ambuja factory was broken, on the insistence of going home, first the security guard then stoned the police, four constables injured

  • मूण्डवा में निर्माणाधीन सीमेंट फैक्ट्री का मामला, पांच थानों की पुलिस और मुख्यालय से बुलाने पड़े आरएसी के जवान

दैनिक भास्कर

Apr 30, 2020, 06:37 AM IST

नागौर. निर्माणाधीन अंबुजा सीमेंट फैक्ट्री में फंसे ढाई हजार मजदूरों का धैर्य आखिरकार बुधवार को टूट गया।  घर वापसी की मांग पर इन मजदूरों ने जबरदस्त हंगामा किया। ढाई घंटे चले हंगामे के बीच मजदूरों ने बीस मिनट तक फैक्ट्री कार्मिकों एवं पुलिस पर पथराव भी किया। इसके बाद फैक्ट्री परिसर में तोड़फोड़ कर दी। इसमें तीन पुलिसकर्मियों के मामूली चोटें लगी हैं। जानकारी अनुसार अंबुजा प्रबंधन ने कलेक्टर से 20 अप्रैल को काम शुरू करने की अनुमति मांगी थी। कलेक्टर ने स्वीकृति दे दी थी लेकिन अंबुजा ने काम शुरू नहीं किया। काफी समझाइश के बाद मजदूर वार्तालाप को राजी हुए। मजदूरों ने फैक्ट्री प्रबंधक पर खाने-पीने का ध्यान नहीं रखने के भी गंभीर आरोप लगाए। कहा, प्रबंधन उनकी कोई भी बात नहीं सुनता। आरोप है कि इन्हें राशन सामग्री भी लगातार कम दी जा रही है। मांग रखी कि उन्हें अब जल्द घर भेजा जाए। कलेक्टर दिनेश यादव ने एक कमेटी गठित की है जो घटनाक्रम की जांच करेगी। एसपी डॉ. विकास पाठक ने कहा, इस पूरे मामले में प्रबंधन की ही गलती है।

ढाई घंटे बवाल, खाने-पीने की सही व्यवस्था नहीं होने का भी लगाया आरोप, कलेक्टर ने जांच के लिए गठित की कमेटी

इससे पहले सुबह मजदूरों के दो गुटों में किसी बात को लेकर हल्का विवाद हुआ था। इस पर फैक्ट्री कार्मिक मजदूरों को समझाने के लिए पहुंचे। लेकिन मजदूर घर जाने की जिद पर अड़ गए। मजदूर कहने लगे कि 30 मार्च से वे घर जाने की जिद पर अड़े हुए हैं। इसके बाद भी उन्हें घर नहीं भेजा जा रहा है। जबकि यहां भी उनका सही तरह से ध्यान नहीं रखा जा रहा है। वे अपने खर्चे पर ही अपना पेट भर रहे हैं। इसके चलते फैक्ट्री परिसर में खाने-पीने से लेकर रहने तक की भारी समस्या आ रही है। उनको पंखे तक नहीं दिए जा रहे हैं। बगैर किसी कार्य उनको यहां रहने में समस्या हो रही है। मजदूरों ने बताया कि कुछ मजदूरों को पहले भेजा जा चुका है। लेकिन प्रबंधन उन्हें नहीं भेज रहा।  

30 मार्च को भी जताया था विरोध

उल्लेखनीय है कि यहां निर्माण कार्य कई दिनों से बंद है। जब लॉकडाउन लगा तो 2700 मजदूर यहीं फंसकर रह गए। इन मजदूरों ने पहले 30 मार्च को भी हंगामा किया था। मजदूर सड़कों पर उतर आर और काफी देर तक हंगामा किया, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद बुधवार को जब मजदूरों ने वापस घर जाने की मांग को लेकर फैक्ट्री कार्मिकों पर पथराव किया तो उन्होंने थाना पुलिस को फोन कर दिया। मौके पर मूंडवा डिप्टी लोकेश मीणा सहित अन्य पुलिस कार्मिक पहुंचे। मजदूर और उग्र हो गए और उन्होंने पुलिस पर भी पथराव करना शुरू कर दिया। इस पर पांच थानों मुख्यालय से पुलिस बुलानी पड़ी। 

पुलिस की जीप का कांच भी टूटा  इस मामले में पुलिस की एक जीप व एक अन्य बाइक भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। उधर, फैक्ट्री प्रबंधन ने इस मामले में बात करने के लिए फोन ही रिसीव नहीं किया। इस सीमेंट फैक्ट्री में पहले भी कई बार विवाद हो चुके हैं। एसआई आईदान ने करीब 1000 लोगों पर पथराव व सरकारी संपत्ति को नुकसान का केस किया है।

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