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समस्या:चार पालिकाध्यक्षों का कार्यकाल निकला, डीएलबी की स्वीकृति के बाद अटका प्रस्ताव

नागौर2 दिन पहले
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  • ट्रैक्टरों से 10 रुपए प्रति चक्कर वसूल विकास कार्य में लगाने का प्रस्ताव, नहीं हो रही कार्रवाई

एक मुद्दा जिस पर सदन के अधिकांश पार्षदों ने सहमति व्यक्त करने के बाद प्रस्ताव बनाकर स्वायत्त शासन विभाग के पास भिजवाया। विभाग ने स्वीकृति प्रदान कर दी लेकिन एक नगरपालिका अध्यक्ष का कार्यकाल बीत गया। दूसरे नगरपालिका अध्यक्ष के कार्यकाल में भी यह मुद्दा उठा और फाइलों में दब गया।

इसके पश्चात तीसरे व चौथे पालिकाध्यक्ष के पांच साल निकलने के बाद भी इस मुद्दे को नहीं उठाया गया। क्या ऐसे ही कार्यों के लिए जनता पार्षदों को चुनकर पालिका में भेजती है जो विकास के मामले में कोई ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सके।

शहर की नगरपालिका को आर्थिक रूप से सुदृढ बनाने के लिए गत बोर्ड के तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष भींवाराम कुमावत के कार्यकाल में पालिका उपाध्यक्ष विजय चौधरी ने नमक ढुलाई में लगे ट्रैक्टरों से दस रुपए प्रति चक्कर वसूलने के लिए पुरजोर तरीके से यह मुद्दा साधारण सभा में उठाया था। जिस पर सदन ने सहमति प्रदान कर दी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कुछ वर्षों बाद फिर से पालिका के चुनाव हुए और नया बोर्ड बन गया।

इस बोर्ड में भी नगरपालिका अध्यक्ष उत्तमचंद बियाणी की अध्यक्षता में आयोजित साधारण सभा की बैठक में तत्कालीन व वर्तमान अधिशाषी अधिकारी हेमाराम चौधरी ने इस मुद्दे को शामिल किया। जिस पर भाजपाई पार्षदों ने इसके लिए सहमति प्रकट करते हुए प्रस्ताव को स्वायत्त शासन विभाग भिजवाया। जहां से दस रुपए वसूलने के लिए स्वीकृति भी मिल गई। इसके बाद टेंडर निकालने के लिए तैयारियां शुरू करवाई गई। सर्वे के लिए कार्रवाई की गई। लेकिन वर्षा होने के बाद मामला अटक गया और निर्णय फाइलों में दबकर रह गया।

ऐसे समझे : क्या है मुद्दा
शहर में सैकड़ों ट्रैक्टर नमक ढुलाई के कार्य में लगे हैं। इन ट्रैक्टरों की आवाजाही से सड़कें क्षतिग्रस्त होती है तथा नमक गिरकर सड़कों पर गिरता रहता है। दस रुपए प्रति ट्रैक्टर वसूल कर पालिका शहर की सड़कों का रख रखाव करने के साथ ही विकास के अन्य कार्यों में खर्च कर सकती है।

सदन में शहर के विकास को लेकर लिए जाने वाले निर्णय क्या ऐसे ही फाइलों में दबे रहने के लिए होते हैं। क्या शहर की जनता ऐसे लोगों को चुनकर पालिका में भेजती है, जो प्रस्ताव पर सहमति बनाने के बाद भी मौन हो जाते हैं। तत्कालीन व वर्तमान ईओ हेमाराम चौधरी ने बताया कि पूर्व में लिए गए प्रस्ताव को निकाल कर पुन: बोर्ड में रखवा कर निर्णय लिया गया। इसके बाद टेंडर निकालने के साथ ही अन्य कार्रवाई शुरू की गई।

टिकट को लेकर बनी है असमंजस की स्थिति
कभी पार्टी कार्यालय में पांव तक नहीं रखने वाले लोग टिकट मांग रहे हैं। शायद पार्टियां इन्हें टिकट दे भी दे लेकिन वह समाज और पार्टी के हित में क्या कर पाएंगे यह तो पार्टी के आलाकमान नेताओं को ही सोचना चाहिए। यह बात और है कि ऐसे लोगों के भाग्य का फैसला तो जनता को ही करना है।

यूं तो दोनों ही राजनैतिक दलों के शीर्ष नेता पार्टी के निष्ठावान एवं ईमानदार कार्यकर्ताओं को राजनीति में आगे लाने का कह रहे हैं, लेकिन निकाय चुनावों में चल रही हलचल कुछ और हकीकत बयां कर रही है। पार्टी के कार्यकर्ताओं से ज्यादा अन्य लोग टिकट के लिए शीर्ष नेताओं के चक्कर लगा रहे है।

आगामी दिनों में होने वाले चुनावों के मद्देनजर ऐसे लोग मण्डल अध्यक्ष सहित अन्य नेताओं के दरवाजों पर नियमित दस्तक दे रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने अभी तक किसी भी वार्ड में अपने उम्मीदवार को लेकर कोई खुलासा नहीं किया है। दोनों ही पार्टियों को जीतने वाला आदमी चाहिए।

नहीं कोई तैयारी
नामांकन प्रक्रिया का दौर शुरू हो गया है। नामांकन के लिए अब मात्र एक दिन शेष रह गया है। लेकिन अभी तक सभी वार्डों में कांग्रेस व भाजपा के आवेदक अंधेरे में ही तीर चला रहे हैं। दोनों ही पार्टियों की ओर से पार्टी प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में कांग्रेसी व भाजपाई कार्यकर्ता एक दूसरे के मुंह ताकते ही नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस व भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की सूची 15 जनवरी को सीधे उपखण्ड कार्यालय ही भिजवाई जाएगी।

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