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जन्माष्टमी पर्व:श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार कई विशेष योग

नागौरएक महीने पहले
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  • 4 संयाेग जुड़ने से 12 काे ही मनाना श्रेष्ठ, 27 साल बाद बुधाष्टमी व सर्वार्थ सिद्धि का विशेष योग

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव भाद्रपद महीने के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाता है। लेकिन, ग्रह-नक्षत्रों की चाल में बदलाव होने से कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों एक ही दिन नहीं होते। अष्टमी तिथि 11 अगस्त मंगलवार सुबह 9 बजकर 7 मिनट से शुरू हो जाएगी और 12 अगस्त सुबह 11 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। वहीं इन दोनों तिथियों में रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं मिल रहा है।

रोहिणी नक्षत्र 13 अगस्त को भोर से 3.26 से मिल रहा है। भाद्रपद कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अष्टमी तिथि को ही मनाया जाता है। इस वजह से पर्व 11अगस्त मंगलवार को स्मार्त यानी गृहस्थ जन्माष्टमी पर्व मना सकेंगे। वहीं वैष्णव यानि साधु-सन्यासी, वैष्णव भक्त या वैष्णव गुरु से दीक्षा लेने वाले शिष्य 12 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व मना सकेंगे। स्मार्त अष्टमी तिथि से ही पर्व मनाते हैं, जबकि वैष्णव उदया तिथि मानते हैं। इस वजह से दो दिन पर्व का संयोग बन रहा है। इससे दो दिनों तक पर्व की धूम रहेगी।

लड्डू गोपाल को लगाएं पंजीरी, माखन मिश्री का भोग
जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी के पावन दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। भगवान कृष्ण के बाल रूप को लड्डू गोपाल कहा जाता है। जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल को तरह-तरह की चीजों का भोग लगाया जाता है।

जन्माष्टमी के दिन आटे की पंजीरी बनाकर लड्डू गोपाल को भोग लगाएं। आटे की पंजीरी काफी स्वादिष्ट होती है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आटे की पंजीरी लड्डू गोपाल को काफी पसंद है। लड्डू गोपाल को मक्खन बहुत पसंद है। उन्हें माखन चोर भी कहा जाता है।

लड्डू गोपाल को जन्माष्टमी के दिन माखन मिश्री का भोग अवश्य लगाएं। लड्डू गोपाल को मखाना पाक का भोग अवश्य लगाएं। लड्डू गोपाल को मखाना पाक मिठाई काफी पसंद है। लड्डू गोपाल को जन्माष्टमी के दिन मखाने की खीर का भोग लगाएं।

यह हैं 4 विशेष संयोग, जो शुभ साबित होंगे
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि का प्रारंभ 11 अगस्त सुबह होगा, जो 12 अगस्त को दिन तक रहेगा। ऐसे में 12 अगस्त को जन्माष्टमी मनाना उचित रहेगा। पंडित विमल पारीक ने बताया कि कृष्ण जन्माष्टमी पर 12 अगस्त को चार विशेष संयोग रहेंगे। श्रीकृष्ण के जन्म के समय अष्टमी बुधवार के दिन थी, जो इस भी साल है।

वृषभ का चंद्रमा, सर्वार्थ सिद्धि योग है, लेकिन इस बार रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन पाया है। जन्माष्टमी पर्व इस बार खास भी है, क्योंकि 27 साल बाद एक बेहद अद्भुत संयोग बन रहा है। 1993 के बाद जन्माष्टमी पर पहली बार बुधाष्टमी और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं।

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