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अधिकमास का असर:इस बार एक महीने की देरी से शुरू होंगे नवरात्र

नागौरएक महीने पहले
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  • अधिकमास के कारण सभी बड़े त्योहार 15 से 17 दिन की देरी से आएंगे, नवरात्र 17 अक्टूबर को

इस वर्ष 17 सितंबर को पितृ मोक्ष अमावस्या के अगले दिन से शारदीय नवरात्र की शुरुआत नहीं होगी। इसके लिए लोगों को एक महीने का इंतजार करना होगा। नवरात्र की शुरुआात 17 अक्टूबर को होगी। इसका कारण इस साल अधिमास होना है, जो हर तीन साल में एक बार आता है। नवरात्र के विलंब से होने के कारण इस बार दीपावली 14 नवंबर को होगी, जबकि यह गत वर्ष 27 अक्टूबर को थी।

अधिकमास होने के कारण 22 अगस्त को गणेशोत्सव के बाद जितने भी बड़े त्योहार हैं, वे गत वर्ष की तुलना में 10 से 15 दिन की देरी से आएंगे। वैसे पंडित व अन्य लोग नवरात्र देरी से प्रारंभ होने से खुशी जता रहे हैं। वे इस बात से भी खुश है कि दीपावली भी गत वर्ष की अपेक्षा इस बार 14 नवंबर को देरी से आएगी और उन्हें तैयारियों का मौका मिल जाएगा। इसलिए बढ़ जाता है एक माह : पंडित विमल पारीक के अनुसार तीज-त्योहारों की गणना हिन्दी पंचांगों के हिसाब से की जाती है। इसके लिए हिन्दी का माह और तिथि निर्धारित है। पंचांग के अनुसार उसी तिथि पर यह त्योहार आते हैं, लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार आगे पीछे इसलिए हो जाते है कि हिन्दी कैलेंडर में हर तीसरे साल अधिकमास होता है।

इस स्थिति में एक माह की अवधि बढ़ जाती है। इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर की गणना के हिसाब से त्योहार आगे पीछे होते है और उनका क्रम बदलता है। अंग्रेजी में लीप ईयर होता है, उसी तरह हिन्दी कैलेंडर में अधिकमास है। इस साल अधिकमास रहेगा, इसलिए एक महीना बढ़ जाएगा। इसलिए इस तरह की स्थिति बनेगी। 5 माह सोए रहेंगे देव : अधिकमास के कारण इस बार देवशयन काल 5 महीने का होगा, अधिकमास के कारण चार की बजाय पांच महीने का होगा देवशयन, श्राद्ध पक्ष के बाद आने वाले सारे त्योहार लगभग 15 से 20 दिन देरी से आएंगे। जन्माष्टमी, नवरात्र से दिवाली के बाद तक सभी पर्व 15 से 17 दिन की देरी से आएंगे।

ऐसा इसलिए होगा क्योंकि हर तीसरे वर्ष पडऩे वाला अधिकमास इस साल पड़ रहा है। आमतौर पर हर साल अगस्त-सितंबर में सबसे अधिक पर्व रहते हैं, लेकिन इस बार पर्वों की धूम अगस्त व अक्टूबर में रहेगी। सितंबर की शुरुआत के साथ ही पितृपक्ष शुरू हो जाएंगे। इसके बाद 18 सितंबर से अधिकमास शुरू होगा। इसलिए इस माह में कोई तीज-त्योहार नहीं रहेगा।

अश्विन... 3 सितंबर से 29 अक्टूबर तक रहेगा
अश्विन 3 सितंबर से प्रारंभ होकर 29 अक्टूबर तक रहेगा। इसमें बीच की अवधि वाली तिथि में 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक का समय अधिमास वाला रहेगा। इस कारण 17 सितंबर को पितृ मोक्ष अमावस्या के बाद अगले दिन 18 सितंबर से नवरात्र प्रारंभ नहीं होंगे, बल्कि नवरात्र का शुभारंभ 17 अक्टूबर को होगा, जबकि गत वर्ष 29 सितंबर को प्रारंभ हो गए थे। देवउठनी एकादशी 25 नवंबर को होगी।

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