नागौर में ABVP और NSUI को नहीं मिल रहा कैंडिडेट:जिसे मैदान में उतारना चाहते थे वो निर्दलीय लड़ेंगे

नागौर4 महीने पहले
दोनों छात्र संगठन बांता को मैदान में उतारना चाहते थे लेकिन अब वे निर्दलीय ही चुनाव लड़ेंगे।

छात्रसंघ चुनाव को लेकर इस बार बीआर मिर्धा कॉलेज में कोई मजबूत उम्मीदवार एबीवीपी और एनएसयूआई को अब तक नहीं मिल पाया है। ऐसे में पिछले तीन-चार साल से छात्र हितों को लेकर लड़ाई लड़ने वाले छात्र नेता वासुदेव बांता ही एक मात्र जीताऊ उम्मीदवार दोनों ही पार्टियों को लग रहा है। ऐसे में दोनों ही पार्टियां अपनी ओर बांता को खींचने में अपना पूरा जोर लगा रही है। हालांकि अब तक बांता ने किसी पार्टी में जाने का रुख नहीं किया है। बांता का कहना है कि वे किसी पार्टी को ज्वाइंन नहीं करेंगे, वे निर्दलीय ही चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में दोनों ही पार्टियों के लिए अब मिर्धा कॉलेज में एक मजबूत व जीताऊ चेहरा तराशना मुश्किल सा होता दिख रहा है। क्योंकि दोनों ही पार्टियां चाह रही है कि बांता उनकी पार्टी में शामिल हो जाए तो उनके सिंबल से जीत पक्की हो सकती है।

बांता के पास छात्रों का जनाधार
पिछले तीन चार सालों से छात्र नेता बांता चुनाव की तैयारी कर रहा है। इसको लेकर समय समय पर वो छात्र हितों को लेकर लड़ाई भी लड़ रहा है। दूसरी ओर ग्रामीण पृष्ठ भूमि से आने के चलते उसका ग्रामीण छात्रों पर होल्ड भी है। चुनाव की घोषणा से पहले से ही वो छात्रों के बीच कैंपेनिंग कर रहा है। शहर के लगभग सभी हिस्सों में पोस्टर लगा वो चुनाव प्रचार करने में अब तक सबसे आगे चल रहा है। वहीं गांवों में भी हर दूसरे दिन वो प्रचार प्रसार के लिए एक बड़े छात्र समूह के साथ जा रहा है। इन्हीं सब फीडबैक के चलते दोनों ही पार्टियां उसे अपनी पार्टी से चुनाव लड़ने का मन बनाते हुए उस पर डोरे डाल पार्टी में शामिल करना चाहती है।

9 दिन भूख हड़ताल की, आईसीयू में भी एडमिट हुआ
छात्र नेता बांता छात्र हितों को लेकर पिछले दिनों भूख हड़ताल पर बैठ गया था। उस वक्त भी वो चर्चा में आया था। कई छात्रों ने उसे सपोर्ट किया। वो भूख हड़ताल के दौरान बेहोश हो गया था, उसे अस्पताल के आईसीयू में दो दिन तक भर्ती कराया गया था। ऐसे में भूख हड़ताल के दौरान बड़ी संख्या में छात्र उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर मैदान में डटे रहे। ये उसकी छात्र राजनीति का एक बड़ा चैंजर था। जिसे उसने अच्छी तरह से भुनाया था।

इसलिए लड़ रहे हैं निर्दलीय चुनाव
दरअसल, वासुदेव बांता आरएलपी पार्टी यानी सांसद हनुमान बेनीवाल का समर्थक है। एक बड़ी संख्या में युवा जो कॉलेज में है वे सांसद बेनीवाल के समर्थक है। ऐसे में जीत का फॉर्मूला और एक बड़े छात्र समूह को अपनी ओर खींचने में ये एक बड़ा पॉइंट है। बांता कहते है कि आरएलपी पार्टी से चुनाव तो नहीं लड़ सकता लेकिन उसके बैनर तले चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। वहीं दूसरी ओर जो युवा छात्र राजनीति से जुड़े है और वर्तमान में छात्र नहीं है वे भी आरएलपी के बैनर तले उसे निर्दलीय ही चुनाव लड़ाने की तैयारी में जुटे है।

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