पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Nagaur
  • Water Feeding Thousands Of Trees And Plants From The Khetanda Mitra Mandal Tankers Even In The Corona Period: Speak Trees And Plants Are The Basis Of Our Life

पर्यावरण से प्यार करना इनसे सीखिए:एक हजार से अधिक पेड़ों को बचाने के लिए 15 टैंकरों से रोज दिया जाता है पानी; समाजसेवियों ने कहा- हरियाली आबाद रहेगी, तभी बचेगा इंसान

नागौरएक महीने पहले
मारवाड़ मुंडवा में पेड़-पौधों में पानी डालते समाजसेवी।

पेड़-पौधों से प्यार करना तो भला कोई इनसे सीखे। खेतण्डा मित्र मंडल के सदस्यों के प्रयासों से हरियाली बरकरार है। ये दिखाने हम आपको नागौर के मारवाड़ मुंडवा शहर लिए चलते हैं। यहां के हरे-भरे पेड़ों का जीवन बचाने के लिए चिलचिलाती गर्मी में टैंकरों से पानी डाला जाता है। एक हजार से अधिक ये पेड़ पिछले 10 साल की मेहनत का नतीजा हैं। इसमें बरगद, नीम, पीपल जैसे छायादार पेड़ शामिल हैं। रोज करीब 15 टैंकरों की मदद से पेड़ों में पानी डाला जाता है। संख्या ज्यादा होने के कारण एक पेड़ का नंबर 4 दिन बाद आता है।

जिले के मारवाड़ मुंडवा शहर के लोग पर्यावरण प्रेम के प्रति मिसाल पेश कर रहे हैं। इन दिनों गर्मी के चलते शहर के पोकण्डी तालाब से लेकर खेतण्डा तालाब तक और हनुमान जी का मंदिर व छोटी रीडी रास्तों पर लगे हुए हजारों पेड़-पौधों का जीवन संकट में आ गया था। ऐसे में खेतण्डा मित्र मंडल के सदस्य रोजाना सुबह टैंकरों से पानी लेकर पहुंचते हैं। यहां लगे पेड़ों के जड़ में पानी डाला जाता है।

तभी बचेगा मानव जीवन

इस कार्य के पीछे इनका मकसद बस इतना है कि शहर के क्षेत्र में लगे ये पेड़-पौधे हमेशा आबाद रहें। इनका मानना है कि पेड़ों की आबादी बढ़ने से ही मानव जीवन बचेगा। समाजसेवी गोपाल सारडा ने बताया कि पेड़- पौधे हमारे जीवन का आधार हैं। हमारी संस्कृति में भी ये देव तुल्य माने गए हैं। इसीलिए जनसहयोग से इनकी आराधना कर अपने जीवन को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।

अप्रवासियों का सहयोग

खेतण्डा मित्र मंडल के सदस्यों ने बताया कि कोरोना काल के चलते इन उद्यानों व तालाबों पर लोगों कि आवाजाही नहीं के बराबर है। तेज गर्मी के चलते भी पेड़-पौधों का जीवन संकट में आ रहा था। इसे देखते हुए खेतण्डा मित्र मंडल ने अप्रवासियों व शहर के भामाशाहों से मिलकर पेड़-पौधों का संरक्षण करने के लिए अभियान शुरू करने का निर्णय लिया। सभी के सहयोग से पेड़ों को बचाने का अभियान चल रहा है।

अलग-अलग सदस्यों को जिम्मेदारी

पेड़-पौधों को बचाने के लिए शुरू किये गए इस अभियान में खेतण्डा मित्र मंडल सदस्यों द्वारा कोरोना गाइडलाइन का पूरा ख्याल रखा जाता है। इसके लिए हर दिन 7-8 अलग-अलग सदस्यों को जिम्मेदारी दी जाती है, ताकि मौके पर अनावश्यक भीड़ इकट्ठी न हो पाए।

जीवन समृद्धि का संकेत

यहां खेतण्डा उद्यान में नीम गिलोय, तुलसी, एलोवेरा, पत्थरचट्टा और अर्जुन छाल सहित सैकड़ों औषधीय पौधे लगे हैं। इसके अलावा यहां अन्य पेड़-पौधों की हरियाली बेहद मनमोहक है। समाजसेवी गोपाल सारडा ने बताया कि हमारी संस्कृति में प्रकृति को ही भगवान माना गया है। ये हरे-भरे पेड़ हमें इस संकटकाल से उबरने और जीवन समृद्धि का संकेत देते हैं।

खबरें और भी हैं...