ये है खाटू का रेनबो स्टोन / ऑस्ट्रेलिया, इटली सहित दस देशों में इंटीरियर डिजाइनिंग में काम लेते हैं, इसे बिजली बचाने का स्त्रोत भी मानते हैं

Worked in interior designing in ten countries including Australia, Italy, it is also considered as a source of saving electricity
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Worked in interior designing in ten countries including Australia, Italy, it is also considered as a source of saving electricity

  • अनलॉक-1 के साथ ही खाटू स्टोन की मांग बढ़ी, 5 दिन में ही दस देशों से आए 3 करोड़ के ऑर्डर
  • 100 करोड़ का कारोबार है सालाना खाटू रेनबो स्टोन का, लॉकडाउन में ठप था काम, अब हुआ शुरू

दैनिक भास्कर

Jun 05, 2020, 04:53 AM IST

नागौर. ये है खाटू का रेनबो स्टोन। इटली, आस्ट्रेलिया सहित 10 देशों में घरों की आंतरिक सजावट इस पत्थर से हो रही है। खाटू स्टोन अपनी खूबसूरती व घरों को ठंडा रखने के लिए विख्यात है। प्रति वर्ष करीब 100 करोड़ का खाटू पत्थर विदेशों में जाता है। अब अनलॉक-1 के साथ ही इसकी मांग एकाएक बढ़ गई। खाटू के पत्थर की रेनबो के अलावा रेड, सेंड, गोल्डन व खारोळ वैरायटी निकलती है। इसके कुल उत्पादन की 30 प्रतिशत खपत अकेले आस्ट्रेलिया में है। इस कारोबार से जुड़े एक व्यापारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एक जून से अब तक विभिन्न देशों से कई व्यापारियों के पास 3 करोड़ के माल का ऑर्डर आ चुके जिसे सितंबर तक पहुंचाना है। लॉकडाउन में प्रदूषण घटने से इन पहाड़ियों व पत्थर की चमक बढ़ी है। 

खासियत : धूप में भी ज्यादा गर्म नहीं होता ये पत्थर
खाटू का पत्थर एसिड प्रूफ होता है। एसिड का सेंड स्टोन पर अधिक असर नहीं होता है। यह पत्थर जितना पुराना होता है धूप व मौसम से अधिक मजबूत बनता है। दिनभर ओपन फ्लोर तथा धूप में रहने के बाद भी पत्थर गर्म नहीं होता है। यह पत्थर तापमान को ठण्डा रखने में सहायक है। यही कारण है विदेशों में जिस घर में एसी लगा होता है वहां इस पत्थर से इंटीरियर किया जाता है। इसे वहां बिजली की बचत का मुख्य स्त्रोत भी माना जाता है।

1982 से विदेशों में मांग बढ़ी

1982 में दिल्ली में एशियार्ड 82 लगा था। उस समय खाटू के पत्थर को काफी सराहना मिली। कार्यक्रम के तत्कालीन निदेशक एनके पुरी ने भी इसे एक्सपोज करने में सहयोग किया। इस कार्यक्रम के बाद विदेशों में मांग बढ़ी।

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