नवरात्र विशेष:बस्सी की पहाड़ी पर स्थित माकड़ोल माता का मंदिर, जहां मार्कंडेय ऋषि ने की थी तपस्या, मान्यता: उनके लिए गंगा चट्‌टान से प्रकटीं

परबतसर9 दिन पहलेलेखक: दीनानाथ योगी
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मंदिर के सामने बहता झरना एवं माकड़ोल माता की प्रतिमा। - Dainik Bhaskar
मंदिर के सामने बहता झरना एवं माकड़ोल माता की प्रतिमा।
  • मान्यता है कि यहां मार्कंडेय ऋषि ने तपस्या की, महाभारत काल में हुई स्थापना

पुष्कर राज को तीर्थराज का दर्जा प्राप्त है, पुष्कर सहित 12 कोस की परिक्रमा में आसपास की पहाड़ियों में, गुफाओं में प्राचीनकाल में हजारों वर्षों तक धरती के रचयिता ब्रह्माजी सहित कई ऋषि मुनियों ने घोर तपस्याएं की थी। नागौर जिले के अंतिम छोर पर बसे गांव बस्सी की दूरी पुष्कर से मात्र 11 किमी दूर है।

अजमेर- नागौर जिलों की सीमा पर बसे ग्राम बस्सी में कई रमणीक स्थान है। उनमें से एक प्रसिद्ध स्थान है माकडोल माता मंदिर है। यह माता मंदिर नागौर व अजमेर जिले के जन जन की आस्था का केंद्र है। ग्राम बस्सी के समाजसेवी महावीर नाहर, जगदीश मेघवाल, पंचायत समिति सदस्य निर्मल मेघवाल ने बताया कि ऐसी किंवदंती है कि महाभारत काल में मार्केंडेय ऋषि ने माताजी की मूर्ति चट्टान की छत्रछाया में स्थापित कर यहां कई सालों तक तपस्या की थी।

ऐसी किवदंती है कि ऋषि रोजाना सुबह उठकर दैवीय शक्ति से उड़कर गंगाजी में जाकर स्नान करके आते थे, एक दिन गंगा मैया ऋषि पर प्रसन्न हो गई और ऋषि को वरदान दिया कि कल से आपके तपस्या स्थल पर माता मंदिर के सामने मेरे पानी का झरना चालू हो जाएगा, ऋषि ने कहा मैं ऐसा कैसे मानू तो गंगा मैया ने कहा आपका कमंडल छोड़ जावो कल आपके स्नान करने के समय कमंडल व पानी का झरना माता मंदिर के सामने प्रकट हो जाएंगे, सुबह ऋषि उठे तो माता मंदिर के सामने एक चट्टान के नीचे से झरना बह रहा था व कमंडल भी झरने के पास मौजूद था। उस दिन के बाद ऋषि ने गंगा जी जाना छोड़ दिया व झरने में स्नान करके मां शक्ति की आराधना करने लगे।

मार्कंडेय ऋषि द्वारा माता की मूर्ति की स्थापना करने के कारण ही मंदिर का नाम माकडोल माता मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है, यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है। यह क्षेत्र बस्सी ग्राम पंचायत में आता है, पहाड़ी के पूर्व का भाग अजमेर जिले में आता है व मार्केंडेय ऋषि के नाम से अजमेर जिले में मंदिर से 2 किमी दूर ही माकड़वाली गांव है।

माताजी के मंदिर का सबसे बड़ा चमत्कार है मंदिर के ऊपर पहाड़ी पर लगे मधुमखियों के छाते, यहां लोग अगरबत्तियां, नारियल चढ़ाते है। खीर चूरमे बनाते है, धुंवा फैलता, धुंवे से मखियां उड़ती है पर किसी को नुकसान नहीं पहुंचती है पर मंदिर परिसर के आस पास पाप, दुराचार का कोई काम करते है मखियां यहां हमला कर देती है।

मखियां काटने से कई लोग गंभीर घायल हो चुके है, इलाज होने के बाद पीड़ितों ने खुद स्वीकार किया कि किसी महिला पर गलत नजर डाली या चोरी चकारी की। पंचायत समिति सदस्य निर्मल मेघवाल, जगदीश मेघवाल, मायापुर सरपंच प्रेमराज गुर्जर, माता मंदिर पुजारी छोटूसिंह रावत, पूर्व सरपंच भंवरसिंह रावत, समाजसेवी महावीर नाहर, प्रहलाद पाराशर, हरिशंकर पंवार ने विधायक रामनिवास गावड़िया से मांग की है कि माकडोल माता मंदिर सहित क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों को पुष्कर- अजमेर की पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल कराए। बस्सी की पहाड़ी पर चट्टान के बीच माताजी की मूर्ति की स्थापना महाभारत काल में की थी जो आज उसी स्वरूप में है।

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