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राजस्थान में गहराने लगा बिजली संकट:कोल इण्डिया ने घटाई सप्लाई, कोयले की कमी से प्रदेश की 10 यूनिट बंद; प्रोडक्शन घटा, लेकिन डिमांड बढ़ने लगी

जयपुर2 महीने पहले

राजस्थान में एक बार फिर बिजली व्यवस्था बिगड़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। कोल इंडिया राजस्थान को कोयले की जरूरत के मुताबिक पूरी सप्लाई अब भी नहीं दे पा रहा है। भारत सरकार से हुई वार्ता और वादे के मुताबिक कोल इंडिया को रोजाना 7 रैक कोयला भेजना था, लेकिन 4 रैक कोयला ही राजस्थान को भेजा जा रहा है। इससे कोयले की कमी हो रही है। इसका सीधा असर बिजली बनाने वाले पावर प्लांट पर पड़ रहा है। उन्हें बंद करना पड़ रहा है।

कोयले की कमी और अन्य कारणों से करीब 10 यूनिट बंद पड़ी है। बिजली खपत भी 20 करोड़ यूनिट रोजाना से बढ़कर 24 करोड़ यूनिट हो गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिजली संकट बढ़ सकता है।

कालीसिन्ध थर्मल पावर प्लांट।
कालीसिन्ध थर्मल पावर प्लांट।

कोयले की कमी और टेक्निकल कारणों से अलग-अलग 10 यूनिट्स हैं बंद
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुताबिक कोयले की कमी के कारण सूरतगढ़ थर्मल की 250-250 मेगावट की 5 यूनिट बंद हैं। टेक्निकल कारणों से छबड़ा की 660 मेगावाट की 1 यूनिट, कालीसिंध की 600 मेगावाट की 1 यूनिट और छबड़ा थर्मल की 250 मेगावाट की 3 यूनिट बंद हैं। इस वजह से 3260 मेगावाट बिजली का प्रोडक्शन कम हो पा रहा है। कोल इंडिया की तरफ से कोयले की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने की वजह से सूरतगढ़ थर्मल की 250 मेगावाट की 5 इकाइयां बंद हैं। जबकि छबड़ा थर्मल की 250 मेगावाट की 2 इकाइयों के लिए कोल इंडिया काफी समय से कोयले की आपूर्ति नहीं कर रहा है।

ग्रिड की सुरक्षा के लिए ग्रामीण और म्यूनिसिपल इलाकों में रोस्टर से लोड शेडिंग
जेवीवीएनएल के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश से मानसून की हो रही विदाई और गर्मी बढ़ने के कारण बिजली की मांग में 3 हजार 500 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है। बिजली की मांग 9 हजार मेगावाट के लगभग चल रही थी, जो अब 12 हजार 500 मेगावाट तक पहुंच गई है।

कोल इंडिया से कोयले की कम सप्लाई आने की वजह से प्रदेश के थर्मल प्लांटों में बिजली का प्रोडक्शन कम हो रहा है। ऐसे में ग्रिड की सुरक्षा बनाए रखने के लिए ग्रामीण इलाकों और म्यूनिसिपल क्षेत्रों में रोस्टर से लोड शेडिंग करनी पड़ रही है।

विद्युत वितरण निगम के अध्यक्ष भास्कर ए. सावंत ने बताया कि सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट की 250 मेगावाट की 6 यूनिट, छबड़ा थर्मल की 250 मेगावाट की 2 यूनिट, कोटा थर्मल की 1240 मेगावाट की 7 यूनिट के लिए कोयला कोल इंडिया लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनीज एनसीएल और एसईसीएल से मिलता है।

बातचीत के बाद 1 अक्टूबर को भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के सब-ग्रुप ने 7 कोयले की रैक रोजाना राजस्थान को देने का फैसला किया था, लेकिन राजस्थान को 1 से 5 अक्टूबर के बीच कोयले की केवल 4 रैक रोजाना ही मिल पाई है।

विंड पावर से भी कम मिल रही बिजली
सावंत ने बताया कि राजस्थान सरकार के लेवल पर लगातार कोशिश की जा रही है, जिससे कि प्रदेश के थर्मल प्लांट को कोल इंडिया से सही मात्रा में कोयला मिलता रहे। प्रदेश के पावर प्लांट में सामान्य तौर पर बिजली का प्रोडक्शन शुरू हो सके। उन्होंने बताया कि विंड पावर से सामान्य तौर पर 500 से 1000 मेगावाट मिलती थी, वह भी अब बहुत कम मात्रा में मिल रही है।

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