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राजस्थान विधानसभा:अब तक 13 बार अविश्वास और 5 बार विश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है, एक बार भी नहीं गिरी सरकार

जोधपुरएक वर्ष पहले
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राजस्थान विधानसभा। - Dainik Bhaskar
राजस्थान विधानसभा।
  • राजस्थान विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव अंतिम बार 1985 में तत्कालीन हरिदेव जोशी सरकार के खिलाफ लाया गया था
  • विधानसभा में आज के पहले 2009 में गहलोत लेकर आए थे अपनी सरकार के पक्ष में आखिरी बार विश्वास प्रस्ताव

राजस्थान की राजनीति में आया तूफान अब थम चुका है, और गहलोत सरकार ने विश्वास मत हासिल कर लिया है। प्रदेश में अब तक 13 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है और आज समेत 5 बार विश्वास प्रस्ताव। आज से पहले विश्वास प्रस्ताव अंतिम बार साल 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्वयं लेकर आए थे। जबकि अविश्वास प्रस्ताव अंतिम बार 35 बरस पूर्व तत्कालीन हरिदेव जोशी सरकार के खिलाफ वर्ष 1985 में लाया गया था।

खासियत की बात यह है कि प्रदेश की विधानसभा में 17 बार हो चुके विश्वास-अविश्वास के इस खेल में हर बार नतीजा सरकार के पक्ष में ही रहा। यानि एक बार भी सरकार नहीं गिरी। वहीं लोकसभा में अब तक 26 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है।

साल 1985 में लाया गया था अंतिम अविश्वास प्रस्ताव
प्रदेश की विधानसभा में सबसे पहला अविश्वास प्रस्ताव टीकाराम पालीवाल की सरकार के खिलाफ निर्दलीय इंद्रनाथ मोदी लेकर आए थे। इस पर 21 अक्टूबर को मतदान हुआ और ध्वनि मत से फैसला किया गया। करीब 17 बरस तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे मोहनलाल सुखाड़िया को सबसे अधिक 6 बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा और हर बार वे अपनी सरकार बचाने में कामयाब रहे।

राजस्थान में विधानसभा में अंतिम बार 29 जुलाई को भैरोसिंह शेखावत, नाथूराम मिर्धा, प्रो. केदार व श्योपत सिंह मिलकर हरिदेव जोशी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए। यदि आज भाजपा के अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है तो 35 वर्ष बाद विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

5 बार लाया गया विश्वास प्रस्ताव
1990 में राज्य विधानसभा में पहली बार विश्वास प्रस्ताव देखने को मिला। अल्पमत में सरकार का गठन करने वाले भैरोसिंह शेखावत ने 29 मार्च 1990 को विश्वास प्रस्ताव रखा और उसी दिन ध्वनि मत से विजयी घोषित किए गए। इसके बाद भैरोसिंह शेखावत ने 8 अक्टूबर 1990 को एक बार फिर विश्वास मत रखा। 10वीं विधानसभा में भैरोसिंह शेखावत ने 31 दिसम्बर 1993 को विश्वास प्रस्ताव रखा। विधानसभा में अंतिम बार 13वीं विधानसभा में अशोक गहलोत ने 3 जनवरी 2009 को विश्वास मत का सामना किया था। आज गहलोत की तरफ से पेश पांचवां विश्वास मत था।

लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव
लोकसभा में अंतिम बार अविश्वास प्रस्ताव मोदी सरकार के खिलाफ अप्रैल 2018 में कांग्रेस लेकर आई थी। लोकसभा में लाए गए अविश्वास प्रस्तावों से एक बार भी सरकार नहीं गिरी। अलबत्ता 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने अविश्वास प्रस्ताव पर बहस का सामना किया और उन्होंने स्वयं का पक्ष रखने के बाद मतदान होने से पूर्व अपने त्यागपत्र देने की घोषणा कर दी।

विश्वास प्रस्ताव पर गिरी थी वाजपेयी सरकार
साल 1999 में लोकसभा में विश्वास से भरे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी सरकार के पक्ष में विश्वास प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया था। इस पर जमकर बहस हुई। इस दौरान देश के लोगों को संसदीय इतिहास के कुछ बेहरीन तर्क-वितर्क सुनने को मिले। अंत में हुए मतदान में वाजपेयी सरकार एक मत से गिर गई। संसद में एक मत से सरकार गिरने की घटना को ऐतिहासिक माना जाता है।

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