​​​​​​​1 लाख वोटों से हारी सीटों पर नई रणनीति:राजस्थान में 23 सीटें ऐसी, जानिए कांग्रेस कितने महीने पहले देगी टिकट

उदयपुर4 महीने पहलेलेखक: समीर शर्मा

9 साल बाद कांग्रेस का चिंतन शिविर हो रहा है। राजस्थान में 2 लोकसभा चुनाव और पांच राज्यों में चुनाव हार चुकी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा एजेंडा चुनावी रणनीति रहेगा। कांग्रेस से जुड़े विश्वनीय सूत्रों का कहना है कि शिविर में लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर विशेष फोकस होगा।

कांग्रेस उन सीटों पर अलग रणनीति तैयार करने पर गंभीरता से विचार कर रही है, जहां 1 लाख या इससे ज्यादा वोट से हार का सामना करना पड़ा। राजस्थान के लिहाज से ये रणनीति इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 25 में से 23 सीटों पर 1 लाख या इससे ज्यादा वोट के अंतर से हारी थी।

राजस्थान में वर्ष 2014 और 2019 दोनों ही बार कांग्रेस को सभी 25 सीटें गंवानी पड़ी थीं। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है, ऐसे में आलाकमान को अगले लोकसभा चुनाव में यहां से काफी उम्मीदें हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना भी है कि आलाकमान की ताकत बढ़ाने और कांग्रेस में गुटबाजी समाप्त करने के लिए ऐसी रणनीति की जरूरत भी है।

चिंतन शिविर के बाद पार्टी अपने स्तर पर कई बड़े बदलाव करने वाली है। इसको लेकर भी नया फॉर्मूला लागू होगा।
चिंतन शिविर के बाद पार्टी अपने स्तर पर कई बड़े बदलाव करने वाली है। इसको लेकर भी नया फॉर्मूला लागू होगा।

ऐनवक्त पर नहीं निकालेंगे उम्मीदवारों की सूची
राजस्थान में वर्ष 2018 में सरकार बनाने के बावजूद वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 2 सीट को छोड़ बाकी सभी 23 सीटें 1 लाख से अधिक के वोटों के अंतर से हारी थी। सूत्रों के अनुसार पार्टी आलाकमान टिकट वितरण की रणनीति बदलने पर भी काम कर रहा है। शिविर में फैसला लिया जा सकता है कि चुनाव से ठीक पहले उम्मीदवारों की सूची नहीं निकाली जाए।

भारी मतों के अंतर से जहां भी पार्टी पिछला लोकसभा चुनाव हारी, वहां करीब 4 महीने पहले ही उम्मीदवार घोषित कर दिए जाए। इससे संबंधित सीटों पर उम्मीदवार को काम करने और प्रचार करने का समय मिल जाएगा।

पीके ने अपने प्रजेंटेशन में भी दिया है ये फाॅर्मूला
हाल ही में कांग्रेस आलाकमान के साथ चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) की मुलाकात देशभर में काफी चर्चा में रही। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के सामने पीके ने जो प्रजेंटेशन दिया था, उसमें सभी सीटों पर अगले लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारने के बजाय करीब 350 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए कहा था। वहीं, यह भी एक बिन्दु शामिल किया था कि चुनाव से ठीक पहले उम्मीदवार उतारने की परंपरा पर अंकुश लगाया जाए। विशेषकर वहां जहां पिछले चुनाव में हार में बड़ा अंतर हो।

चित्तौड़गढ़-राजसमंद में सबसे बड़ी हार

2 सीटें 1 लाख से कम अंतर से हारी सीटें - दौसा और करौली-धौलपुर

2 सीटें 1 से 2 लाख के अंतर से हारी - टोंक-सवाई माधोपुर और नागौर

5 सीटें 2 से 3 लाख के अंतर से हारी - जोधपुर, जालोर, कोटा, बीकानेर और सीकर

7 सीटें 3 से 4 लाख के अंतर से हारी - जयपुर ग्रामीण, जैसलमेर-बाड़मेर, बांसवाड़ा, चूरू, झुंझुनूं, अलवर और भरतपुर

7 सीटों पर हार का अंतर 4 से 5 लाख - जयपुर, अजमेर, पाली, उदयपुर, झालावाड़-बारां, भीलवाड़ा और श्रीगंगानगर

2 सीटों पर हार का अंतर 5-6 लाख - चित्तौड़गढ़ और राजसमंद

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