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राजस्थान में शुरू हुई 660 मेगावाट की बिजली यूनिट:21 रैक भरकर 84000 टन कोयला भी मिला, बिजली के संकट से राहत की उम्मीद

जयपुर22 दिन पहले
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छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट। - Dainik Bhaskar
छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट।

राजस्थान के लिए बिजली प्रोडक्शन से जुड़ी बड़ी खुशखबरी है। 660 मेगावाट के छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट से बिजली का प्रोडक्शन शुरू हो गया है। सुपर क्रिटिकल यूनिट नम्बर 6 से बिजली बनने लग गई है। इस यूनिट में सालाना शट डाउन के कारण बिजली पैदा नहीं हो पा रही थी। इसके अलावा राजस्थान में पावर प्लांट्स के लिए जो कोयले का संकट चल रहा था,उसमें भी कुछ राहत मिली है। 5 नवम्बर की देर रात 21 रैक कोयला यानी करीब 84 हजार टन कोयले से भरी मालगाड़ियां कोल माइंस ब्लॉक्स एरिया से राजस्थान के लिए डिस्पैच करवाने में कामयाबी मिली है।

सीएम,सीएस,एसीएस,पीएस और बिजली कम्पनियों के अफसर
सीएम,सीएस,एसीएस,पीएस और बिजली कम्पनियों के अफसर

छबड़ा में 660 मेगावाट सुपर क्रिटिकल यूनिट से बिजली प्रोडक्शन शुरू

प्रदेश के एनर्जी डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेट्री (ACS) डॉ सुबोध अग्रवाल ने बताया कि डॉ. अग्रवाल ने बताया कि देशभर में कोयला संकट के बावजूद राजस्थान में 2600 मेगावाट से ज्यादा की बंद यूनिट्स में बिजली का प्रोडक्शन शुरू किया गया है। छबड़ा की 660 मेगावाट की सुपरक्रिटिकल यूनिट नम्बर 6 में बिजली बनने लग गई है। इस यूनिट में सालाना शटडाउन के कारण बिजली प्रोडक्शन नहीं हो पा रहा था। इससे पहले अक्टूबर में RVUNL (राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड) के सूरतगढ़, कालीसिंध और कोटा थर्मल प्लांट की 2000 से ज्यादा मेगावाट की 6 यूनिट्स में बिजली बनने लग गई है।

हालांकि पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में बिजली की कमी के कारण शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली की कटौती नहीं की जा रही है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि कोयला की उपलब्धता बढ़ाने की भी कोशिशें की जा रही हैं। सीएम गहलोत के निर्देशों के अनुसार प्रोडक्शन,डिस्ट्रिब्यूशन और एनर्जी डवलपमेंट से जुड़ी कम्पनियों ने आपसी कॉर्डिनेशन कर दीपावली के त्योहार पर पूरे प्रदेश में लगातार बिजली की सप्लाई बनाए रखी। एनर्जी डिपार्टमेंट के मंत्री डॉ. बीडी कल्ला भी बिजली प्रोडक्शन,डिमांड और उपलब्धता का रेग्युलर रिव्यू ले रहे हैं और हाई लेवल मीटिंग्स में गाइडेंस दे रहे हैं।

फाइल फोटो-कोल रैक
फाइल फोटो-कोल रैक

5 नवम्बर को अब तक सबसे ज्यादा 21 कोल रैक डिस्पैच हुईं

ACS माइंस, पेट्रोलियम एंड एनर्जी डॉ.अग्रवाल ने बताया कि 5 नवम्बर को पहली बार कोल इंडिया और राजस्थान के एनर्जी डिपार्टमेंट की कोल माइंस दोनों से मिलाकर कोयले की 21 रैक डिस्पेच कराने में कामयाबी मिली है। इससे पहले पिछले कुछ दिनों से कोयले की औसत तौर पर रोजाना 16-17 रैक डिस्पेच हो पा रही थीं। 30 अक्टूबर को तो सब मिलाकर 13 रैक ही कोयले की डिस्पैच हो पाई थीं। इसके बावजूद प्रदेश में कहीं भी बिजली का सप्लाई मैनेजमेंट नहीं बिगड़ने दिया गया। प्रदेश में बिजली की कमी से कटौती नहीं की गई। 5 नवंबर को देर रात तक राज्य सरकार के कोल ब्लॉक पीकेसीएल से कोयले की 11 रैक डिस्पेच हुई हैं। वहीं कोल इंडिया की सब्सीडरी यूनिट एनसीएल से 4 और एसईसीएल से कोयले की 6 रैक डिस्पेच हुई हैं।