भ्रष्टाचारियों से पूछताछ के लिए चाहिए परमिशन:बिना मंजूरी के सरकारी अधिकारी-कर्मचारी को नहीं बुलाया जा सकता

जयपुर8 महीने पहले

किसी सरकारी अफसर और कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर अब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) अब बिना अनुमति पूछताछ नहीं कर सकेगी। सरकारी कर्मचारी और अफसर के खिलाफ जांच व पूछताछ करने के लिए पहले सरकार से मंजूरी लेनी होगी। सरकारी विभाग से मंजूरी मिलने के बाद ही ACB जांच या पूछताछ कर सकेगी। राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार निवारण संशोधन एक्ट पर केंद्र की एसओपी को लागू कर दिया है। रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के मामलों में ये प्रावधान लागू नहीं होंगे।

गृह विभाग से जारी एसओपी के अनुसार ACB को अब किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जांच करने और पूछताछ करने से पहले संबंधित विभाग से एक तय फॉर्मेट में मंजूरी लेनी होगी। ACB के अफसर नई एसओपी के हिसाब से ही जांच कर सकेंगे, सीधे अब बिना मंजूरी किसी-अफसर कर्मचारी को न पूछताछ के लिए बुलाया जा सकेगा और न जांच शुरू हो सकेगी।

मंत्री-विधायकों और बड़े अफसरों से ACB डीजी ही पूछताछ कर सकेंगे
मंत्री विधायक, सातवें वेतन आयोग के तहत पे लेवल 15 और इससे ऊपर के कर्मचारी, बोर्ड, आयोग, निगम और राजनीतिक इकाइयों के चेयरमैन व सदस्यों से ACB में काम कर रहे डायरेक्टर जनरल(DG) स्तर के अफसर ही सरकार की मंजूरी के बाद जांच और पूछताछ कर सकेंगे। इससे नीचे के स्तर का अफसर जांच और पूछताछ नहीं कर सकेगा।

ACB का जूनियर अफसर अब सीनियर अफसरों से पूछताछ नहीं कर सकेगा
ACB के जूनियर अफसर सरकार के अफसरों से पूछताछ नहीं कर सकेंगे, रैंक के हिसाब से ही पूछताछ करने वाले ACB अफसर का स्तर तय किया है। पे लेवल 21 से 24 तक के अफसर-कर्मचारियों से पूछताछ के लिए ACB के एडीजी या इसके बराबर की रैंक का अफसर ही सरकार की मंजूरी के बाद जांच और पूछताछ कर सकेगा।

राज्य सेवा के अफसरों से ACB आईजी-डीआईजी ही पूछताछ कर सकेंगे
राज्य सेवा के अधिकारियों के पे लेवल 12 से 20 तक के अफसर-कर्मचारियों से पूछताछ और जांच के लिए आईजी या डीआईजी स्तर का अफसर ही पूछताछ और जांच करेगा। अधीनस्थ सेवा, मंत्रालयिक कर्मचारी और फोर्थ ग्रेड कर्मचारियों से एसपी, एडिशनल एसपी या डिप्टी एसपी स्तर के अफसर ही जांच और पूछताछ कर सकेंगे।

RAS एसोसिएशन के विरोध के बाद लागू हुए प्रावधान
पिछले दिनों RAS अफसर भागचंद बधाल से बिना तय प्रक्रिया अपनाए एक जूनियर ACB अफसर के पूछताछ करने के मामले में भारी विरोध हुआ था। RAS एसोसिएशन के विरोध के बाद विवाद में आए सबसे ज्यादा ट्रैप करने वाले ACB अधिकारी नरोत्तमलाल वर्मा का तबादला करना पड़ा था।