कांग्रेस विधायक मलिंगा को हाईकोर्ट से जमानत:1 लाख का पर्सनल बॉन्ड,50-50 हजार की दो सिक्योरिटी जमा, डिस्कॉम AEN के हाथ-पैर तोड़ने का मामला

जयपुर4 महीने पहले
कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को हाईकोर्ट से जमानत - Dainik Bhaskar
कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को हाईकोर्ट से जमानत

कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। 1 लाख रुपए का पर्सनल बॉन्ड और 50-50 हजार रुपए की दो सिक्योरिटी जमा कराने का आदेश देते हुए कोर्ट ने उन्हें जमानत दी। कोर्ट ने कहा आरोपों के मुताबिक विधायक मलिंगा पीड़ित की पिटाई करने वालों में शामिल नहीं थे। बल्कि यह आरोप है कि विधायक के साथ आए 5-6 लोगों ने पिटाई की है। घटना केवल इसलिए होनी बताई है, क्योंकि पीड़ित SC और ST कास्ट से आते हैं,लेकिन इसका निर्धारण नहीं किया जा सकता है। घटना के पीछे कुछ और कारण रहा है,जोकि पता नहीं है और निश्चित तौर पर इस वक्त तय नहीं किया जा सकता है। इसका निर्धारण ट्रायल के दौरान सबूत मिलने के बाद ही हो सकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में तब तक एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को बंदी बनाकर रखने का औचित्य नहीं है।

धौलपुर के बाड़ी विद्युत निगम कार्यालय में AEN और JEN से मारपीट के मामले में कोर्ट ने यह जमानत दी है। इससे पहले मलिंगा ने 11 मई को जयपुर के पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव के सामने सरेंडर किया था। 12 मई की दोपहर को उन्हें एससी-एसटी कोर्ट में पेश किया गया। जहां वकीलों की तमाम दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मलिंगा को 15 दिन की ज्युडिशियल कस्टडी में भेज दिया था।15 दिन बाद विधायक को फिर से कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे। लेकिन इस बीच विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा की ओर से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल कर दी गई। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें जमानत दी है।

गलत तरीके से विधायक का नाम केस में जोड़ा

गिर्राज मलिंगा के एडवोकेट सुधीर जैन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि हमने कोर्ट में पैरवी करते हुए कहा कि गलत तरीके से विधायक का नाम केस में जोड़ा गया है। मारपीट की घटना के वक्त घटनास्थल पर गिर्राज सिंह मलिंगा मौजूद ही नहीं थे। पुलिस-प्रशासन की रिपोर्ट में भी अज्ञात व्यक्तियों पर मारपीट के आरोप हैं। एसपी ने कलेक्टर को जो रिपोर्ट दी है। उस रिपोर्ट में यह तथ्य है कि अज्ञात व्यक्तियों ने इंजीनियर्स से मारपीट की। विधायक तो वेल आईडेंटीफाइड व्यक्ति हैं। उन्हें सब जानते हैं। वो वहां पर होते तो कई लोग उन्हें पहचानते। लेकिन ऐसे तथ्य या गवाह नहीं मिले हैं। कोर्ट को यह भी कहा गया कि बिजली विभाग के घायल अधिकारियों-इंजीनियर्स के जिस तरह की चोटें लगी हैं। उनके आधार पर धारा 307 का केस नहीं बनता है। केस में गलत रूप से षड़यंत्रपूर्वक फंसाने के लिए विधायक को आरोपित किया गया है। निचली कोर्ट में विधायक की पैरवी करने वाले एडवोकेट अब्दुल सगीर खान ने बताया कि एससी-एसटी कोर्ट के फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच में विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा की ओर से बेल अपील पेश की गई थी।

विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा ने सरेंडर के वक्त बयान दिया था कि - मुख्यमंत्री के कहने पर मैंने सरेंडर किया है। मुख्यमंत्री ने मेरे से कहा कर्मचारियों में रोष है आप सरेंडर हो जाओ, मेरे ऊपर लगाए जा रहे आरोप निराधार है , मुझे कानून पर पूरा भरोसा है। इससे पहले एक अन्य बयान में विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सूबे की पुलिस के मुखिया DGP एमएल लाठर पर आरोप लगाया था कि DGP मुझसे व्यक्तिगत दुश्मनी रखते हैं। इसके जवाब में DGP ने कहा कि विधायक गिरफ्तारी के डर से इस तरह के आरोप मुझ पर लगा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला ?

धौलपुर के बाड़ी विद्युत निगम कार्यालय में 28 मार्च 2022 को इंजीनियर हर्षाधिपति और नितिन गुलाटी के साथ मारपीट की घटना हुई। प्रकरण में एईएन हर्षाधिपति ने विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा और अन्य के खिलाफ 29 मार्च को नामजद मारपीट, राज्य कार्य में बाधा और एससी एसटी एक्ट में केस रजिस्टर्ड कराया था। मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। सीएम ने धौलपुर एसपी शिवराज मीणा का भी तबादला कर दिया था। बिजली विभाग के इंजीनियर्स के साथ मारपीट होने के बाद निगम के कर्मचारियों में आक्रोश भड़का गया था। विधायक की गिरफ्तारी को लेकर विद्युत निगम के कर्मचारियों ने प्रदेश स्तर तक धरने प्रदर्शन भी किए थे। जिसके बाद विधायक राजेंद्र गुढ़ा को साथ लेकर मलिंगा ने सीएम हाउस पहुंचकर गहलोत से इसी सिलसिले में मुलाकात की थी। फिर आरोपी विधायक ने सीआईडी सीबी के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।

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