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प्रमुख सचिव साइडलाइन, मंत्री पति डबल पावर में:मंत्रियों ने लाखों लोगों के सामने कराई जगहंसाई; संगठन के मुखिया ने किया हिसाब बराबर

जयपुर7 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी
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  • हर शनिवार पढ़िए और सुनिए ब्यूरोक्रेसी और राजनीति से जुड़े अनसुने किस्से

सरकार के गांवों से जुड़े विभाग में हाल ही में नियमों में हुए एक बड़े बदलाव की ब्यूरोक्रेसी से लेकर सियासत तक खूब चर्चा हो रही है। महकमे में कई बड़े मामलों में अब फाइल डायरेक्टर से सीधे मंत्री के पास जाएगी, बीच में प्रमुख सचिव का दखल खत्म। इस बदलाव से महकमे में डायरेक्टर का पावर बढ़ गया है। डायरेक्टर भी मंत्री के पति हैं। अब पावर बढ़ने से जलवे भी बढ़ गए हैं। इस महकमे में प्रमुख सचिव को साइड लाइन करने के लिए किए गए इस बदलाव से भविष्य में होने वाले टकराव भी टल गए हैं।

भरी कैबिनेट में फूटा स्वास्थ्य मंत्री का दर्द
स्वास्थ्य महकमे वाले मंत्रीजी न्यू ईयर पार्टियों पर रोक लगाना चाहते थे, लेकिन उनकी चली नहीं। अब नए साल की पार्टियों के बाद राजधानी में रोज कोरोना विस्फोट हो रहा है। हाल ही में कोरोना को लेकर बुलाई गई मंत्रिपरिषद में स्वास्थ्य महकमे वाले मंत्रीजी ने कोरोना फैलने के लिए न्यू ईयर की पार्टियों को जिम्मेदार ठहराया। मंत्रीजी का तर्क था कि न्यू ईयर की पार्टियों की वजह से ही जयपुर में कोरोना ज्यादा फैला।

ब्यूरोक्रेसी के मुखिया के लिए लॉबिंग तेज
इस महीने ब्यूरोक्रेसी के मुखिया का रिटायरमेंट है, इसलिए इस पद पर कौन अफसर बैठेगा इसे लेकर ब्यूरोक्रेसी में हलचल तेज है। कई दावेदार लॉबिंग में जुटे हैं। महिला आईएएस के साथ ही दिल्ली में डेपुटेशन पर रहे एक आईएएस का नाम भी दावेदारों में प्रमुखता से उभरा है। सीएम के नजदीकी अफसर उनकी लॉबिंग में जुटे हैं। फिलहाल नाम फाइनल होने तक रोज कई समीकरण बनेंगे-बिगड़ेंगे।

तेजतर्रार मंत्री ने बदलवा दिया मीटिंग का फॉर्मेट
कोरोना फैलने के बाद प्रदेश के मुखिया मंत्रिपरिषद से लेकर रिव्यू बैठकें तक लाइव कर रहे थे। यह सिलसिला कोरोना की पहली लहर से चल रहा था। पिछले दिनों सरकार के तेजतर्रार मंत्री लाइव बैठक में दो-दो मंत्रियों से उलझ गए। मंत्रियों के मतभेदों को सबने सुना। प्रदेश के मुखिया को कहना पड़ा कि लाखों लोग आपको देख सुन रहे हैं। अगले दिन जब कोरोना पर बैठक बुलाई तो फॉर्मेट बदला हुआ था। केवल प्रदेश के मुखिया का भाषण जनता के लिए रखा, बाकी का पूरा डिस्कशन क्लोज डोर में ही हुआ। सरकार के रणनीतिकारों का सुझाव था कि बेवजह जगहंसाई करवाने का कोई तुक नहीं है, इसलिए नया फॉर्मेट अपनाना ही उचित समझा। अब मीटिंग्स में केवल प्रदेश के मुखिया का भाषण ही जनता के लिए ओपन रहता है, ताकि घर की बात घर में ही रहे।

ब्यूरोक्रेसी के मुखिया का जन्मदिन और सियासी संकेत
ब्यूरोक्रेसी के मौजूदा मुखिया का सियासी अंदाज अक्सर चर्चा में रहा है। हाल ही में जन्मदिन पर उन्हें बधाई देने बड़ी संख्या में लोग जुटे। पद पर रहने के दौरान बड़े अफसर के घर लोग जुटना साधारण बात है, लेकिन यहां कई चीजें असाधारण थीं। बधाई देने कई नेता कार्यकर्ता पहुंचे। नेताओं के अंदाज में जन्मदिन मनाने के पीछे भविष्य के संकेत छिपे हैं। बताया जाता है कि ब्यूरोक्रेसी के मुखिया को रिटायर होते ही बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है। इसके बाद वे चुनावी रण में भी उतर सकते हैं। सियासी मैदान में उतरने का एटीट्यूड और एप्टीट्यूड दोनों ही हैं।

संगठन ने मुखिया ने अनजाने में हिसाब बराबर कर दिया
पंजाब में पीएम की सुरक्षा में चूक मसले पर सत्ता और संगठन के मुखिया ने फ्रंट फुट पर आकर जवाब दिया। सियासी मोर्चे पर हावी होने की इस रणनीति में सत्ता के मुखिया से चूक हो गई। सरकार के मुखिया तबीयत खराब होने के बावजूद खचाखच भरे कंजस्टेड हॉल में संगठन के मुखिया के साथ मीडिया से मुखातिब हुए। संगठन के मुखिया ने लगे हाथ यह भी जोड़ दिया कि आज सरकार के मुखिया की तबीयत नासाज है। कुछ देर बाद ही उनके कोविड पॉजिटिव होने की रिपोर्ट आ गई। यही बात मुद्दा बन गई। सियासी हलकों में कई लोग कह रहे हैं कि संगठन के मुखिया ने अनजाने में ही हिसाब बराबर कर लिया। दरअसल नवंबर में शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश के मुखिया ने ट्रांसफर में पैसा चलने की बात कहकर काफी असहज हालात पैदा कर दिए थे, बाद में सफाई भी दी लेकिन जुबान से छूटे शब्द और बंदूक से छूटी गोली को चाहकर भी वापस नहीं लिया जा सकता।

गठबंधन वाले मंत्रीजी का धर्म संकट दूर
आपदाएं भी कई बार अवसर बनकर आती हैं। गठबंधन कोटे में प्रदेश के मुखिया के चहेते मंत्रीजी का कोरोना ने बड़ा धर्म संकट दूर कर दिया। मंत्रीजी की पार्टी पड़ोसी राज्य मेंं कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ रही है। फिलहाल बड़ी चुनावी रैलियों पर कोरोना के कारण रोक लगा दी गई है। गठबंधन वाले मंत्रीजी कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करने जाते तो सुर्खियां बनना तय था। अब कोरोना ने काफी धर्मसंकट दूर कर दिया है। हालांकि अकेले प्रचार करने जाने की संभावना तो अब भी बची हुई है ही।

मुफ्त दवा योजना में चर्चित अफसर को स्वास्थ्य महकमे में लाने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग में मंत्री के बदलाव के साथ ब्यूरोक्रेटिक लेवल पर बदलाव होना है। कोरोना के कारण बदलाव पर एक बार के लिए ब्रेक लग गया। इस महकमे में फिर से पुराने चर्चित अफसर को लाने की तैयारी है। पुराने मंत्री से अनबन के चलते इस महकमे से दूर किए गए चर्चित अफसर की फिर से जरूरत महसूस की जाने लगी है। आईएएस की अगली सूची में मुफ्त दवा के लिए चर्चित अफसर को हेल्थ सेक्रेट्री बनाए जाने की चर्चा है।

इलेस्ट्रेशन : संजय डिमरी

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