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मुख्यमंत्री गहलोत के भाई:ईडी के छापे से सुर्खियों में आए अग्रसेन गहलोत का नहीं रहा राजनीति से कोई वास्ता

जोधपुर3 महीने पहले
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अपने भाई मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ अग्रसेन(बीच में बैठे हुए)।
  • मुख्यमंत्री गहलोत की जोधपुर यात्रा के दौरान भी अमूमन उनके भाई नजर नहीं आते हैं

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का छापा पड़ने के बाद हमेशा लाइम लाइट से दूर रहकर अपना कारोबार करने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन सुर्खियों में हैं। खाद-बीज का यह कारोबारी स्वभाव से लेकर हर मायने में अपने मुख्यमंत्री भाई से अलग है। गहलोत की जोधपुर यात्रा के दौरान भी कभी सामने नहीं आने वाले अग्रसेन हमेशा से राजनीति से दूर ही रहते आए हैं। उनका राजनीति से इतना ही वास्ता है कि उनका भाई प्रदेश का मुख्यमंत्री है। जोधपुर की आम जनता या माली समाज में उनका कोई बड़ा नाम नहीं है। लोग मुश्किल से ही पहचान पाते हैं कि ये गहलोत के बड़े भाई हैं।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित परिवार में तीन भाई व एक बहन है। विमला देवी परिवार में सबसे बड़ी है और गहलोत के बहुत करीबी मानी जाती है। इसके बाद कंवरसेन, जिनका गत वर्ष निधन हो गया, अग्रेसन व अशोक गहलोत है। अग्रेसन गहलोत का पावटा सर्किल पर खाद-बीज का कारोबार है। यहां उनकी करीब 45 वर्ष पुरानी दुकान है। अग्रसेन के तीन पुत्रियां व एक पुत्र है। दोनों बाप-बेटे इस दुकान को संभालते हैं।

वहीं जिस फार्म हाउस पर भी छापा मार गया है वह मुख्यमंत्री गहलोत के पिता का पुस्तैनी खेत था। महज दस बीघा की जमीन पर बने इस फार्म हाउस का अभी तक बहन-भाइयों में बंटवारा तक नहीं हुआ है। अग्रसेन का राजनीति से कभी कोई सीधा वास्ता नहीं रहा। वे राजनीतिक आयोजनों से हमेशा दूर ही नजर आते हैं।

मुख्यमंत्री गहलोत के वर्ष 1977 से में लड़े गए पहले चुनाव से लेकर अब तक उनका प्रधान कार्यालय अग्रसेन की दुकानों के ऊपर स्थित कमरों में ही खुलता आया है। यह कार्यालय गहलोत के लिए लक्की माना जाता है। नामांकन दाखिल करने के बाद गहलोत अपने भाई की दुकान पर हमेशा से जनसभा को सम्बोधित करते रहे हैं। 12 चुनाव लड़ चुके गहलोत ने अपने 11 चुनाव अभियान से आगाज भाई की दुकान के सामने से ही किया है।

गहलोत की जोधपुर यात्रा के दौरान भी वे उनके आसपास नजर नहीं आते हैं। महामंदिर स्थित पैतृक आवास, जहां अग्रेसन रहते हैं, को मुख्यमंत्री गहलोत बरसों पहले त्याग चुके हैं। वे इसके बजाय अपनी बहन के बड़े पुत्र के आवास पर ही ठहरने को प्राथमिकता देते रहे हैं। इसके पीछे कोई ठोस कारण नहीं सामने आया। रिश्तेदारों का कहना है कि पैतृक आवास छोटा पड़ता है। गहलोत अमूमन सर्किट हाउस में ही ठहरते हैं और बहन के बड़े बेटे के यहां से उनका भोजन सर्किट हाउस बरसों से पहुंचाया जाता रहा है। गहलोत को बरसों से जानने वाले लोग भी उनके भाई अग्रसेन को पहचान नहीं पाते। इसका कारण यही बताया जा रहा है कि अग्रसेन अपने भाई के सार्वजनिक आयोजनों से हमेशा दूरी बनाकर ही चलते हैं।

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