CM सलाहकार बोले- सरकार ज​ब मुकरी कठघरे में खड़ा किया:कहा- आपको गलतफहमी मैं सरकार हूं, मैं तो उड़ते हेलिकॉप्टर पर लटक गया

जयपुर/सिरोही10 दिन पहले

सीएम अशोक गहलोत के सलाहकार और सिरोही से विधायक संयम लोढ़ा ने संविदाकर्मियों को नियमित करने के मौजूदा पैटर्न पर सवाल उठाते हुए निशाना साधा है। संयम लोढ़ा ने कहा कि संविदा पर नियुक्ति सरकारों का शोषण का दूसरा तरीका है। संविदा पर नियुक्ति का मैं विरोधी हूं। सरकारों को कर्मचारियों की नियुक्ति रेगुलर भर्ती के माध्यम से ही करनी चाहिए। संविदा पर नियुक्ति से पढ़े लिखे बच्चों की जिंदगी को खराब किया जा रहा है। प्रदेश के संविदाकर्मी नियमित करने की मांग करके भीख नहीं मांग रहे हैं, उनसे चुनाव घोषणा पत्र में वादा किया था।

लोढ़ा ने कहा- आपको गलत फहमी कि मैं सरकार हूं। मैं तो हेलिकॉप्टर उड़ रहा था उस पर लटक गया। आज सिरोही की सेवा कर रहा हूं। एक नागरिक होने के नाते हम भी समाज का एक हिस्सा है। जहां समाज के किसी तबके को जरुरत होती है वहां उनकी आवाज का काम करते है। मैंने समय समय पर सरकार को याद दिलाया है कि आपने घोषणा पत्र में जो वादे किए हैं उन्हें पूरा करो। सरकार ने जब भी मुकरने का प्रयास किया पूरी ताकत के साथ उसका विरोध कर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। कर्मचारी आंदोलन कमजोर इसलिए पड़ जाते है कि कर्मचारी उस लड़ाई को सिर्फ अपनी सुविधाओं तक सीमित कर देते है।

संविदा पर भर्ती शोषण का नया तरीका
लोढ़ा ने कहा- संविदा से सरकारी महकमों में भर्ती शोषण का नया हजरिया बन गई है। यह विडम्बना है कि सारी सरकारें फिर चाहे राज्य की हो या केन्द्र की हों, वे इसी राह पर चल रही हैं। सरकारें ऐसा इसलिए करती हैं कि कम वेतन पर अधिक लोग उसे काम के लिए मिल जाते हैं। जब लोक कल्याण का दावा करने वाली सरकारें इस तरह का काम करने लग जाती हैं तो वह समाज के लिए खतरनाक और घातक साबित हो जाता है। आज अनपढ़ बेरोजगार नहीं बल्कि पढा लिखा नौजवान बेरोजगार है। अब समय आ गया है कि इस प्रकार की परिपाटी को नए सिरे से समझने की आवश्यकता है।

संविदाकर्मी सरकार के गलत काम का विरोध करें, मैं भी करूंगा
लोढ़ा ने कहा- संविदाकर्मियों को जहां गलत दिखे, उसका विरोध करें। मैं भी लोगों के हक के लिए काम करता हूं और जहां भी मुझे गलत दिखाई देता है उसका विरोध जरूर करता हूं। संविदा कर्मियों के नियमितिकरण की मांग और इस लड़ाई को लडऩे के लिए भी प्रतिबद्ध हूं। हम मिलकर सरकार पर दबाव बनाएंगे कि आपने चुनाव में वादा किया है उसे पूरा करो। हम कोई भीख नहीं मांग रहे है,जिन वादों पर आपने चुनाव लड़ा है और जो आपके घोषणा पत्र में है उस पर सवाल जवाब अवश्य करेंगे।

संविदाकर्मी सरकारी कर्मचारी का दर्जा चाहते हैं, सरकार ने कॉन्ट्रेक्च्यूल सर्विस में डाला

संविदाकर्मी सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने कॉन्ट्रैक्च्यूअल सर्विस रूल्स बनाकर सभी संविदाकर्मियों को उनके हिसाब से वेतन देने का प्रावधान किया है। नए नियमों में संविदाकर्मियों का वेतन 9000 से 32000 रुपए प्रतिमाह है। नए नियमों में सैलरी बढ़ाने की गणना इन नियमों के दायरे में आने की तारीख से होगी, पुराना अनुभव नहीं गिना जाएगा। संविदाकर्मी इन्हीं नियमों का विरोध कर रहे हैं।

पंचायत सहायक संघ के अध्यक्ष प्रवीण जसरापुर ने कहा कि वर्तमान में जो सरकार 1 लाख 10 हजार संविदा कर्मियों के लिए संविदा रूल्स 2022 लेकर आई है। चुनाव में वादा नियमितीकरण का किया था, लेकिन इन संविदा सेवा नियमों में कहीं भी नियमितीकरण की बात नहीं है। इन संविदा कार्मिकों का जो 15 साल से नाम मात्र के वेतन पर काम कर रे थे, इनका पुराना अनुभव भी इन नियमों में जीरो कर दिया है। सरकार ने तो नियकित करने के नाम पर संविदा में ही रख दिया।