खड़गे से मिले सियासी बवाल के जिम्मेदार नेता:अध्यक्ष बनने की दी बधाई; मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रियंका गांधी से की मुलाकात

नई दिल्ली/जयपुर4 महीने पहले

कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बहिष्कार के मामले में अनुशासनहीनता के आरोप में जिन तीन नेताओं को नोटिस दिया था, वे तीनों नेता दिल्ली पहुंच गए हैं। शांति धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर उन्हें अध्यक्ष बनने की बधाई दी। तीनों नेताओं ने पिछले दिनों ही नोटिस का जवाब दिया था, जिस पर अभी एक्शन पेंडिंग है। तीनों नेताओं की दिल्ली यात्रा सियासी चर्चा का विषय बना हुआ है। इधर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली में प्रियंका गांधी से मुलाकात की।

25 सितंबर को खड़गे जब जयपुर आए थे, तब अगवानी के लिए नहीं गए थे बड़े नेता
नए सीएम के चयन का अधिकार हाईकमान को सौंपने का प्रस्ताव पारित करने लिए 25 सितंबर को विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी, इसके लिए मल्लिकार्जुन खड़के , अजय माकन के साथ ऑब्जर्वर थे। 25 सितंबर को खडगे जब जयपुर आए थे तो उनकी अगवानी के लिए कोई बड़ा नेता, मंत्री विधायक नहीं गए थे। उस वक्त सीएम अशोक गहलोत का अध्यक्ष के तौर पर नाम चल रहा था।

महेश जोशी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ जाकर खड़गे को बधाई दी। जोशी पर पैरेलल विधायक दल की बैठक के लिए विधायकों को फोन करने के आरोप थे।
महेश जोशी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ जाकर खड़गे को बधाई दी। जोशी पर पैरेलल विधायक दल की बैठक के लिए विधायकों को फोन करने के आरोप थे।
शांति धारीवाल भी खड़गे से मिलने पहुंचे। सियासी बवाल के दिन धारीवाल के घर पर ही पैरेलल विधायक दल की बैठक हुई थी।
शांति धारीवाल भी खड़गे से मिलने पहुंचे। सियासी बवाल के दिन धारीवाल के घर पर ही पैरेलल विधायक दल की बैठक हुई थी।
धर्मेंद्र राठौड़ पर पैरेलल विधायक दल की बैठक के लिए लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं करने के आरोप थे।
धर्मेंद्र राठौड़ पर पैरेलल विधायक दल की बैठक के लिए लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं करने के आरोप थे।

गहलोत, डोटासरा, पायलट ने खड़गे से मिलकर बधाई दी
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर बधाई दी।

इधर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर देश में पैसे के दम पर सरकारें गिराने का आरोप लगाते हुए एक बार फिर राजस्थान के सियासी संकट को याद किया है। साथ ही मुख्यमंत्री के तौर पर काम करते रहने का भी संकेत दिया है। गहलोत ने कहा कि बीजेपी के पास इलेक्टोरल बॉन्ड का पैसा एक तरफा जा रहा है। उस पैसे के दम पर ये देश में सरकारें गिरा रहे हैं।

गहलोत ने कहा कि बीजेपी को केंद्र में दो बार मौका मिल गया, इसलिए इनको घमंड-अहम आ गया है। घमंड-अहम जनता कब तोड़ देती है, पता ही नहीं लगता है। ये हमने पहले भी अनुभव किया है गहलोत दिल्ली में मंगलवार रात को मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

गहलोत ने कहा कि कर्नाटक के बाद में मध्यप्रदेश, फिर महाराष्ट्र और हमें ऊपर वाले ने बचा लिया। सोनिया गांधी जी का, राहुल गांधी जी का आशीर्वाद था, इसलिए सरकार बच गई। हमारा पूरा कुनबा एक रहा, वरना सरकार चली जाती।

गहलोत ने कहा- मैं तो मेरे रास्ते पर चल रहा हूं। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दे रखी है, निभा रहा हूं। उसके अलावा मैं कुछ नहीं कर रहा हूं। ईमानदारी, निष्ठा, प्रतिबद्धता के साथ में समर्पित होकर पार्टी की जिम्मेदारी निभा रहा हूं।

गहलोत ने कहा कि गरीब, दलित, पिछड़ों के लिए फैसले करना मुझे बहुत अच्छा लगता है। जो मैं कर सकता हूं। सोशल सिक्योरिटी की हमने थीम बना रखी है। आप देखेंगे कि शिक्षा में, स्वास्थ्य में, सब जगह मैं सोशल सिक्योरिटी को अडॉप्ट किए हुए हूं तो मुझे तो धुन लगी हुई है। मैं मेरे काम करूंगा।

अनुभव का कोई विकल्प नहीं
गहलोत ने कहा- मैंने कल ये बात कही है कि अनुभव का कोई विकल्प नहीं है। मल्लिकार्जुन खड़गे का अलग अनुभव है। शशि थरूर का अलग अंतर्राष्ट्रीय अनुभव है। अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता है, कभी नहीं होता है। नौजवान तो दौड़ भाग ज्यादा कर सकते हैं। अनुभव का विकल्प नहीं होता है।

मैं तो सोनिया-राहुल ​को सलाम करता हूं, पीएम-अध्यक्ष पद छोड़ दिए
गहलोत ने कहा- सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने कहा कि हमारे परिवार का कोई व्यक्ति अध्यक्ष चुनाव में नहीं खड़ा होगा। ये कहने की हिम्मत चाहिए। गांव में सरपंच का पद भी कोई नहीं छोड़ता है। इन्होंने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया। कांग्रेस अध्यक्ष बनना स्वीकार नहीं किया। देश सेवा में लगे हुए हैं, मैं तो इनको सलाम करता हूं।

राहुल गांधी जननायक के रूप में उभरकर आएंगे
गहलोत ने कहा- भारत जोड़ो यात्रा में राहुल जी का कारवां चल पड़ा है। राहुल गांधी को आप देखेंगे कि राष्ट्रीय नेता और फिर जननायक के रूप में उभरकर आएंगे, क्योंकि वो व्यक्ति आज लड़ रहा है। आप पूरे गांधी परिवार को देख रहे हो। सोनिया गांधी 22 साल तक कांग्रेस अध्यक्ष रहीं। प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया। 30 साल से गांधी परिवार का कोई मेंबर पीएम, सीएम, मंत्री नहीं बना। खाली संगठन की जिम्मेदारी संभाले हुए थे। वो भी इस बार इन्होंने छोड़ दी है। उसका दुःख तो हम सबको ही है। अगर राहुल जी वापस संभाल लेते, मैंने भी रिक्वेस्ट की थी उनसे, तो एक नया मैसेज जाता, क्योंकि अभी हमारे सामने बहुत भयंकर चुनौतियां हैं। मैं समझता हूं कि हम सबकी सच्चाई का साथ देने की जिम्मेदारी बनती है। सच्चाई हमारे पक्ष के अंदर है। अंतिम विजय सच्चाई की होगी।

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