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भास्कर इंटरव्यू पार्ट-8:भास्कर: कोरोना रोकने की कवायद कम और राजनीति ज्यादा हो रही है, आप क्या मानते हैं?, महिया: सरकारों ने समय रहते कोई भी तैयारी नहीं की, मंत्री खुलेआम भीड़ लेकर चल रहे, नेताओं ने ही कोरोना बढ़ाया

राजस्थान/बीकानेर14 दिन पहले
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विधायक गिरधारी महिया। - Dainik Bhaskar
विधायक गिरधारी महिया।

बीकानेर ने ऑक्सीजन और बेड के लिए मारामारी देखी। मरीजों के लिए काम करने की बजाय नेताओं में नाम कमाने की होड़ दिखी। श्रीडूंगरगढ़ विधायक गिरधारी महिया ने भास्कर से बातचीत में अपने विचार रखे।

Q- कांग्रेस ऑक्सीजन की कमी के लिए भाजपा और भाजपा मैनेजमेंट के लिए कांग्रेस को दोषी ठहरा रही है। क्या कोरोना के बीच ऐसी राजनीति सही है।
A
- मुझे खबर मिली कि एसबीआई फाउंडेशन ने 90 बेड का आईसीयू सेटअप करने का वादा किया है लेकिन भाजपा और कांग्रेस के बीच श्रेय लेने की होड़ में आईसीयू बेड हमारे हाथ से जा रहा है। भले ही पीबीएम उस सामग्री का उपयोग करे लेकिन अगर जनरल वार्ड को आईसीयू में तब्दील कर देते तो आने वाले कई सालों तक जनता को राहत मिलती। अगर तीसरी लहर में और मौतें हुईं तो जनता न सिर्फ नेताओं से बल्कि पीबीएम प्रशासन से भी जवाब मांगेगी। यह दुर्भाग्य है कि पीबीएम ने सेना की मदद लेने से इनकार कर दिया।

Q- कोरोना के आंकड़े बता रहे हैं कि कोरोना कम हुआ है। क्या आप इससे सहमत हैं?
A
- कांग्रेस सरकार कहती है कि हमें केंद्र सहयोग नहीं कर रहा लेकिन आंकड़े कम तो राज्य सरकार के कहने पर ही दिखाए जा रहे हैं। 3000 की सैंपलिंग होती थी जो आज घटकर 1000 पर आ गई। जब 1000 की सैंपलिंग करेंगे तो आंकड़े खुद-ब-खुद कम हो जाएंगे। जो अधिकारी शहर में बैठकर कोरोना कम होने की बात कर रहे हैं वे श्रीडूंगरगढ़ के गांवों में घूमें और देखें कि हर दूसरा-तीसरा घर संक्रमित है। पीएचसी और सीएचसी में सैंपलिंग नहीं हो रही है। ये फर्जी आंकड़े हैं। सरकार के दबाव में आंकड़े दबाए जा रहे हैं। सही सैंपलिंग हो तो आंकड़े पहले से भी ज्यादा आएंगे।

Q- जब आपके क्षेत्र में इतनी महामारी है तो जांचें क्यों नहीं करवा रहे।
A-
पीएचसी पर सैंपल लिए नहीं जा रहे। गांव से शहर में जांच के लिए जाते हैं तो पुलिस लॉकडाउन तोड़ने के आरोप में लोगों पर कार्रवाई करती है। उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी खुलेआम भीड़ लेकर रोज क्षेत्र में जा रहे हैं। लॉकडाउन तोड़ रहे हैं लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं क्योंकि जिसकी लाठी उसकी भैंस। पुलिस को सिर्फ गरीब ही कार्रवाई के लिए मिलता है। नेता-अधिकारी खुलेआम बिना मास्क के घूमते हैं। भीड़ लेकर चलते हैं लेकिन उनकी ओर पुलिस देखती भी नहीं।

Q- सांसद-विधायक इतना पैसा दे रहे हैं। फिर भी पुख्ता इंतजाम नहीं हो पा रहा, वजह?
A-
मैं छह-सात दिन से पढ़ रहा हूं। सारे विधायक जोर-शोर से बता रहे हैं कि हमने इतना दिया। सही मायने में मुख्यमंत्री ने कोरोना के लिए सारे विधायकों का बजट तय किया हुआ है। तीन करोड़ रुपए वैक्सीनेशन और 25 लाख खाद्य सामग्री के लिए। इसमें किसी विधायक ने अपनी ओर से कुछ नहीं किया। यह सरकार ने व्यवस्था की हुई है। हमने एक करोड़ रुपए एक आदर्श पीएचसी स्थापित करने के लिए दिए हैं। एक अनुशंसा सुविधाओं से सुसज्जित एंबुलेंस के लिए दी लेकिन अभी तक वह एंबुलेंस हमें नहीं मिली। 3 करोड़ रुपए वैक्सीनेशन और 25 लाख रुपए खाद्य सामग्री के लिए सरकार की व्यवस्था के तहत पहले ही दे दिए।

Q-आपको लगता है कि आज की व्यवस्थाएं संभावित तीसरी लहर का सामना करने के लिए पर्याप्त है।
A-
मुझे गोविंद राम मेघवाल की यह बात अच्छी लगी किसी महामारी में मंदिर, मस्जिद काम नहीं आए। काम चिकित्सा व्यवस्था ही आई लेकिन तीसरी लहर तो छोड़िए हमारे अस्पताल दूसरी लहर का सामना करने में ही फेल हो गए। तीसरी लहर की कल्पना करते ही रूह कांप जाती है। पता नहीं कितनी और मौतें होंगी।

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