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भास्कर स्टिंग:मेडिकल स्टोर पर खुलेआम लूट, 450 रुपये में बिकने वाला पल्स ऑक्सीमीटर 2 हजार और 400 रुपये का ऑक्सीजन रेगुलेटर 4 हजार में बिक रहा

विक्रमसिंह सोलंकी, दिनेश पालीवाल। जयपुर3 दिन पहले

कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन के अलावा पल्स ऑक्सीमीटर और ऑक्सीजन रेगुलेटर की खूब डिमांड है। इसी का फायदा दुकानदार उठा रहे हैं। जरूरतमंदों को 'लूटा' जा रहा है। दैनिक भास्कर के स्टिंग में इसका खुलासा हुआ है। 'लुटेरे' मेडिकल स्टोर वाले बेनकाब हो गए हैं। जिन चीजों की कीमत एक माह पहले 300-500 रुपये हुआ करती थी, वही आज 4-8 गुना महंगे दामों पर बिक रही है। अफसोस जिम्मेदार अफसर भी इन 'लुटेरों' पर शिकंजा कसने में नाकाम हैं।

मुनाफे का खेल

पल्स ऑक्सीमीटर की बात करें तो जो एक माह पहले तक 300-500 रुपये में आसानी से मिल जाते थे। आज 1800 से ढाई हजार रुपये तक में बेचे जा रहे हैं। चाइना से आने वाले बेहद सस्ते पल्स ऑक्सीमीटर भी 1300 से 1500 रुपये में बेच कर दुकानदार चांदी कूटने में लगे हैं। यह पहले 200 रुपये तक में उपलब्ध हो जाते थे। इसी तरह, एकाएक ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ उस पर लगने वाले रेगुलेटर की बाजार में अचानक मांग बढ़ गई। एक माह पहले तक 500 रुपये में बिकने वाला रेगुलेटर अचानक बाजार से गायब हो गया। अब बहुत मुश्किल से लोगों को 3 से 4 हजार रुपये में मिल रहा है। अधिकांश दुकानदारों ने तो खुलेआम बेचना ही बंद कर दिया है। बाकायदा इसके लिए दुकानें बताई जा रही हैं। ऐसे में संकट यह है कि लोग जैसे-तैसे करके ऑक्सीजन सिलेंडर का जुगाड़ तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब रेगुलेटर लेने में पसीने छूट रहे हैं।

स्थान : एसएमएस

मेडिकल दुकानदारों ने मनमर्जी के रेट बनाए

एमएसएस अस्पताल के सामने भास्कर टीम ने मेड़िकल की 10 से अधिक दुकानों पर पल्स ऑक्सीमीटर के रेट को लेकर पड़ताल की। कहीं पर 1700 तो कहीं पर 2000 रुपये मांगे गए। गंभीर बात तो यह है कि दुकानदारों ने कहा- कहीं भी चले जाओ, इतने का ही मिलेगा। कई दुकानों पर ऑक्सीमीटर नहीं होने की बात कही। पास में ही एक दुकानदार ने 1900 रुपये मांगे। कहा कि पहले 400 रुपये में आता था, अब मनमर्जी के रेट बना लिए हैं। इतना महंगा देने की बात पर पूछा तो दुकानदारों ने कहा कि माल ही नहीं मिल रहा है। हम क्या करें। कुछ रेट कम करने के लिए कहा तो- बोले कि हम 500-700 में बेच रहे थे। अब हमें भी महंगा मिल रहा है। दो-तीन दिन पहले 1200 रुपये में बेच रहे थे। अब माल ही नहीं आ रहा है।

एसएमएस अस्पताल में ही कालाबाजारी

प्रदेश के सबसे बड़े एमएसएस अस्पताल के अंदर की दुकानों पर भी कालाबाजारी की जा रही है। भास्कर टीम अस्पताल के अंदर बेसमेंट की दुकानों पर पहुंची। पल्स ऑक्सीमीटर के दाम पूछने पर बताया कि 1400 रुपये का मिलेगा। मार्केट में माल ही नहीं है। अब ज्यादा डिमांड हो रही है, माल कम आ रहा है। दुकानदार बोला- हमें भी 1250 का मिल रहा है। बिल दिखा देता हूं। चाइनीज सस्ता भी मिल जाएगा, पर उसका सही लेवल नहीं आएगा।

मरीज हो रहे परेशान

जयपुर के नेहरू बाजार स्थित फिल्म कॉलोनी में प्रदेश का सबसे बड़ा दवाइयों का मार्केट है। अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर तो मिलने लग गए हैं, लेकिन अब रेगुलेटर की सबसे बड़ी समस्या आ रही है। टीम ने कई बड़े नामी डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास जाकर ऑक्सीजन रेगुलेटर मांगा। हैरानी की बात है कि किसी भी बड़े डिस्ट्रीब्यूटर ने नहीं दिया। यहां पर काफी मरीजों के परिजन परेशान हो रहे थे। जांच करने पर पता लगा कि बड़े डिस्ट्रीब्यूटर छोटे मेड़िकल स्टोर्स को रेगुलेटर दे ही नहीं रहे हैं। मार्केट में पता लगा कि दलालों के जरिए ही रेगुलेटर चुनिंदा मेडिकल स्टोर्स पर 4-5 हजार रुपये में बेचे जा रहे हैं।

क्या हैं पल्स ऑक्सीमीटर की उपयोगिता

पल्स ऑक्सीमीटर एक छोटे से डिवाइस का नाम है जो खून में ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल और ऑक्सीजन लेवल की जानकारी देता है। डिवाइस को उंगली में क्लिप की तरह फंसाया जाता है। इसके बाद सेंसर खून में ऑक्सीजन के प्रवाह की जानकारी देता है। डिजिटल स्क्रीन पर ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल 95 से 100 के बीच है, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अगर यह 92 या उससे नीचे दिखे तो हाइपोक्सिया या ब्लड टिश्यू में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है।

जानें कैसे काम करता हैं ऑक्सीजन रेगुलेटर

ऑक्सीजन सिलेंडर के ऊपर एक रेगुलेटर लगाया जाता है। इसी के जरिए ऑक्सीजन प्रेशर को कंट्रोल किया जाता है। रेगुलेटर के साथ पूरी किट होती है। रेगुलेटर के साथ ही पाइप के साथ मास्क लगा होता है, जिसे चेहरे पर लगाया जाता है। रेगुलेटर से प्रेशर लेवल को चेक कर ऑक्सीजन दी जाती है। ऑक्सीजन की जिस मरीज को जरूरत होती है, उसे प्रेशर लेवल सेट कर दी जाती है।

डीपीसीओ के दायरे से बाहर है ऑक्सीमीटर

ड्रग कंट्रोल विभाग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी ने इस महामारी में पल्स ऑक्सीमीटर जैसी आवश्यक उपकरण को ड्रग प्राइज कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ) के दायरे में नहीं रखा है। इसी कारण ऑक्सीमीटर को बाजार में प्रिंट मूल्य पर बेचा जा रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि जिस तरह पिछले साल सरकार ने हैंड सैनिटाइजर और इस बार रेमेडेसिविर इंजेक्शन के लिए मूल्य का निर्धारण किया है, ठीक उसी तरह पल्स ऑक्सीमीटर के मूल्य का भी निर्धारण करना चाहिए। इस मामले में जब ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा से फोन पर 3-4 बार बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन तक नहीं उठाया।

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