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बुद्ध पूर्णिमा पर लगा साल का पहला पूर्ण चन्द्रग्रहण:​​​​​​​भारत में नहीं लगा सूतक, आज अबूझ सावा, वन्यजीवों की गिनती भी शुरू

जयपुर6 महीने पहले
बुद्ध पूर्णिमा पर लगा साल का पहला पूर्ण चन्द्रग्रहण

आज वैशाख पूर्णिमा है। जिसे बुद्ध पूर्णिमा और पीपल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। आज स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त और शुभ कामों के सावे हैं। साथ ही साल का पहला पूर्ण चन्द्रग्रहण भी लगा है। लेकिन भारत में यह चन्द्रग्रहण दिखाई नहीं देने और चांद के दर्शन नहीं होने से भारत में सूतक नहीं लगा। बुद्ध पूर्णिमा पर चांदनी रात होने के कारण दो साल के कोविड पीरियड के बाद बाद वन्यजीवों की काउंटिंग भी शुरु हो गई है। दान-पुण्य, धर्म-कर्म और शुभ-मंगल कार्यों के लिए यह दिन बेहद शुभ माना गया है।

पंडित पुरुषोत्तम गौड़,अध्यक्ष,ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान,जयपुर।
पंडित पुरुषोत्तम गौड़,अध्यक्ष,ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान,जयपुर।

ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष पंडित पुरुषोत्तम गौड़ के अनुसार वैशाख पूर्णिमा रात 9 बजकर 45 मिनट पर खत्म होगी। वैशाख पूर्णिमा को सभी तिथियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और दान करने से कष्टों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। बौद्ध धर्म में भी इस दिन का विशेष महत्व है। महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त होने के कारण आज महात्मा बुद्ध की पूजा भी की जाती है।

चन्द्रग्रहण। प्रतीकात्मक फोटो।
चन्द्रग्रहण। प्रतीकात्मक फोटो।

साल का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण लगा, भारत में सूतक नहीं

ज्योतिषाचार्य पंडित पुरूषोतम गौड़ के अनुसार साल का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण भी आज लगा। भारतीय समय के अनुसार इस चंद्र ग्रहण की अवधि सुबह 8 बजकर 59 मिनट से सुबह 10 बजकर 23 मिनट तक रही। चंद्र ग्रहण सूतक अवधि सुबह 7.02 से दोपहर 12.20 तक रही। लेकिन भारत में यह चंद्रग्रहण दिखाई नहीं दिया। इसलिए देश में सूतक काल भी मान्य नहीं रहा। पूर्ण चन्द्रग्रहण दक्षिण-पश्चिमी यूरोप, एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर में दिखाई दिया।

वैशाख पूर्णिमा पर महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ।
वैशाख पूर्णिमा पर महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ।

आज महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र और सहपाठी सुदामा जब द्वारका में श्रीकृष्ण से मिलने आए, तो भगवान ने उन्हें इस व्रत का महत्व बताया। इस व्रत के प्रभाव से ही सुदामा की दरिद्रता का नाश हो गया। मान्यता है कि इस दिन बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। इसलिए इसे बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार महात्मा बुद्ध भगवान विष्णु के नौवें अवतार थे।

वैशाख पूर्णिमा को गया में बोधि वृक्ष के नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ।
वैशाख पूर्णिमा को गया में बोधि वृक्ष के नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ।
आचार्य पुरुषोत्तम भारती,महामंडलेश्वर,श्री लक्ष्मीनारायण जी मंदिर,जयपुर।
आचार्य पुरुषोत्तम भारती,महामंडलेश्वर,श्री लक्ष्मीनारायण जी मंदिर,जयपुर।

महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ

जयपुर के श्री लक्ष्मीनारायण जी मंदिर के आचार्य महामंडलेश्वर पुरुषोत्तम भारती ने बताया कि आज बैसाख की पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य का फल असंख्य मिलता है। विशेष रूप से पवित्र नदियां- गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी, क्षिप्रा, सरसू, गलता और पुष्कर सरोवर आदि में कलश दान करने का विशेष महत्व माना गया है। ताम्बे का कलश या लोटा में खाने की चीजें भरकर मंदिरों में दान करते हैं या विसर्जन करते हैं। आज ही के दिन भगवान बुद्ध को ज्ञान भी प्राप्त हुआ था। इसलिए बुद्ध पूर्णिमा के रूप में इसे जाना जाता है। आज अबूझ सावा है इसलिए हजारों की संख्या में शादी होती है। जो लोग एक महीने तक वैशाख स्नान करते हैं उनका स्नान भी पूर्णिमा पर पूरा हो जाता है। मंदिरों और प्याऊ पर घट या घड़े का दान, शीतल पदार्थों,व्यंजनों का दान करने वालों को विशेष फल मिलता है।

वन्यजीवों की हो रही गणना।
वन्यजीवों की हो रही गणना।

वन्यजीवों की गिनती शुरू

वैशाख पूर्णिमा को वन्यजीवों की गिनती भी शुरू कर दी गई है। प्रदेश में कोरोना पीरियड के 2 साल बाद यह गिनती हो रही है। सुबह 8 बजे से शुरू हुई गिनती मंगलवार सुबह तक जारी रहेगी। शाकाहारी,मांसाहारी वन्यजीव और पक्षियों की गिनती अलग-अलग सेंचुरी और वन्य जीव अभ्यारण्यों में की जा रही है। जंगलों में वॉटर पॉइंट भी बनाए गए हैं। जहां जानवर और पक्षी पानी पीने आएंगे। बुद्ध पूर्णिमा की चांदनी रात की सफेद रोशनी में वन्य जीव साफ दिखाई देते है। इसीलिए हर साल इस दिन वन्य जीवों की काउंटिंग की जाती है। 24 घंटे की वन्यजीव गणना के आंकड़े इकट्ठा करके वन मुख्यालय भिजवाए जाएंगे। फिर उन आंकड़ों की तुलना पिछले आंकड़ों से की जाएगी।

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