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राज्यपाल के बचाव में उतरे उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़:CM को पत्र लिखकर कहा-राज्यपाल पर आरोप निराधार,CPC की जगह रोडा एक्ट में करें संशोधन

जयपुर4 महीने पहले
राज्यपाल के बचाव में उतरे उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ - Dainik Bhaskar
राज्यपाल के बचाव में उतरे उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़

किसानों की जमीनों की नीलामी रोकने के लिए कानून में संशोधन का बिल राजभवन में पेंडिंग होने के सरकार के आरोपों के बाद उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ राज्यपाल के बचाव में उतर आए हैं। राठौड़ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर ट्वीट करते हुए कहा विधेयक को लेकर सरकार ने राज्य के संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल पर निराधार आरोप लगाए हैं। राज्यपाल और राजभवन पर जान बूझकर आरोप लगाने की जगह प्रदेश सरकार को विधानसभा में सिविल प्रक्रिया संहिता (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 के जगह पर रोडा एक्ट, 1974 के प्रोविजन में संशोधन का प्रस्ताव लाना चाहिए था। ताकि प्राकृतिक आपदा और दूसरे कारणों से जो किसान फसली लोन समय पर नहीं चुका पाते, उनकी 5 एकड़ तक की एग्रीकल्चर लैंड को कुर्की या बिकने से बचाया जा सके।

CPC में संशोधन की राष्ट्रपति से भी मंजूरी जरूरी

राठौड़ ने कहा अगर ये बिल पास भी हो जाए, तो किसानों पर तब लागू होगा। जब सिविल कोड में उनकी जमीन की नीलामी का मामला लगेगा। मौजूदा समय में रोडा एक्ट में किसान की जमीनों को नीलाम करने का अधिकार बैंकों को स्पष्ट तौर पर मिला हुआ है। बैंक अधिकारियों को सिविल कोड के अधिकार मिले हुए हैं। अच्छा यह होगा कि सरकार रोडा एक्ट में संशोधन लेकर आए। सीपीसी में किए मौजूदा संशोधन को राज्यपाल से पास होने पर भी राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होगी।

कर्जमाफी की आधी-अधूरी घोषणा की

राठौड़ ने कहा प्रदेश सरकार ने कर्जमाफी की आधी-अधूरी घोषणा की। सरकार के आश्वासन पर भरोसा करके राज्य के लगभग 16 लाख किसानों ने लोन जमा नहीं कराया। जिन पर लगभग 12 हजार करोड़ के 30 नवम्बर 2018 के बाद के फसली लोन बकाया थे। अब हजारों ऐसे किसानों की जमीनें नीलाम होनी शुरू हो गई हैं। लेकिन दुर्भाग्य है कि समस्या के कारगर समाधान को ढूंढ़ने की बजाय राज्यपाल पर आरोप लगाने की कोशिश की जा रही है। दो बार बजट में और दो बार राज्यपाल के अभिभाषण में सरकार ने स्पष्ट घोषणा की थी, कि नवम्बर 2018 तक किसानों के जो अवधिपार लोन हैं। जिन किसानों ने नेशनलाइज्ड, नोटिफाइड, एक्रिडिटेड और ग्रामीण बैंकों से लोन लिया है। सरकार वन टाइम सेटलमेंट करके उन्हें माफ करने का काम करेगी। उन गरीब किसानों ने सरकार के वादे पर भरोसा करके समय पर लोन नहीं चुकाया। चक्रवृद्धि ब्याज चढ़ते-चढ़ते आज 7 गुणा हो चुका है। किसानों की जमीनें नीलाम होनी शुरू हो गई। हजारों किसानों को कुर्की के नोटिस बैंकों ने दे रखे हैं। अब सरकार राजभवन की ओर इशारा कर रही है।

कल्ला कमेटी का क्या हुआ

राठौड़ ने पूछा है कि जिन लोगों ने सरकार के भरोसे लोन नहीं चुकाया उनका क्या होगा। उन्होंने किसानों के लोन माफ करने के लिए बनाई गई मंत्री डॉ बीडी कल्ला की अध्यक्षता वाली कमेटी के बारे में भी सवाल खड़े किए हैं। जिसने कई साउथ इंडियन राज्यों का दौरा किया है। लेकिन 3 साल बाद भी डिसीजन नहीं हो पाया है। साथ ही कहा कि यह धोखा ज्यादा दिन नहीं चलेगा। बीजेपी विपक्ष के नाते किसानों के हक में विधानसभा सदन और सड़क पर लड़ेगी। राजस्थान के किसानों को उनका हक दिलाकर रहेगी।

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