भास्कर एक्सक्लूसिव'मेरी शराफत को कमजोरी न समझें':चांदना बोले- 2 साल से टारगेट कर रहे पायलट समर्थक; गद्दार कहा, जूता भी फेंका

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: नीरज शर्मा

पुष्कर में कर्नल बैंसला के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में हुए जूता कांड के बाद खेल और युवा मामलों के राज्य मंत्री अशोक चांदना पहली बार कैमरे के सामने आए। चांदना से जुड़े कई सवाल हैं, जिनके जवाब लोग जानना चाहते हैं...

चांदना पर जूता फेंकने के पीछे किसकी साजिश थी?

जिन लोगों ने जूता फेंका, उन्हें चांदना क्या कहना चाहते हैं?

क्या चांदना भी सचिन पायलट को बाहरी मानते हैं?

चांदना किसे गुर्जर नेता मानते हैं?

गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन होगा?

भास्कर ने विशेष बातचीत में ऐसे तमाम सवाल पूछे और चांदना ने बिना किसी हिचक के सभी सवालों के जवाब दिए।

चांदना ने ग्रामीण ओलिंपिक और उस पर हो रही सियासत, स्पोर्ट्स काउंसिल चेयरपर्सन कृष्णा पूनिया से अनबन और सीएम फेस जैसे कई मुद्दों पर अपनी राय जाहिर की।

पढ़िए पूरा इंटरव्यू...

भास्कर : आप पर जूता फेंकने के पीछे किसकी साजिश थी?
चांदना :
दो साल से लगातार पायलट साहब के समर्थक मुझे टारगेट बना रहे थे। इस इवेंट से 10 दिन पहले उनके साथ गए हुए विधायकों में से एक विधायक गुर्जर समाज के कार्यक्रम में बोलते हैं- जिन गुर्जर विधायकों ने पायलट साहब का साथ सरकार गिराने में नहीं दिया, वो सब गद्दार हैं।

चुनाव आ रहा है आपको गद्दारों को सजा देनी है। उसके 10 दिन बाद घटना हो गई। प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं है।

पिछले दो साल में हम गुर्जर समाज के बहुत से कार्यक्रमों में गए, जिलों में गए, अगर समाज में कोई रोष था, तो पिछले 2 साल में तो कोई ऐसी घटना नहीं हुई।

भास्कर : आपने पायलट को लेकर ट्वीट किया-जिस दिन लड़ने पर आ गया, तो फिर एक ही बचेगा…इस ट्वीट के क्या मायने थे?
चांदना :
क्योंकि अगर कोई मुझ पर जूते फेंकेगा, तो मेरे पास भी समर्थक हैं। मैं भी दो बार विधायक रहा हूं। मोदी लहर में भी विधायक चुनाव जीता हूं। पार्लियामेंट में चुनाव भी लड़ा हूं। यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष भी रहा हूं। राजनीति में जूता फिंकवाकर कामयाबी हासिल नहीं होती। राजनीति में सारे जूते फिंकवाने लग जाएंगे, तो कोई भी नहीं रहेगा या एक रहेगा। ये राजनीतिक बात है।

भास्कर : जिन लोगों ने आप के ऊपर जूता फिंकवाया उनको क्या मैसेज देंगे ?
चांदना :
मैं एक ही बात कहना चाहूंगा, मेरी शराफत को मेरी कमजोरी मत समझ लेना।

12 सितंबर को अजमेर के पुष्कर में गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के अस्थि विसर्जन के दौरान सभा आयोजित की गई थी। इस दौरान चांदना जैसे ही भाषण देने मंच पर पहुंचे, पायलट समर्थकों ने जूते-बोतलें फेंककर विरोध शुरू कर दिया।
12 सितंबर को अजमेर के पुष्कर में गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के अस्थि विसर्जन के दौरान सभा आयोजित की गई थी। इस दौरान चांदना जैसे ही भाषण देने मंच पर पहुंचे, पायलट समर्थकों ने जूते-बोतलें फेंककर विरोध शुरू कर दिया।

भास्कर : कर्नल बैंसला के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में ऐसी घटना हुई, क्या कहना चाहेंगे?
चांदना:
कर्नल साहब को मैं गुर्जर समाज में मानव अवतार की उपाधि दूं, तो बड़ी बात नहीं है। उन्होंने ऐसा आंदोलन आजादी के बाद खड़ा किया जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता।

वो लड़ाई एक दिन या 5 दिन नहीं चली। 12 साल तक वो आंदोलन चला। 2007 में आंदोलन शुरू किया तो 2020 में जाकर गुर्जर समाज समेत 5 समाजों को एमबीसी में उसका फायदा मिला। वो 12 साल लगातार संघर्ष करते रहे, 50 डिग्री में रेलवे की पटरी पर बैठे रहे।

बिना खाने और पानी के भी आंदोलन किया। उनका जीवन संघर्ष करने वाले व्यक्ति का रहा है। उन्हें आखिरी श्रद्धांजलि देने लोग पुष्कर के कार्यक्रम में आए थे।

किसी को अधिकार नहीं था कि उनकी आखिरी यादगार को इस तरह कलंकित करे। मुझे लगता नहीं है राजस्थान की यह संस्कृति रही है।

सचिन पायलट जब प्रदेशाध्यक्ष बने उस वक्त चांदना यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष होने के अलावा कांग्रेस के 21 विधायकों में से सबसे युवा विधायक थे। उस वक्त चांदना और पायलट के रिश्ते सहज थे। विपक्ष में रहते हुए यूथ कांग्रेस ने जब भी बड़ा प्रदर्शन किया उसमें सचिन पायलट जरूर रहते थे।
सचिन पायलट जब प्रदेशाध्यक्ष बने उस वक्त चांदना यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष होने के अलावा कांग्रेस के 21 विधायकों में से सबसे युवा विधायक थे। उस वक्त चांदना और पायलट के रिश्ते सहज थे। विपक्ष में रहते हुए यूथ कांग्रेस ने जब भी बड़ा प्रदर्शन किया उसमें सचिन पायलट जरूर रहते थे।

भास्कर : आप सचिन पायलट के कॉम्पिटिटर हैं, ये सियासी जानकार कहते हैं?
चांदना :
बीजेपी का जो भी कैंडिडेट मेरे सामने चुनाव लड़ने आएगा मैं उसका कॉम्पिटिटर हूं, खबरें कुछ भी बन जाएं। मेरा कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं था। घर में कोई सरपंच भी नहीं था। मैं तो मिट्टी से उठा हूं।

यूथ कांग्रेस का चुनाव लड़ते-लड़ते, लाठियां खाते-खाते, जेल देखते-देखते, साथियों के साथ राजनीति सीखते-सीखते यहां तक आ गया। पता नहीं ये खबरें क्यों चलाई जाती हैं। मुझे 12 साल के अनुभव में काफी चीजें सीखने को मिलीं।

मुझे किसी के कॉम्पिटिटर के रूप में आने का शौक नहीं है। मैं अपने विधानसभा क्षेत्र में विधायक के रूप में कामयाब कार्यकाल पूरा करना चाहता हूं। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में पार्टी में अपना योगदान देना चाहता हूं। विभागों के मंत्री के रूप में अपनी परफॉर्मेंस देना चाहता हूं।

भास्कर : आपके नेता कौन हैं? सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अशोक गहलोत या सचिन पायलट?
चांदना :
कांग्रेस में हर कार्यकर्ता के नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी हैं, इसमें कोई डिस्प्यूट ही नहीं है।

चांदना ने कहा- राजस्थान में कौन मुख्यमंत्री होगा, मुझसे तो कोई पूछेगा नहीं, बनने से पहले मुझे बताएगा भी नहीं। किन मानदंडों पर सीएम बनाया जाएगा, मेरी इतनी पॉलिटिकल मैच्योरिटी भी नहीं है।
चांदना ने कहा- राजस्थान में कौन मुख्यमंत्री होगा, मुझसे तो कोई पूछेगा नहीं, बनने से पहले मुझे बताएगा भी नहीं। किन मानदंडों पर सीएम बनाया जाएगा, मेरी इतनी पॉलिटिकल मैच्योरिटी भी नहीं है।

भास्कर : गहलोत अगर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाते हैं तो आपके हिसाब से राजस्थान में मुख्यमंत्री का दावेदार कौन होगा और क्यों?
चांदना:
हम जब 2018 में विधायक बने तो प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट थे। सारे विधायकों की मीटिंग हुई। हमसे प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर सचिन पायलट ने कहा हाथ उठाकर कहो, आलाकमान जो कहेगा वही मुख्यमंत्री होगा और हम सबको मंजूर होगा।

हम सबने हाथ खड़े कर दिए, क्योंकि हमारी टिकटें उन्होंने ही दी थीं। हमने कहा- आलाकमान पर विश्वास है, वही फैसला करेगा।

राजस्थान में कौन मुख्यमंत्री होगा, मुझसे तो कोई पूछेगा नहीं, बनने से पहले मुझे बताएगा भी नहीं। किन मानदंडों पर सीएम बनाया जाएगा, मेरी इतनी पॉलिटिकल मैच्योरिटी भी नहीं है।

मैं पॉलिटिक्स का स्टूडेंट हूं। सीखते-सीखते सीख जाऊंगा। अभी इतनी समझ नहीं है कि दावा कर दूं किसे मुख्यमंत्री बनाया जाएगा या किसे मुख्यमंत्री बनना चाहिए।

चांदना ने शनिवार को दैनिक भास्कर (डिजिटल) ऑफिस में बातचीत के दौरान राजस्थान की सियासत, खेल और समाज की राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखी।
चांदना ने शनिवार को दैनिक भास्कर (डिजिटल) ऑफिस में बातचीत के दौरान राजस्थान की सियासत, खेल और समाज की राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखी।

भास्कर : सिर्फ राजस्थान में ग्रामीण ओलिंपिक हो रहे हैं, इसका आइडिया कैसे आया?
चांदना :
मैं राजसमंद गया, तो डॉ. सीपी जोशी की विधानसभा में एक पंचायत में इस तरह का कार्यक्रम हुआ था। उसमें बच्चों का उत्साह देखा। जिला कलेक्टर से बात की और समझा। गांव की प्रतिभाओं को निखारने की सोच थी।

राजस्थान के गांवों में खेलों का वातावरण खत्म हो गया है। बच्चे ऑनलाइन गेम ज्यादा खेल रहे हैं। बच्चों की आंखें खराब हो रही हैं, चश्मे लग गए हैं। हेल्थ खराब हो रही है। 'हिट राजस्थान फिट राजस्थान' का निर्माण करने के लिए गांवों में खेलों का वातावरण बनाना जरूरी है।

हमने साढ़े 44 हजार राजस्व गांवों की टीमें बनाकर उन्हें खेल खिलाने का फैसला लिया। पहले इतना बड़ा आयोजन तय नहीं था। पहले 3 गेम और 15-17 लाख लोगों की इसमें भागीदारी का विचार था।

CM के पास आइडिया गया, तो उन्हें आइडिया अच्छा लगा। उन्होंने 6 गेम और 30 लाख तक लोगों को शामिल करने और बजट की कमी नहीं आने की बात कही।

राजस्थान में ग्रामीण ओलिंपिक का दूसरा चरण ब्लॉक स्तर पर शुरू होते ही ड्रेस को लेकर विवाद हो गया। बीजेपी ने ड्रेस के हरे रंग को लेकर सवाल उठाया।
राजस्थान में ग्रामीण ओलिंपिक का दूसरा चरण ब्लॉक स्तर पर शुरू होते ही ड्रेस को लेकर विवाद हो गया। बीजेपी ने ड्रेस के हरे रंग को लेकर सवाल उठाया।

भास्कर : खिलाड़ियों की ड्रेस का रंग हरा होने और उस पर CM की फोटो पर बीजेपी ने आपत्ति जताते हुए सरकार पर तुष्टिकरण के आरोप लगाए हैं?
चांदना :
पहले भी जन-आधार कार्ड पर तत्कालीन CM की फोटो आती रही है। केंद्र सरकार ने ऐसे किट कोरोना काल में बंटवाए, जिन पर PM की फोटो थी। प्रदेश और देश के मुखिया की फोटो देने में कोई गलत बात नहीं है।

बीजेपी को शायद इतनी भी नॉलेज नहीं है, उस ड्रेस में 5-6 रंग हैं। बीजेपी को तो सिर्फ हरा-हरा दिखाई देता है, क्योंकि उससे उनकी दुकान चलती है।

उन्होंने कम्युनिज्म की दुकान बना रखी है। उसे चमकाने के लिए एक ही एक रंग दिखता है, बाकी 5 रंग शायद दिखे नहीं।

अशोक चांदना पोलो और क्रिकेट दोनों के अच्छे खिलाड़ी हैं। वो जयपुर और जोधपुर में कई इवेंट्स में पोलो खेलते भी दिख चुके हैं।
अशोक चांदना पोलो और क्रिकेट दोनों के अच्छे खिलाड़ी हैं। वो जयपुर और जोधपुर में कई इवेंट्स में पोलो खेलते भी दिख चुके हैं।

भास्कर : आप गहलोत सरकार में सबसे युवा मंत्री हैं। पोलो के माहिर खिलाड़ी हैं। पोलो समेत अन्य खेलों के डेवलपमेंट के लिए क्या सोच रखते हैं ?
चांदना :
खेलों के लिए सरकार के 4 साल में बहुत काम हुआ है। खेलों में भागीदारी बढ़ाने के लिए हमने आउट ऑफ टर्म अमेंडमेंट किया। 225 से ज्यादा खिलाड़ी बिना इंटरव्यू बिना परीक्षा सरकारी नौकरी पर लगे।

2 परसेंट प्रोविजन में अमेंडमेंट किया, जिसमें राजस्थान की जर्सी पहनने वाला भी क्वालिफाई करता है। 250 से 300 खिलाड़ी उसमें नौकरी पर लग गए। इस तरह 500 से 600 बच्चों की सरकारी जॉब लग गई। उसे देखकर खेलों में फुटफॉल आया।

नतीजा यह है पिछले 2 साल से राजस्थान बॉयज टीम नेशनल कबड्डी चैम्पियनशिप में नेशनल मेडल लाई। गर्ल्स टीम का आजादी के बाद पहली बार नेशनल मेडल आया। गर्ल्स वॉलीबॉल टीम का भी पहली बार नेशनल मेडल आया। साइक्लिंग टीम 34 साल के बाद ऑल एज ग्रुप में नम्बर 1 आई।

फुटबॉल टीम 35 साल बाद हाईलीग में पहुंची। हैंडबॉल में नेशनल मेडल आ गया। इतने मेडल पिछले 10 साल में नहीं आए, जितने पिछले डेढ़-2 साल में आए हैं। ये पॉलिसी का नतीजा है। हमने खेलो इंडिया के तहत स्टेट गेम्स करवाए। इस बार पहले से और अच्छी परफॉर्मेंस खेलो इंडिया में होगी।

भास्कर : मुख्यमंत्री युवा संबल योजना में बहुत से बेरोजगार भत्ता पाने से रह गए, नियमों में 4 घंटे काम की शर्त भी क्यों?
चांदना :
बेरोजगारी की एक अलग डेफिनेशन है। हमने कहा था पढ़े-लिखे बेरोजगार। कम से कम ग्रेजुएट तो होना ही चाहिए। कई शर्तों की वजह से कई लोग इससे बाहर होते हैं।

कम्युनिटी सर्विस करने में हर्ज क्या है। अगर बेरोजगार अपने गांव के स्कूल में बच्चों को जाकर 4 घंटे पढ़ा देता है, तो दिक्कत क्या है।

किसी ने नर्सिंग का कोर्स कर रखा है, कम्युनिटी सर्विस कर ली तो 4 घंटे काम करने में हर्ज नहीं है। 2 नहीं 6 लाख युवाओं को बेरोजगारी भत्ता योजना से फायदा मिल चुका है।

पिछली बीजेपी सरकार ने 125 करोड़ रुपए बेरोजगारी भत्ते में दिए था। हमारी सरकार ने 1600 करोड़ भत्ता दिया है। उन लोगों को तो सवाल उठाने का हक ही नहीं है।

भास्कर : विपक्ष में रहते जैसे आपके तेवर थे, अब वो पहले वाले आक्रमक तेवर क्यों नहीं रहे ?
चांदना :
हर जगह एक अलग रोल होता है। जब हम विपक्ष में थे तो सरकार की आंख खोलना मकसद था। कोई भी सरकार चुनी जाती है तो चापलूसों से घिर जाती है। विपक्ष और पत्रकारों का काम होता है सरकार की आंख खोले और जनहित के मुद्दे मजबूती से उठाए, वो काम हमने किया है।

सरकार में आए तो पॉलिसी मेकिंग का काम है। सरकारी पैसों को जनता के कामों में लगाना है। हमने स्टेट गेम्स करवाए। 8 से 80 साल तक के लोग, माता-बहनें, दादा-पोता सब खेल रहे हैं। राज में आने के बाद जो काम करने चाहिए, वो कर रहे हैं।

अशोक चांदना (दाएं से दूसरे) एक प्रोफेशनल पोलो प्लेयर हैं। जयपुर में हर साल होने वाले पोलो टूर्नामेंट में वे लगातार पार्टिसिपेट करते रहे हैं।
अशोक चांदना (दाएं से दूसरे) एक प्रोफेशनल पोलो प्लेयर हैं। जयपुर में हर साल होने वाले पोलो टूर्नामेंट में वे लगातार पार्टिसिपेट करते रहे हैं।

भास्कर : आप मानते हैं विपक्ष भी आंदोलन करने और जनता के मुद्दे उठाने में कमजोर पड़ रहा है?
चांदना :
विपक्ष का कोई रोल ही राजस्थान में नहीं रहा। वो तो ख्याली पुलाव पका रहे हैं कि अगर राज आ गया तो कौन मुख्यमंत्री बनेंगे।

वो इस भरोसे बैठे हैं कांग्रेस कोई गलती कर दे तो हमारा राज आ जाए। जनता के मुद्दे उठाने से सरोकार नहीं है, वो आपसी खींचातानी करने में व्यस्त हैं।

इन 4 सालों में एक भी सक्सेसफुल आंदोलन बीजेपी खड़ा नहीं कर पाई। यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के चुनाव हुए।

राजस्थान में दो बड़ी जयपुर और जोधपुर यूनिवर्सिटी का नतीजा देख लें। विधानसभा के धरियावाद, वल्लभनगर, सहाड़ा बाय इलेक्शन का रिजल्ट देख लें।

कृष्णा पूनिया को स्पोर्ट्स काउंसिल चेयरमैन हैं। चांदना और उनके बीच विवाद अक्सर विवाद होते रहते हैं। दोनों के बीच अब भी मतभेद हैं।
कृष्णा पूनिया को स्पोर्ट्स काउंसिल चेयरमैन हैं। चांदना और उनके बीच विवाद अक्सर विवाद होते रहते हैं। दोनों के बीच अब भी मतभेद हैं।

भास्कर : विधायक कृष्णा पूनिया को स्पोर्ट्स काउंसिल चेयरमैन बनाया गया, तब से आपके संबंध तल्ख बताए जाते हैं?
चांदना :
मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। सब अपना-अपना काम करेंगे। मेरा काम मैं करूंगा। काउंसिल चेयरमैन के तौर पर कृष्णाजी की अपनी अथॉरिटीज हैं, वो अपना काम करेंगी। उनका काम कोई और नहीं कर सकता है।

भास्कर : बूंदी में आपने कहा कि बाहर का कीचड़-कादा है, आप मानते हैं हाड़ौती और पूर्वी राजस्थान के गुर्जर समाज के बीच एक लकीर खींच गई है?
चांदना:
देखिए ये तो मैं नहीं बता सकता, क्योंकि मैं पूरे हाड़ौती के गुर्जर समाज का ठेका अकेले ले लूं ऐसा संभव नहीं है। मैंने हिंडोली-नैनवां के गुर्जर समाज नहीं, सभी कार्यकर्ताओं को कहा है। क्योंकि लगातार उनके मेरे पास फोन आए। वो इस घटना से बहुत हताश और मायूस थे।

जूता फिंकवाने की हरकत तो कादा-कीचड़ ही है। आप एक-दूसरे पर कीचड़, जूता-चप्पल फेंक रहे हो। राजस्थान की 8 करोड़ आबादी में लगता नहीं, एक भी समझदार आदमी इसका समर्थन करेगा। इस तरह की कादा कीचड़ की घटनाओं का गलत प्रभाव मेरे क्षेत्र की जनता पर नहीं पड़ना चाहिए। इसलिए मैंने कहा।

दो साल पहले सियासी संकट के समय अशोक चांदना सहित गुर्जर समाज के 5 विधायक अशोक गहलोत कैंप के साथ रहे। इसके बाद से चांदना और पायलट के बीच तल्खी बढ़ी हुई है।
दो साल पहले सियासी संकट के समय अशोक चांदना सहित गुर्जर समाज के 5 विधायक अशोक गहलोत कैंप के साथ रहे। इसके बाद से चांदना और पायलट के बीच तल्खी बढ़ी हुई है।

भास्कर : गुर्जर समाज में नेतृत्व को लेकर हलचल है। गुर्जर किसे नेता मानते हैं?
चांदना:
कोई जाति का नेता है, तो फिर उनको समाज के संगठनों का अध्यक्ष बनाएं। लोकतंत्र में किसी एक जाति का नेता हो ही नहीं सकता है। यह तो एक गलत कल्पना है। 36 कौम और सभी धर्मों के लोग मिलकर अपने का नेता चुनते हैं।

लोकतंत्र की व्यवस्था है, सरकार सभी समूहों से मिलकर बनती है। जिम्मेदारी गांव, इलाके या एक जाति के प्रति नहीं होती।

सभी लोगों, किसी भी इलाके,विचारधारा, जाति, धर्म के प्रति सरकार की जिम्मेदारी होती है। किसी भी जाति का एक नेता नहीं होता। ये कल्पना बनाकर कई लोग अपनी दुकानें चला लेते हैं। इसमें सम्मानित और गैर सम्मानित लोग हो सकते हैं।

भास्कर : आपके साथी मंत्री परसादीलाल मीणा ने सचिन पायलट को बाहरी बताया है। क्या आप भी उन्हें बाहरी मानते हैं?
चांदना:
मैं तो कई चीजें मानता हूं। कई चीजें मैं आपको यहां पर कह नहीं सकता। परसादीलाल जी से पूछना चाहिए उन्होंने ऐसा कहा तो क्यों कहा।

चांदना ने कहा- अभी भी विधानसभा चुनाव में 12 महीने का समय है। अभी बहुत से काम किए जाने हैं। यदि हमने सारे स्टेप्स सही उठाए तो कांग्रेस पार्टी की सरकार रिपीट होगी। सीएम के रूप में मॉडल मुख्यमंत्री ने दिया।
चांदना ने कहा- अभी भी विधानसभा चुनाव में 12 महीने का समय है। अभी बहुत से काम किए जाने हैं। यदि हमने सारे स्टेप्स सही उठाए तो कांग्रेस पार्टी की सरकार रिपीट होगी। सीएम के रूप में मॉडल मुख्यमंत्री ने दिया।

भास्कर : मौजूदा कांग्रेस सरकार में गुर्जर आंदोलन को लेकर बातचीत से रास्ते निकाले गए। फिर भी गुर्जर समाज में गहलोत सरकार के खिलाफ आक्रोश क्यों पनप रहा है?
चांदना:
गुर्जर समाज एक भावुक समाज है। भावुक व्यक्ति को भावुक करके लामबंद करना बहुत आसान होता है। अपने निजी लाभ के लिए समाज को लामबंद करने को मैं गलत मानता हूं।

समाज को भावुक कर्नल साहब ने किया, लेकिन उन्होंने निजी फायदे के लिए नहीं समाज के लिए किया। आरक्षण मिला तो आंदोलन करने वाले लोगों को फायदा मिला।

कर्नल साहब को कोई व्यक्तिगत फायदा नहीं मिला। उन्होंने बहुत कठिन परिश्रम किया।

भास्कर : आप दो बार से लगातार जीतकर आ रहे हैं। इस बार टफ फाइट है, अबकी बार क्या सियासी भविष्य देखते हैं?
चांदना:
राजस्थान के जन-जन को पता है कि कोरोना काल में देश में नम्बर- 1 मॉडल राजस्थान था। स्पोर्ट्स फैसिलिटी, चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में लाखों रुपए के ऑपरेशन लोगों के फ्री में हो रहे हैं। इससे अच्छा मॉडल तो है ही नहीं।

अभी भी विधानसभा चुनाव में 12 महीने का समय है। अभी बहुत से काम किए जाने हैं जिससे कांग्रेस पार्टी की सरकार रिपीट होगी।

अगर वो सारे स्टेप्स हमने सही उठाए तो। अभी मैं कम्पलीट नहीं मानता हूं। सीएम के रूप में मॉडल मुख्यमंत्री ने दिया। विधानसभा के कार्यकर्ता के रूप में हम कैसे खुद को पेश करते हैं, लोकल लोगों से संवाद करते हैं, उस पर डिपेंड करेगा।

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