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कोरोना की तीसरी लहर में कैसे बचेंगे बच्चे?:हेल्थ सेक्रेटरी ने कहा- बच्चों के लिए रेमडेसिविर के छोटे वायल ऑर्डर किए हैं, अगस्त तक ऑक्सीजन का संकट खत्म होगा, बेड भी बढ़ेंगे

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: दिनेश पालीवाल

राजस्थान में कोरोना की दूसरी लहर ने जिस तरह कहर बरपाया, उसे देखते हुए गहलोत सरकार ने तीसरी लहर से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। दूसरी लहर में जिस तरह अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड्स और दवाइयों की कमी से लोग दम तोड़ रहे थे, वैसी परिस्थिति दोबारा न बने इसे ध्यान में रखकर ये तैयारियां की जा रही हैं। इसमें सबसे प्रमुख ऑक्सीजन है, जिस पर राज्य को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक होने की आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए प्रदेशभर में अस्पतालों में बच्चे से संबंधित उपचार के लिए पर्याप्त दवाइयां, ICU और वेंटिलेटर के इंतजाम किए जा रहे हैं। राज्य ने दूसरी लहर में क्या चुनौतियां आईं और उनसे क्या सबक सीखा। इन्हीं बिंदुओं पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सचिव सिद्धार्थ महाजन ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत की।

सवाल: दूसरी लहर में ऑक्सीजन और अस्पतालों में जगह नहीं मिलने से कई लोग घर या अस्पतालों के बाहर तड़प-तड़प कर मर गए, क्या तीसरी लहर में छोटे बच्चों के साथ ऐसा देखने को मिलेगा?

जवाब: हम बच्चों व हर उम्र के लोगों के लिए तैयारी कर रहे हैं। प्रदेश में जहां-जहां भी बच्चों के अस्पताल है और वहां ICU है वहां NICU बेड्स की संख्या बढ़ा रहे हैं। सामान्य अस्पतालों में ICU, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन बेड्स की कैपेसिटी को दोगुना कर रहे हैं। अप्रैल-मई में ही हमने पूरे प्रदेश में ऑक्सीजन बेड्स जो पहले 10 हजार के करीब थे, उन्हें दो गुना बढ़ाकर 20,897, ICU, वेंटिलेटर 3372 से बढ़ाकर 5454 और सामान्य बेड्स की संख्या 7798 से बढ़ाकर 14240 तक कर दी है। साथ ही अब हमने सवाई मानसिंह अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम बनाई है, जो आने वाले समय में सामान्य डॉक्टरों का एक ट्रेनिंग सेशन चलाएगी। इसमें कोरोना से बीमार बच्चों का कैसे इलाज करें उसके बारे में जानकारी दी जाएगी।

ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की खेप रिसीव करते अधिकारी। (फाइल फोटो)
ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की खेप रिसीव करते अधिकारी। (फाइल फोटो)

सवाल: दूसरी लहर में ऑक्सीजन के लिए लोग रात भर लाइन में लगे रहे? अब ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए क्या प्लान है?
जवाब:
मार्च तक राज्य में करीब 150 मीट्रिक टन तक ऑक्सीजन का उत्पादन होता था और इससे आसानी से जरूरत पूरी हो जाती थी। अप्रैल-मई में केस तेजी से आए, तब मांग एक दम से बढ़ी। एक दिन में मांग 410 मीट्रिक टन से भी ज्यादा पहुंची थी। अब सभी जिलांे के अस्पतालों पर ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट लगाने शुरू कर दिए हैं। 60 से ज्यादा बेड्स वाले सभी अस्पतालों खुद के ऑक्सीजन प्लांट होंगे। अगस्त तक ऑक्सीजन की उत्पादन क्षमता को 650 मीट्रिक टन तक ले जाएंगे। हर CHC-PHC पर बेड्स की क्षमता के ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर होंगे ।

सवाल: रेमडेसिविर और दवा नहीं होने से जानें गईं। क्या तीसरी लहर के लिए कोई अलग से व्यवस्था है?
जवाब:
रेमडेसिविर इंजेक्शन की अचानक मांग बढ़ने से इसकी 7-10 दिन किल्लत रही थी। केन्द्र सरकार ने इस इंजेक्शन की सप्लाई को अपने कंट्रोल में ले लिया है। इसके बाद भी हमने 4 लाख से ज्यादा रेमडेसिविर के वायल अप्रैल-मई के 56 दिनों में पूरे प्रदेश में दिए है। इस बार रेमडेसिविर के 80MG की वायल के ऑर्डर अभी से दे दिए। एडल्ट के लिए 400MG के लिक्विड और पाउडर वाले वायल भी मंगवा रहे हैं। DRDO की बनाई 2 DG दवा तथा रोश फार्मा की एंटीबॉडी कॉकटेल दवा के भी ऑर्डर दे दिए हैं। छोटे बच्चे जिनके कम लक्षण दिखते है। उनके लिए पैरासिटामोल, लिवोसिट्राजिन, एजीथ्रोमायसिन सहित अन्य जरूरी दवाइयां सीरप फॉम में मंगवाई है।

पिछले दिनों मुख्य सचिव के साथ जयपुर के बीलवा कोविड सेंटर का दौरा करते हेल्थ सेक्रेटरी सिद्धार्थ महाजन।
पिछले दिनों मुख्य सचिव के साथ जयपुर के बीलवा कोविड सेंटर का दौरा करते हेल्थ सेक्रेटरी सिद्धार्थ महाजन।

सवाल : गांवों में तो कोराेना ने कहर बरपा दिया है? हालात बेकाबू हो गए। क्या गांवों को लेकर कोई प्लान किया गया?

जवाब: ऐसा नहीं है। हमने दूसरी लहर में गांवों में कोरोना को पूरे देश में सबसे बेहतर तरीके से कंट्रोल किया है। 10 अप्रैल से भी पहले से हमने डोर टू डोर सर्वे शुरू कर दिया था, जो अभी भी चल रहा है। लक्षण दिखते ही मौके पर हम दवाइयों का किट दे रहे हैं। सभी टीम को एंटीजन टेस्ट के लिए ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी है। कुछ जगह तो टेस्टिंग भी शुरू करवा दी। अब तक हमारे सर्वे में 14.06 लाख से ज्यादा लोग कोविड के लक्षण वाले मिले हैं। इसी सर्वे का नतीजा है कि राजस्थान में गांवों की स्थिति मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से काफी बेहतर रही है।

सवाल : दूसरी लहर में संक्रमण इतना कैसे फैला? अब क्या स्थिति है?

जवाब: राज्य में जब से सख्त लॉकडाउन लगा है, तब से केस कम आ रहे हैं। डेली जांचों में 4-5 हजार केस आना ज्यादा मायने नहीं रख रहा, जितना कि अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी में केस आना मायने रखते हैं। ऑक्सीजन की खपत, दवाइयों की मांग कितनी कम हो गई ये बताता है कि हमारे प्रयास सफल हो रहे हैं। आज स्थिति ये है कि पूरे प्रदेश के सभी अस्पतालों (निजी और सरकारी) में डेली औसतन एक हजार नए मरीज भर्ती होने के लिए आ रहे है, जबकि 1500-1600 मरीज हर रोज अस्पतालों से डिस्चार्ज हो रहे हैं। आज राज्य में 63 फीसदी से ज्यादा बेड्स खाली हो चुके हैं। ऑक्सीजन की खपत भी 400 मीट्रिक टन से जो ज्यादा थी, वह 100 टन घटकर 300 पर पहुंच गई।

अप्रैल 2021 में जयपुर के RUHS के आईसीयू वार्ड की ये स्थिति थी।
अप्रैल 2021 में जयपुर के RUHS के आईसीयू वार्ड की ये स्थिति थी।
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