गहलोत बोले-हर उम्र में लगे प्रीकॉशन डोज,बच्चों का हो वैक्सीनेशन:PM वीसी में नहीं मिला बोलने का मौका,तो सोशल मीडिया पर दिए सुझाव

जयपुर4 महीने पहले
गहलोत बोले-हर उम्र में लगे प्रीकॉशन डोज,बच्चों का हो वैक्सीनेशन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरूवार को कोविड के हालात को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा की। इसमें केवल 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ही अपनी बात रखने का मौका मिल सका। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर कहा है चर्चा में मौका नहीं मिलने के कारण कारण वह सोशल मीडिया के जरिए जनहित में कोविड मैनेजमेंट को लेकर अपने सुझाव शेयर कर रहे हैं। गहलोत ने सुझाव दिया कि कोविड की प्रीकॉशन डोज 60 साल से ज्यादा उम्र के बजाय सभी उम्र के लोगों को लगनी चाहिए। क्योंकि मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक को-मॉर्बिड बीमारियां हर उम्र में देखने को मिलती हैं। गहलोत ने प्रीकॉशन डोज के लिए 9 महीने की बजाय दूसरी डोज के 3 से 6 महीने में तीसरी डोज लगाने की मांग उठाई है। क्योंकि ज्यादा वक्त के साथ वैक्सीन का असर कम होने लगता है। उन्होंने भारत में छोटे बच्चों का वैक्सीनेशन जल्द शुरू करने की मांग भी उठाई। गहलोत ने कहा दुनिया के कई देशों में 2 साल की उम्र तक के छोटे बच्चों को वैक्सीन लग रही है। जबकि भारत में फिलहाल 15 से 18 साल तक के किशोर वर्ग का वैक्सीनेशन हो रहा है। कोविड होने के बाद अस्थमा,हार्ट,किडनी,ब्रेन स्ट्रोक की तकलीफ लोगों को हो रही है। बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम इन चिल्डरन से डेथ रेट बढ़ जाती है।

जीनोम सीक्वेसिंग फैसिलिटी सभी राज्यों में डवलप हो

सुझाव देते हुए गहलोत ने कहा कि जीनोम सीक्वेंसिंग फैसिलिटी देश के सभी राज्यों में डवलप की जानी चाहिए। जो अभी नहीं के बराबर है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में हुई जीनोम सीक्वेंसिंग के पैटर्न से पता चला कि 92 फीसदी केस ओमिक्रॉन से संक्रमित हैं। लेकिन साथ ही संतोष जताया है कि राजस्थान में सीरो सर्विलांस में 90 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी पाई गई है। प्रदेश में कोविड संक्रमण की कम्यूनिटी स्प्रेडिंग होकर हर्ड इम्यूनिटी डवलप हो चुकी है। फिर भी वैक्सीनेशन जरूरी है,ताकि एंटीबॉडी और मजबूत हो जाए। इसके लिए उन्होंने फाइजर, मॉडर्ना जैसी कम्पनियों को भारत में भी प्राइवेट एरिया में मान्यता देने की मांग रखी। ताकि आर्थिक तौर पर सक्षम लोग इन्हें लगवा सकें। इससे सरकार पर भी आर्थिक भार कम होगा। गहलोत ने कहा विकसित देशों में कोविड वैक्सीनेशन स्पीड के साथ और कम विकसित-गरीब देशों में धीरे होना चिन्ता की बात है। किसी भी देश में महामारी रहने से पूरी दुनिया में खतरा बना रहेगा। डेल्टा वायरस भारत से दुनिया के दूसरे मुल्कों में पहुंचा। जबकि ओमीक्रॉन दक्षिणी अफ्रीका से आकर दुनियाभर में फैल चुका है। इसलिए आखिरी व्यक्ति तक वैक्सीनेशन होना जरूरी है।

प्रदेश में 130 करोड़ से इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड वायरोलॉजी‘ पर काम शुरू

गहलोत ने बताया राजस्थान में पिछली बजट घोषणा के मुताबिक 130 करोड़ रुपए की लागत से ‘इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड वायरोलॉजी‘ बनाने का काम शुरू हो गया है। इसमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे और स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन, कोलकाता दोनों के स्पेशियलाइजेशन और मॉर्डन फैसिलिटीज को शामिल किया जा रहा है। जिससे भविष्य में वायरस से होने वाली बीमारियों की स्टडी और चुनौतियों से निपटने में आसानी होगी। पूरे देश को इसका फायदा मिलेगा।

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