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अभी राजस्थान में 2883 मेगावाट बिजली का टोटा:कोल इंडिया से 26000 टन कोयला कम मिलने के कारण रोस्टर से फीडरों से करनी पड़ रही बिजली कटौती, दो दिन में 795 मेगावाट बिजली प्रोडक्शन से कुछ राहत

जयपुर9 महीने पहले
सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट,राजस्थान।

राजस्थान में बिजली का संकट बरकरार है। तमाम कोशिशों के बावजूद भी प्रदेश में 2883 मेगावाटबिजली का टोटा पड़ रहा है। बड़ा कारण यह है कि कोल इंडिया से 26000 टन यानी साढ़े 6 रैक कोयला कम मिल रहा है। जिससे बिजली प्रोडक्शन प्लांट्स की बन्द पड़ी यूनिट्स चालू करके प्रोडक्शन की हालत मेंं नहीं लाई जा सकी हैं।

रोस्टर से हो रही फीडर से बिजली कटौती
रोस्टर से हो रही फीडर से बिजली कटौती

कोयला किल्लत के कारण 2883 मेगावाट बिजली की कमी

कोयले की किल्लत का सीधा असर प्रोडक्शन पर पड़ रहा है। एनर्जी डिपार्टमेंट के एसीएस डॉ सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राज्य में 9317 मेगावाट बिजली की उपलब्धता रही है। वहीं 10683 मेगावाट की औसत मांग और 12200 मेगावाट की अधिकतम औसत मांग रही है। अधिकतम औसत मांग में से उपलब्धता को घटाते हैं तो पता चलता है कि कि 2883 मेगावाट बिजली की अभी भी कमी है। इसलिए डिमांड और सप्लाई के इस फर्क को पाटने के लिए रोस्टर के आधार पर फीडरों से बिजली कटौती की जा रही है।

एसीएस एनर्जी डॉ सुबोध अग्रवाल और ऊर्जा विकास चीफ इंजीनियर मुकेश बंसल
एसीएस एनर्जी डॉ सुबोध अग्रवाल और ऊर्जा विकास चीफ इंजीनियर मुकेश बंसल

कोयला सचिव से कहा-कोल इंडिया से और दिलाएं 6.5 रैक कोयला

हालांकि पिछले दो दिनोें में 795 मेगावाट बिजली प्रोडक्शन भी शुरू हुआ है। जिससे पिछले दिनों पैदा हुए गम्भीर बिजली संकट से कुछ हद तक राहत जरूर मिली है। प्रदेश में पिछले दो दिनों में कालीसिंध और कोटा तापीय बिजली घरों में बिजली प्रोडक्शन शुरू हो गया है। हालांकि फौरी तौर पर हालातों में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन बिजली का संकट बरकरार है। इसलिए एसीएस एनर्जी ने एक बार फिर केन्द्रीय कोयला सचिव अनिल जैन को राजस्थान में कोल इंडिया से कोयला रैक की सप्लाई बढ़ाने की मांग की है।

कोयला खदान-फाइल फोटो।
कोयला खदान-फाइल फोटो।

कोल इंडिया का 11.5 की जगह 5 रैक देना चिन्ता की बात

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि कोल इंडिया को राजस्थान को करीब साढ़े 11 रैक रोजाना देनी है। जबकि अभी कोल इंडिया की सब्सिडरी यूमनिट केवल 5 रैक ही डिस्पैच कर रही है। यानी साढ़े 6 रैक कोयला वहां से कम मिल पा रहा है। उन्होंने विद्युत भवन में विद्युत उत्पादन निगम, प्रसारण निगम और ऊर्जा विकास निगम के सीनियर ऑफिसर्स के साथ बिजली के मैनेजमेंट को लेकर रिव्यू किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राज्य में बिजली संकट के हालात की लगातार समीक्षा कर रहे हैं और उसी का रिजल्ट है कि अब हालात में कुछ सुधार होने लगा है। लेकिन कोल इंडिया की सब्सिडरी यूनिट्स से राजस्थान को कोयले की सप्लाई नहीं बढ़ पाई है यह चिन्ता की बात है।

21 रैक की जरूरत,औसत मिल रहीं 15 रैक

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि हाई लेवल की कोशिशों से अब प्रदेश में 15 से 16 रैक कोयले की डिस्पैच होने लगी हैं, जबकि इससे पहले कम संख्या में रैक आ पा रही थीं। 10 अक्टूबर को कोल इंडिया की यूनिट एनसीएल से 4 और एसईसीएल से 1 ही रेक डिस्पैच हुई। वहीं विद्युत उत्पादन निगम और अडानी के जॉइंट वेंचर पीकेसीएल ज्यादा रैक मिलने लगे हैं। इसी दिन उस जॉइंट वेंचर कोल ब्लॉक से 11 रैक कोयला डिस्पेच हुआ है। इस तरह से राजस्थान के लिए कुल 16 रैक डिस्पेच हुई हैं। जबकि इससे पहले 9 अक्टूबर को 15 और उससे पहले 14 ही रैक मिल पा रही थीं। उत्पादन निगम के आकलन के मुताबिक राज्य में सभी थर्मल पावर टूनिट्स के लिए कोयला की करीब 21 रैक रोजाना की जरूरत है।

सिंगरोली और बिलासपुर में कोयला खदानों में बैठा रखे हैं अधिकारी

राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के सीएमडी आरके शर्मा ने बताया कि राज्य में 2 यूनिट्स से बिजली का प्रोडक्शन शुरू कर दिया गया है। कोयला की सप्लाई के कॉर्डिनेशन के लिए विभाग के एक अधिकारी को सिंगरोली और दो अधिकारियों को बिलासपुर से कॉर्डिनेशन और रैक डिस्पैच कराने की जिम्मेदारी दी गई है। बैठक में ऊर्जा विकास निगम के चीफ इंजीनियर मुकेश बंसल, उत्पादन निगम के पीएस सक्सैना और वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने-अपने फील्ड की जानकारी दी।

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