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6 लाख से ज्यादा दिव्यांगों को पहचान का इंतजार:अफसरों की ढिलाई से ​​​​​​​पेंडेंसी, मंत्री जूली बोले- कैम्प लगाकर 2 महीने में बनाएं सर्टिफिकेट

जयपुर4 महीने पहले
4 लाख 24 हजार 641 दिव्यांगों को सीएमएचओ लेवल पर सर्टिफिकेट जारी हुए। - Dainik Bhaskar
4 लाख 24 हजार 641 दिव्यांगों को सीएमएचओ लेवल पर सर्टिफिकेट जारी हुए।

राजस्थान में 6 लाख से ज्यादा दिव्यांगों को अब तक उनकी पहचान नहीं मिल सकी है। इसका कारण है सर्टिफिकेट जारी नहीं होना। इसके कारण दिव्यांग अपने लिए चलाई जा रही स्कीम्स का फायदा भी नहीं उठा पा रहे हैं। नौकरी, बस-ट्रेन में सफर में मिलने वाले लाभ, रिजर्वेशन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन का फायदा इन दिव्यांगों को नहीं मिल पा रहा। जनवरी 2022 के सर्वे स्टेटस में सामने आया है कि 11 लाख 79 हजार 1 लोगों ने दिव्यांगता सर्टिफिकेट के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया।

इनमें से 3 लाख 17 हजार 773 पेंडिंग हैं। जबकि 2 लाख 99 हजार 650 मामले डिस्पोज करने के लिए पीएमओ, बीसीएमओ, मेडिकल कॉलेज और सीएचओ लेवल पर पेंडिंग चल रहे हैं। कुल 6 लाख 17 हजार 443 दिव्यांगों के हाथ में सर्टिफिकेट नहीं मिले हैं। जबकि 4 लाख 24 हजार 641 दिव्यांगों को सीएमएचओ लेवल पर सर्टिफिकेट जारी हुए।

मुख्यमंत्री संवेदनशील, अफसर संवेदनहीन

दिव्यांग अधिकार महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हेमंत भाई गोयल ने दैनिक भास्कर को जानकारी देते हुए बताया दी राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज एक्ट, 2016 के मुताबिक विकलांगताओं की कैटेगरी 7 से बढ़कर 21 की जा चुकी हैं। दिव्यांगता सर्टिफिकेट ऑनलाइन जारी होते हैं। विकलांगता की जांच से लेकर ई-मित्र रजिस्ट्रेशन तक दिव्यांगों को परेशान होना पड़ रहा है। दिव्यांगता सर्टिफिकेट टाइमबाउंड जारी होना चाहिए। शिकायत के लिए कोई डेडीकेटेड टोल फ्री नम्बर नहीं है।

पूरी प्रक्रिया भगवान भरोसे चल रही है। विशेष योग्यजन निदेशालय, मेडिकल एंड हेल्थ और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग के डीओआईटी तीनों विभागों का रोल दिव्यांगता सर्टिफिकेट जारी करने के प्रोसेस में रहता है। निशक्तजन आयुक्त से बार-बार कह रहे हैं कि तीनों को नोटिस इश्यू किया जाए। मुख्यमंत्री तो संवेदनशील हैं,लेकिन अफसर संवेदनहीन हैं। दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाने से पहले विकलांगता की जांच के लिए होने वाले टेक्ट भी फ्री नहीं हो रहे। अलग-अलग टेस्ट का पैसा दिव्यांगों से लिया जा रहा है। मेडिकल बोर्ड में डॉक्टर्स की कमी है। टेक्निकल स्टाफ, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट समेत तमाम टेक्निकल और मेडिकल पोस्ट खाली पड़ी हैं। ऐसे में किस तरह विकलांगता प्रमाण पत्र जारी हो सकेंगे।

मंत्री बोले अगले 2 महीने में कैंप लगाकर दें सर्टिफिकेट

मामले में जानकारी मिलने पर सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने निर्देश दिए हैं कि विशेष योग्यजनों को अस्पतालों में लाकर उनके निःशक्तता सर्टिफिकेट बनवाने का काम जल्द करें। इसके लिए जरूरत के मुताबिक कैम्प लगाए जाएं, स्पेशियली एबल्ड होने को लाने-ले जाने के लिए एम्बुलेंस, मेडिकल मोबाइल वैन की व्यवस्था की जाए। जो निःशक्तता प्रमाण-पत्र और सिलिकोसिस प्रमाण-पत्र से वंचित हैं, उनके लिए स्पेशल वर्क प्लान बनाने को कहा गया है। पीएमओ, ब्लॉक सीएमएचओ और सीएमएचओ लेवल पर पेंडिंग 2 लाख 52 हार 201 केस और मेडिकल कॉलेज लेवल पर पेंडिंग 47 हजार 746 आवेदन करने वालों की मेडिकल जांच कर अगले 2 महीने में सर्टिफिकेट जारी किए जाएं।

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