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कोल इंडिया लिमिटेड के इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन मैकेनिज्म से बिजली संकट:ऊर्जा मंत्री डॉ बीडी कल्ला का आरोप-कोल इंडिया ने एग्रीमेंट के मुताबिक नहीं भेजे कोल रैक, राजस्थान पर नहीं,कोल इंडिया पर देनदारी

जयपुर3 महीने पहले
राजस्थान के ऊर्जा मंत्री डॉ बीडी कल्ला।

राजस्थान के ऊर्जा मंत्री डॉ बीडी कल्ला ने आरोप लगाया है कि कोल इंडिया लिमिटेड ने इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन मैकेनिज्म से ऐसे प्लांटों को कोयला दिया है, जो काफी मात्रा में कोयला विदेशों से इम्पोर्ट करते थे। लेकिन विदेशों से कोयला इम्पोर्ट करने की बजाय उन्हें कोल इंडिया ने कोयला दिया है। इस कारण जिन बिजली घरों का कॉट्रैक्ट कोल इंडिया से पहले से कोयला सप्लाई का था,उसमें कमी हुई है। कोल इंडिया ने उन कॉन्ट्रैक्ट्स की शर्तों को तोड़कर दूसरी जगह के प्लांट्स को कोयला भेज दिया। यह राजस्थान सहित देश के अन्य राज्यों के थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की कमी का मुख्य कारण है।

इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन मैकेनिज्म से हुए रेग्युलर कॉन्ट्रैक्ट्स फेल-सूत्र

ऊर्जा विभाग के सूत्रों ने बताया कि कुछ ऐसे पावर प्लांट्स देश में हैं, जो विदेशों से काफी मात्रा में कोयला मंगवाते हैं। इम्पोर्ट कोयले से भी पावर प्लांट्स चलते आए हैं। कई पावर प्लांट्स समुद्र के किनारे लोकेट होते हैं। जहां जहाजों से कोयला रेग्युलर इम्पोर्ट होकर आता है। लेकिन पहला कारण यह है कि केन्द्र सरकार ने फॉरेन करेंसी बचाने के लिए पिछले दिनों नीतियों में कुछ बदलाव किया है। कोल इंडिया ने ऐसे पावर प्लांट्स की जरूरतें पूरी करने के लिए उनको भी कोयला सप्लाई किया है। इससे उनके रेग्युलर कॉन्ट्रैक्ट्स में कोयला सप्लाई प्रभावित होकर कम हुई है। भारत सरकार ने नई नीति के तहत इम्पोर्ट को भी कम किया है। इस कारण अब पहले जितना कोयला देश में इम्पोर्ट नहीं हो रहा है। दूसरा कारण यह है कि मार्च-अप्रैल में जो इम्पोर्ट किया गया कोयला 60 से 65 डॉलर प्रति टन भारत के पोर्ट पर उपलब्ध होता था, आज उसकी कीमत बढ़कर 200 डॉलर प्रति टन के आसपास हो गई है। इसलिए ऐसे प्लांंट्स कोल इंडिया से कोयला खरीद रहे हैं। पहले कोल इंडिया उन्हें यह एक्सट्रा कोयला नहीं देता था, लेकिन अब पॉलिसी लचीली बनाकर कोयला सप्लाई किया जा रहा है।

कोल माइन-फाइल फोटो।
कोल माइन-फाइल फोटो।

यह बिजली नहीं कोयले का संकट, देनदार राजस्थान नहीं कोल इंडिया

मंत्री कल्ला ने कहा- यह बिजली का नहीं बल्कि कोयले का संकट है। जिस वजह से बिजली की किल्लत पैदा हुई है। उन्होंने भारत सरकार की कोल इंडिया को राजस्थान की देनदार बताया है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया की कम्पनियां यह गलत प्रचार करके लोगों को भ्रमित कर रही हैं कि राजस्थान सरकार का पैसा बकाया है। जबकि वास्तविकता यह है कि 2015-16 में कोयले की क्वालिटी में कमी का 459 करोड़ रुपए का भुगतान एसईसीएल की ओर से राजस्थान को किया जाना है। जिसका केस दिसम्बर 2018 से वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र( एडीआरएम) में निपटारे के तहत पेंडिंग चल रहा है।

कोल इंडिया से रोजाना 11.5 रैक का कॉट्रैक्ट,औसत 5.38 रैक ही मिले

डॉ. कल्ला ने बताया कि कोल इंडिया की दो कंपनियों एनसीएल और एसईसीएल के साथ राजस्थान का रोजाना 11.5 रैक कोयले की सप्लाई का एग्रीमेंट है, मगर खदानों में बारिश का पानी भरने से पिछले काफी समय से राजस्थान को यहां के थर्मल प्लांट्स की डेली डिमांड की तुलना में औसतन 5.38 रैक रोजाना (1 अक्टूबर से 13 अक्टूबर) की ही सप्लाई दी जा रही है। ऎसे में राजस्थान की थर्मल यूनिट्स के लिए स्टॉक कैसे रखा जा सकता है। जब डेली डिमांड लायक कोयला ही कोल इंडिया की कम्पनियां नहीं दे पा रही हैं।

एग्रीमेंट जितना कोयला दे कोयला मंत्रालय तो संकट होगा खत्म

राज्य को एग्रीमेंट के अनुसार कोयले की रैक की सप्लाई कोयला मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से कर दी जाएगी तो यह संकट खत्म हो जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश को कोल इंडिया की दोनों कंपनियों से 11 रैक रोजाना के बजाय 1 और 2 अक्टूबर को 4-4 रैक, 3 अक्टूबर को 5, 4 अक्टूबर को 6, 5 अक्टूबर को 4, 6 अक्टूबर को 7 रैक , 7 अक्टूबर को 6 रैक , 8 से 10 अक्टूबर को 5-5 रैक , 11 अक्टूबर को 6 रैक , 12 अक्टूबर को 7 रैक , 13 अक्टूबर को केवल 6 रैक कोयला इन दोनों कंपनियों से मिल पाया है।

जितना कम कोयला दिया,उतना बैकलॉग से दे कोल इंडिया

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि कोल इंडिया की सब्सिडरी कम्पनियों एनसीएल और एसईसीएल ने पिछले दिनों में राजस्थान को कोयले की जो कम सप्लाई की है, उतना मंथली बैकलॉग पर बकाया रैक दिया जाए, तो प्रदेश की थर्मल यूनिट्स में कोयले का स्टॉक रखा जा सकता है। कोल इंडिया से एग्रीमेंट के मुताबिक कोयला सप्लाई नहीं मिलने के कारण प्रदेश सरकार राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के कोल ब्लॉक - परसा ईस्ट और कांता बेसिन से कोयले के एडिशनल रैक लेने में जुटी है। इसके लिए राज्य के अधिकारी रात-दिन मेहनत से काम कर रहे हैं। इसी कारण 11 अक्टूबर को 10 रैक, 12 अक्टूबर को 12 रैक और 13 अक्टूबर को 11 रैक कोयला की प्रदेश की थर्मल यूनिट्स के लिए सप्लाई हुई है।

केन्द्रीय ऊर्जा और कोल मंत्रालय से राज्य सरकार कर रही कॉर्डिनेट

कल्ला ने कहा है कि प्रदेश में केन्द्र सरकार की ओर से कोयले की आपूर्ति में कमी के कारण थर्मल पावर प्रोडक्शन यूनिट्स के जरिए बिजली प्रोडक्शन में आई कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार लगातार केन्द्रीय ऊर्जा और कोल मंत्रालय से कॉर्डिनेट कर रही है।

भारत सरकार ने कोयला का कर रखा है राष्ट्रीयकरण

उन्होंने कहा वास्तविकता में यह देखें तो प्रदेश के थर्मल पॉवर प्लांट्स में बिजली प्रोडक्शन में गिरावट बिजली का नहीं बल्कि कोयले का संकट है, जो केन्द्र सरकार के लेवल पर कोयले की सप्लाई में कमी के कारण पैदा हुआ है। भारत सरकार ने कोयले का राष्ट्रीयकरण कर रखा है। ऎसे में केन्द्र सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह राज्यों को एग्रीमेंट और मांग के मुताबिक कोयला सप्लाई करे। उन्होंने बताया कि कोल इंडिया लिमिटेड ने इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन मैकेनिज्म से भी काफी कोयला दिया है। जिसके चलते जिन बिजली घरों का कॉट्रैक्ट कोल इंडिया से कोयला सप्लाई का था,उसमें कमी हुई है। यह भी राजस्थान सहित देश के अन्य राज्यों के थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की कमी का मुख्य कारण है।

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