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भास्कर इश्यू:पहले अतिक्रमण ‘पाला’, फिर लापरवाही ऐसी कि कोर्ट में पेश संरक्षण की रिपोर्ट ही गुम कर दी

जयपुर7 दिन पहले
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सरकार ने हाईकोर्ट में परकोटे से अतिक्रमण हटाने और जीर्णोद्धार के लिए जो कमिटमेंट किया, उसमें लापरवाही की सभी हदें पार कर दी गईं
  • परकोटे में पांच एजेंसियों के करीब 650 करोड़ के काम चल रहे, जबकि घर की दीवार खोखली पड़ी
  • हाईकोर्ट में पेश परकोटे के इन हालात से निजात दिलाने के कमिटमेंट भूल गए जिम्मेदार

सरकार ने हाईकोर्ट में परकोटे से अतिक्रमण हटाने और जीर्णोद्धार के लिए जो कमिटमेंट किया, उसमें लापरवाही की सभी हदें पार कर दी गईं। डिविजनल कमिश्नर की अध्यक्षता में कमेटी ने 2015 में रिपोर्ट कोर्ट में सौंपते हुए काम करने का दावा किया था। चूंकि संरक्षित परकोटा अब निगम के क्षेत्राधिकार में है, ऐसे में उनको यह काम करने हैं। कथनी और करनी ऐसा है कि काम करना तो दूर, निगम उस रिपोर्ट को ही भूल चुका है।

भास्कर ने रिपोर्ट से जुड़े सच और अफसरों के झूठ को बेनकाब किया तो आया दो दिन से रिपोर्ट को ढूंढने की कसरत चल रही है। साथ ही बड़ा सवाल 30 करोड़ रुपए का है, जिससे अतिक्रमण हटाने के बाद जख्मों पर मलहम लगाना था। संभवतः यह पहला मामला है, जहां एडवांस बजट, हाईकोर्ट के निर्देश और यूनेस्को की गाइडलाइन के बावजूद सिस्टम अतिक्रमण के आगे बेबस रहा।

भास्कर ईश्यू के बाद अफसरों के झूठ-लापरवाही की पोल खुली तो मंगलवार को 2015 में बनी डीपीआर को अपडेट करने के टेंडर लगाए गए। अफसर यहां भी खाल बचाते हुए तरकीबें बता रहे हैं कि शार्ट टर्म टेंडर के बाद रिपोर्ट अपडेट करेंगे।

पांच एजेंसियां 650 करोड़ के काम, घर बाहर से खोखला पड़ा
परकोटे में ताबड़तोड़ काम हो रहे हैं। 5 सरकारी विभाग सहित कई एजेंसियां 650 सौ के काम में लगी हैं। निगम, स्मार्ट सिटी, आमेर विकास प्राधिकरण, अार्कियोलॉजी एंड म्यूजियम, आरटीडीसी के काम भी हैं। परकोटे को मॉडर्न ट्रांसपोर्ट सुविधाओं से लैस करने के लिए मेट्रो के काम हैं सो अलग। पैसे की बुकिंग में अव्वल इंजीनियरिंग टीमें काम और पोस्टिंग के लिए लालायित हैं, लेकिन जहां परकोटे के संरक्षण की बात आई, सब बैकफुट पर आ गए।

सवाल- जिन अतिक्रमण को शह देकर पोषित किया...
अब उनको हटाएं कैसे?

परकोटे के जीर्णोद्धार कार्यों से पहले अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होनी है। यह वह अतिक्रमण है, जो निगम की शह पर हुए और परवान चढ़े। आरोप मिलीभगत और मासिक बंधी के हैं। कई जगह बड़े व्यवसायिक अवैध निर्माण भी हो चुके हैं। इन्हें हटाना चैलेंज है क्योंकि इनके पीछे रसूख, राजनीति और स्वार्थ जुड़े हैं।

पेश हुई रिपोर्ट का पता कर रहे हैं, अतिक्रमण पर कोई जवाब नहीं (सलीम खान, डिप्टी कमिश्नर ‘हेरिटेज’ से सवाल)

Q. परकोटे के संरक्षण से पहले अतिक्रमण चैलेंज है, क्या प्लानिंग है?
-अतिक्रमण हटाने हैं, जो जोन उपायुक्त के स्तर का काम है। हां,यह सही है यह काम नहीं हो पाया है।
Q. उन्होंने ही हटाने होते तो अब तक हट चुके होते?
-इसका जवाब तो मेरे पास नहीं है। बहरहाल 2015 में पेश हुई रिपोर्ट का डिविजनल कमिश्नर आदि जगह से पता लगा रहे हैं।‌पुरानी डीपीआर को अपडेट करने के लिए टेंडर लगा दिए हैं। इसके बाद अतिक्रमण हटाने और संरक्षण कार्य किए जा सकेंगे।
Q. लेकिन डीपीआर का अतिक्रमण से क्या लेना देना?
-हां। लेना देना तो नहीं। लेकिन वह रिपोर्ट काफी पुरानी हो चुकी। उसके बाद भी टूट-फूट आदि हुई है। वह सब कुछ अपडेट होना है।

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