भास्कर एक्सक्लूसिवरात की ठंडी रोटी धनखड़ का ब्रेकफास्ट:गांव में अंग्रेजी बोलने वाले पहले शख्स; अब उपराष्ट्रपति का चुनाव जीता

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: मनीष व्यास
उपराष्ट्रपति पद के लिए धनखड़ सत्ताधारी NDA के उम्मीदवार हैं, जबकि UPA ने मार्गरेट अल्वा को चुनाव मैदान में उतारा है। धनखड़ की जीत तय मानी जा रही है।

झुंझुनूं के किठाना गांव के रहने वाले NDA के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। गांव में घुसते ही जगदीप धनखड़ का फार्म हाउस है। भास्कर टीम वहां पहुंची तो फार्म हाउस पर लाइन से बने 5 कमरों में महिलाओं की भीड़ थी। यहां रहने वाले महिपाल ने बताया- भाईसाहब (जगदीप धनखड़) और भाभीजी (सुदेश धनखड़) ने साल 2008 में महिलाओं के लिए फ्री सिलाई ट्रेनिंग सेंटर खोला था।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि उपराष्ट्रपति पद के लिए आज वोटिंग हो चुकी है। धनखड़ सत्ताधारी NDA के उम्मीदवार हैं, जबकि कांग्रेस ने अपनी सीनियर लीडर व राजस्थान की पूर्व राज्यपाल मार्गरेट अल्वा काे चुनाव मैदान में उतारा है। कई अन्य विपक्षी दल भी अल्वा का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन धनखड़ की जीत तय मानी जा रही है।

महिपाल ने बताया, 'भाईसाहब ने यहां बच्चों के लिए स्पोकन इंग्लिश क्लासेज और कम्प्यूटर कोर्स भी शुरू करवाए हैं। एक लाइब्रेरी भी बनवाई है। ये पूरा काम अब भाभीजी देखती हैं। वो हर दूसरे दिन फोन करके स्टाफ से पूरी जानकारी लेती हैं।'

सिलाई ट्रेनिंग सेंटर के अंदर पहुंचे तो इंस्ट्रक्टर सविता से मुलाकात हुई। सविता ने बताया- '15 साल में अब तक 2500 से ज्यादा महिलाओं को यहां फ्री ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जो अब अपना काम करके पैसा भी कमा रही हैं। जरूरतमंद महिलाओं को यहां फ्री सिलाई मशीन भी दी जाती है। ट्रेनिंग के दौरान कपडे़ और धागे से जुड़ा कोई भी खर्च महिलाओं को करने की जरूरत नहीं है।'

गांव में कम्प्यूटर ट्रेनिंग सेंटर, लाइब्रेरी
ट्रेनिंग सेंटर से बाहर निकले तो वहां कुछ और कमरे बने हुए थे। महिपाल ने बताया, 'भाईसाहब गांव में अंग्रेजी में बात करने वाले पहले शख्स थे। अब उनकी ख्वाहिश है, गांव का हर लड़का धड़ल्ले से अंग्रेजी बोले। इसी सोच के साथ कुछ साल पहले उन्होंने यहां एक कमरे में स्पोकन इंग्लिश​​​​​​ क्लासेज और दूसरे कमरे में कम्प्यूटर ट्रेनिंग सेंटर भी शुरू करवाया। भाईसाहब ने यहां एक लाइब्रेरी भी बनवाई, जहां हर तरह की किताबों का कलेक्शन है।'

फार्महाउस से निकलकर हम गांव की तरफ गए। एक गोशाला के पास पहुंचे तो पता चला इसका निर्माण भी धनखड़ करा रहे हैं। गोशाला में मौजूद ब्रजलाल योगी ने बताया कि फरवरी में धनखड़ यहां आए थे। तब उन्होंने गोशाला में एक बड़ा और पक्का चारा भंडार, चारदीवारी, गेट और कुछ दूसरा निर्माण करने की बात कही थी। इसके तुरंत बाद काम शुरू करवा दिया।

रात की ठंडी रोटी और दही के साथ करते हैं ब्रेकफास्ट
महिपाल ने बताया कि वे कई सालों से साहब (जगदीप धनखड़) के पास हैं। धनखड़ भले ही सुप्रीम कोर्ट के बड़े वकील, मंत्री और बंगाल के गवर्नर बन गए, लेकिन वो आज भी सादगी से जीते हैं। उनकी दिनचर्या और खाने-पीने का रुटीन फिक्स रहता है। हर हाल में वो रोजाना 5 बजे जाग जाते हैं। इसके बाद योग और व्यायाम करते है। फिर नहाकर ठाकुरजी की पूजा करते हैं।

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कई सालों से यही खाते हुए देख रहा हूं। दोपहर के भोजन में चपाती और सब्जी खाते हैं। वहीं शाम को खिचड़ी या दलिया खाते हैं। भाभीजी के हाथ का चूरमा भी उन्हें बेहद पसंद है।

हवेली जिसमें बनाई, पहले चुनाव की रणनीति
गांव के बीचों-बीच धनखड़ की पुश्तैनी हवेली है। यहीं उनका, दोनों भाई कुलदीप, रणदीप और बहन इंद्रा का जन्म हुआ था। साल 1989 में जब धनखड़ ने झुंझुनूं से पहला चुनाव लड़ा तब इसी हवेली में रहकर वो पूरी चुनावी रणनीति बनाते थे।

बाहर प्रकाश धनखड़ नाम का युवक मिला, वो हमें हवेली दिखाने ले गया। हवेली खंडहर हो चुकी है, बाहर चारों तरफ घास-फूस और झाड़ का जाल था।

प्रकाश ने बताया कि जगदीप धनखड़ के ताऊ हरीबक्ष चौधरी कई साल तक सरपंच रहे थे। उनकी कई गांवों में बढ़िया पैठ थी। धनखड़ के पिता गोकुलराम चौधरी भी रेलवे में बड़े ठेकेदार थे। प्रकाश ने बताया कि धनखड़ का बचपन यहीं गुजरा। माता-पिता केसरदेवी और गोकुलराम चौधरी ने ज्यादातर समय इसी हवेली में बिताया था। अब कई सालों से यहां कोई नहीं रहता है।

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गांव में हों तो दिन में दो बार इस मंदिर में लगाते हैं धोक
हवेली से निकलकर एक गली में ठाकुर जी का बड़ा मंदिर है। धनखड़ अपनी मां केसर देवी के साथ यहां बचपन में रोज आते थे। पुजारी सज्जनदास ने बताया कि आज भी जब वो गांव में होते हैं तो दिन में दो बार इस मंदिर में आते हैं और यहां घंटों अकेले बैठे रहते हैं। गांव से निकलते हैं तो ठाकुरजी के दर्शन करके ही निकलते हैं।

यह वह मंदिर है जहां जगदीप धनखड़ गांव आने पर कई घंटे बैठते हैं। गांव से बाहर जाने पर इसी मंदिर में दर्शन कर निकलते हैं।
यह वह मंदिर है जहां जगदीप धनखड़ गांव आने पर कई घंटे बैठते हैं। गांव से बाहर जाने पर इसी मंदिर में दर्शन कर निकलते हैं।

गांव से करीब 3 किलोमीटर दूर धनखड़ के पुश्तैनी खेत हैं। यहां करीब 60 बीघा के खेत में जोजोबा की खेती की हुई है। साल 2012 में धनखड़ ने यहां जोजोबा के 9,500 पौधे लगाए थे। महिपाल ने बताया कि भाईसाहब खेती पर भी पूरा ध्यान देते हैं।

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