आतंकी साजिश में सक्रिय राजस्थान के कई मौलाना:कन्हैयालाल मर्डर से लेकर करौली-जोधपुर के दंगों में आया नाम, जकात के नाम पर फंडिंग

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: मनीष व्यास

रामनवमी पर राजस्थान के करौली में भड़की हिंसा, जोधपुर में ईद-अक्षय तृतीया पर दंगे और उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल का सिर कलम कर हत्या। इन सभी मामलों में एक संगठन का नाम बार-बार आता रहा है। वो है- PFI यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)।

अब नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) गुरुवार सुबह से 10 राज्यों में PFI के कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। इससे जुड़े कई मौलाना और स्कॉलर रडार पर हैं। टेरर फंडिंग केस में हो रही इस कार्रवाई के तहत अब तक देशभर से संगठन से जुड़े 100 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जयपुर, उदयपुर, कोटा व बारां में PFI से जुड़े लोगों पर NIA रेड चल रही है। राजस्थान में 2 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

पिछले कुछ समय से राजस्थान में भी PFI की जड़ें काफी गहरी हुई हैं। राजस्थान में इसके सबसे ज्यादा एक्टिव वर्कर्स हैं। ऐसा सूत्रों का कहना है। यहां कई मुस्लिम स्कॉलर्स और मौलाना PFI से जुड़े हुए हैं। इसी साल फरवरी महीने में कर्नाटक में भड़के हिजाब विवाद को लेकर कोटा में बड़ी रैली निकाली गई थी। अजमेर दरगाह के अंजुमन सैयद जादगान सचिव सैयद सरवर चिश्ती का भी कई मौकों पर PFI कनेक्शन सामने आ चुका है।

भास्कर ने बताया था पीएफआई की फंडिंग पर एनआईए की नजर
करीब दो महीने पहले दैनिक भास्कर ने बताया था कि राजस्थान में पीएफआई के तीन लाख फैमिली खातों में विदेशों से करीब 500 करोड़ रुपए आ रहे हैं और इस फंडिंग पर एनआईए की एंटी टेरर विंग की नजर है।(पढ़िए पूरी खबर)

इसके साथ ही भास्कर ने यह भी बताया था कि राजस्थान आतंक का सॉफ्ट टारगेट बन रहा है और यहां ऑनलाइन दंगों का सिलेबस पढ़ाया जा रहा है। (पढ़िए पूरी खबर)

पढ़िए राजस्थान में एक्टिव PFI का A TO Z .....

राजस्थान की इन घटनाओं में सामने आया PFI का टेरर कनेक्शन

करौली : 2 अप्रैल को करौली में हिंदू नववर्ष के मौके पर दंगे भड़के। उपद्रव में 1 मकान और 35 दुकानें जला दी गईं। इसमें 45 लोग घायल हुए थे, जिसमें 5 पुलिसकर्मी शामिल थे। 30 से ज्यादा बाइक तोड़ दी गई थीं।

पड़ताल में सामने आया कि करौली के पार्षद मतलूब अहमद के इशारे पर ये दंगे हुए थे। इसमें PFI के हाथ होने की भी बात सामने आई थी। इस घटना के बाद सिलसिलेवार ढंग से 15 दिनों के अंदर देश के 9 राज्यों में 10 मौकों पर सांप्रदायिक हिंसा हुई। इनकी क्रोनोलॉजी में सामने आया कि ये सभी घटनाएं एक ही तरह से हुई थीं।

जोधपुर : 3 मई को जोधपुर में अक्षय तृतीया के दिन झंडा विवाद हुआ और देखते ही देखते पूरे शहर में दंगे शुरू हो गए। घरों और दुकानों में तेजाब और पेट्रोल की बोतले फेंकी गईं। जमकर पत्थरबाजी की गई।

मारपीट और हमलों में कई लोग घायल हो गए। पड़ताल में सामने आया कि झंडा विवाद से लेकर शहर में आतंक मचाने वाले बाहर से आए थे। उनका साथ स्थानीय कट्‌टरपंथियों ने दिया। यहां भी पड़ताल में PFI का हाथ सामने आया।

भीलवाड़ा : जोधपुर दंगों के अगले दिन 4 मई को भीलवाड़ा को सुलगाने की तैयारी शुरू हुई। यहां सांगानेर में 4 मई की रात को करबला के पास बैठे समुदाय विशेष के दो युवकों पर नौ लोगों ने हमला कर दिया। दोनों से जमकर मारपीट की और उनकी बाइक जला दी। इसके बाद 10 मई की रात 11 बजे आदर्श नाम के युवक के सीने में चाकू मार कुछ लड़कों ने हत्या कर दी।

अगले दिन एग्जाम देकर लौट रहे स्टूडेंट्स पर चाक़ू से हमले किए गए और उन्हें घायल कर दिया गया। इन तीनों ही घटनाओं में आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि वो दंगा भड़काना चाहते थे। हालांकि अब तक इन मामलों में PFI का सीधा कनेक्शन नजर नहीं आया है। सिलसिलेवार टाइमिंग से हुई इन घटनाओं ने भी जांच एजेंसियों को इस एंगल पर सोचने पर मजबूर कर दिया।

उदयपुर : 28 जून को उदयपुर में टेलर कन्हैयालाल की तालिबानी तरीके से हत्या कर दी गई। इससे 10 दिन पहले उनके मोबाइल से नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट हुई थी। तभी से उन्हें धमकियां मिल रही थीं। रियाज और गौस मोहम्मद कपड़े का नाप देने के बहाने कन्हैयालाल की दुकान में आए और उन पर हमला कर दिया। उन पर धारदार हथियार से कई वार किए थे।

हत्यारों ने मर्डर के, उससे पहले और बाद के वीडियो भी बनाए और वायरल किया। इसके बाद जगह-जगह लोगों में आक्रोश फैला और पूरा प्रदेश आग के मुहाने पर आ गया। इस मामले में भी PFI से जुड़े लोगों का कनेक्शन सामने आया है।

16 साल पहले दक्षिण भारत से हुई शुरुआत
- साल 2006 में मनिथा नीति पसाराई (MNP) और नेशनल डेवलपमेंट फंड (NDF) नामक संगठन ने मिलकर पॉपुलर फ्रंट इंडिया (PFI) का गठन किया था। ये संगठन शुरुआत में दक्षिण भारत के राज्यों में ही सक्रिय था, लेकिन अब UP-बिहार समेत 23 राज्यों में इसका विस्तार हो चुका है।

- PFI का संगठित नेटवर्क है, जिसकी राजस्थान सहित देश के 20 से अधिक राज्यों में मौजूदगी है। PFI की एक राष्ट्रीय समिति भी है और राज्यों की अलग समितियां हैं। ग्राउंड लेवल पर इसके वर्कर हैं। PFI के अनुसार, समिति के सदस्य हर तीन साल में होने वाले चुनाव से चुने जाते हैं।

- 2009 में PFI ने अपने राजनीतिक दल SDPI (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) और छात्र संगठन CFI (कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया) का गठन किया था। दक्षिण भारत से उदय होने वाले PFI का हेडक्वार्टर फिलहाल दिल्ली में है।

- इस संगठन द्वारा PFI को एक्सपोज करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ केस भी लगातार दर्ज कराए जाते हैं। PFI ने साल 2020 तक ऐसे 1256 मामले दर्ज कराए थे, जिनमें से 34 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। ये आंकड़ा साल 2020 में PFI ने ही जारी किया।

- साल 2010 में केरल में प्रोफेसर जोसेफ पर एक प्रश्नपत्र में पूछे गए सवाल के जरिए पैगंबर मोहम्मद साहब के अपमान का आरोप लगा था। इसके बाद आरोप है कि PFI कार्यकर्ताओं ने प्रोफेसर जोसेफ के हाथ काट दिए थे।

प्रधानमंत्री के दौरे से पहले पकड़े गए थे कई आतंकवादी
11 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से एक दिन पहले शाम काे इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के इनपुट पर बिहार पुलिस ने पटना के नया टोला में छापेमारी कर कई आतंकियों को पकड़ा था। तब फुलवारी शरीफ के ASP मनीष कुमार ने बताया था कि पकड़े गए आतंकियों के पास 'इंडिया 2047' नाम का 7 पेज का डॉक्यूमेंट भी मिला था। इसमें दर्ज प्लान पर काम करते हुए वो अगले 25 साल में भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाना चाहते थे। इसी टारगेट को पूरा करने के लिए मुस्लिम युवाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। पकडे़ गए सभी आतंकी PFI और इसकी पॉलिटिकल विंग सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़े थे।

राजस्थान में बच्चों को आतंकी ट्रेनिंग देने का इनपुट:NIA-ED की जयपुर सहित 4 जिलों में रेड, PFI के दफ्तर से किताबें-दस्तावेज बरामद