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मारवाड़ में बदलेंगे समीकरण !:गहलोत का दबदबा, फिर भी 4 विधायक पायलट के समर्थन में; कांग्रेस के 20 विधायक अभी भी पार्टी के साथ

जोधपुर10 महीने पहले
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मारवाड़ में दो निर्दलीय विधायकों को मिलाकर कांग्रेस के 24 विधायक हैं। - Dainik Bhaskar
मारवाड़ में दो निर्दलीय विधायकों को मिलाकर कांग्रेस के 24 विधायक हैं।
  • राजस्थान की राजनीति में मारवाड़ के नेताओं का हमेशा से रहा है दबदबा, यहां से 24 विधायक कांग्रेस के
  • टिकट कटने और मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज नेताओं ने थामा पायलट का हाथ, फिर भी गहलोत का पलड़ा भारी

राजस्थान में जारी कई दिनों की राजनीतिक उठापटक के बाद कांग्रेस ने उप मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को बाहर का रास्ता दिखा दिया। पायलट अपने साथ मारवाड़ से कांग्रेस के चार विधायक भी अपने साथ ले उड़े हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी से बेदखली के बाद मारवाड़ की राजनीति में कुछ समीकरण तो बदलेंगे, लेकन ज्यादा प्रभाव नहीं होगा। 

मारवाड़ में गहलोत का पलड़ा भारी

मारवाड़ की राजनीति में गहलोत का वर्चस्व रहा है। मारवाड़ में कुल 42 विधानसभा सीट हैं और यहां के नेताओं का हमेशा से प्रदेश की राजनीति में दबदबा रहा है। चार विधायकों के पायलट से जुड़ने के बावजूद मारवाड़ में कांग्रेस की राजनीति में कोई बदलाव के आसार नहीं है।

इन चारों विधायकों में से सिर्फ एक हेमाराम चौधरी का बाड़मेर जिले में अच्छा प्रभाव माना जाता है। इस कारण वहां की स्थानीय राजनीति में कुछ हलचल देखने को मिल सकती है। जबकि नागौर से एक साथ दो विधायकों के पायलट से जुड़ने का असर जिले में कांग्रेस की राजनीति पर होगा। 

24 में से 20 विधायक अभी भी गहलोत के साथ

मारवाड़ में दो निर्दलीय विधायकों को मिलाकर कांग्रेस के 24 विधायक हैं। इसमें से चार को छोड़ शेष सभी गहलोत का साथ दे रहे हैं। जोधपुर में गहलोत के अलावा शेष छह अन्य विधायक पूरी तरह से गहलोत के साथ हैं। वहीं, जैसलमेर के दोनों विधायक भी गहलोत के नजदीकी माने जाते हैं।

इसी तरह बाड़मेर में हेमाराम के अलावा अन्य विधायक गहलोत से जुड़े हुए हैं। जबकि सिरोही के निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा शुरू से ही गहलोत के करीबी रहे हैं। वहीं जालोर से एकमात्र कांग्रेसी विधायक सुखराम विश्नोई मंत्री पद पर काबिज है। 

असंतुष्टों ने थामा पायलट का हाथ
मारवाड़ में वरिष्ठ कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी खुलकर गहलोत के विरोध में ताल ठोक सचिन खेमे से जा जुड़े थे। कभी गहलोत के नजदीकी रहे हेमाराम मंत्री पद नहीं मिलने के कारण नाराज चल रहे हैं। बाड़मेर जिले से एक जाट को मंत्री बनाना था। इस मुकाबले में राहुल गांधी के नजदीकी माने जाने वाले हरीश चौधरी ने बाजी मार ली। अब हेमाराम खुल कर गहलोत का विरोध कर रहे हैं।

इसी तरह नागौर जिले में कांग्रेस के 9 में से 2 विधायक सचिन खेमे में हैं। इसमें प्रदेश युवक कांग्रेस अध्यक्ष व लाडनूं विधायक मुकेश भाखर को शुरू से ही पायलट का समर्थक माना जाता रहा है। वहीं पर्बतसर के रामनिवास गंवारियां बाद में गहलोत विरोधी हो गए।

इसी तर्ज पर टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस बगावत कर पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले खुशवीर सिंह जोजावर को हमेशा से गहलोत का नजदीकी माना जाता रहा है। लेकिन कुछ दिनों से बदले हालात में खुशवीर ने गहलोत का साथ छोड़ पायलट से हाथ मिला लिया। 

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