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राजस्थान में बिजली कटौती में आएगी कमी:कोल इंडिया की कंपनियों से 80 हजार टन कोयला डिस्पैच किया गया; अब भी 1313 मेगावॉट की कमी रहेगी

जयपुर11 दिन पहले
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मुख्यमंत्री की बिजली-कोयला संकट पर रिव्यू मीटिंग। - Dainik Bhaskar
मुख्यमंत्री की बिजली-कोयला संकट पर रिव्यू मीटिंग।

कोयला और बिजली संकट से जूझ रहे राजस्थान के लिए अच्छी खबर है। कोयले की 20 रैक यानी करीब 80 हजार टन कोयला राजस्थान के लिए डिस्पैच करवाने में कामयाबी लगी है। इस कोयले की बड़ी खेप के आने से 1570 मेगावॉट तक और बिजली पैदा की जा सकेगी। इससे आम लोगों को बिजली कटौती से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

कोयला किल्लत के कारण राज्य में करीब 2883 मेगावॉट बिजली की कमी चल रही है। कोयले की किल्लत का सीधा असर प्रोडक्शन पर पड़ रहा है। एनर्जी डिपार्टमेंट के मुताबिक राज्य में 9317 मेगावॉट बिजली की उपलब्धता रही है। वहीं 10683 मेगावॉट की औसत मांग और 12200 मेगावॉट की अधिकतम औसत मांग रही है। अधिकतम औसत मांग में से उपलब्धता को घटाते हैं तो पता चलता है कि कि 2883 मेगावॉट बिजली की अभी भी कमी है। इसलिए डिमांड और सप्लाई के इस फर्क को खत्म करने के लिए रोस्टर के आधार पर फीडरों से बिजली कटौती की जा रही है। 1570 मेगावॉट बिजली प्रोडक्शन और होने पर हालात सुधरने की उम्मीद है। इसके बाद भी 1313 मेगावॉट बिजली की कमी रहेगी।

सूरतगढ़ थर्मल सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट।
सूरतगढ़ थर्मल सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट।

सीएम के निर्देश पर दिल्ली गए एसीएस ने की डील
मुख्यमंत्री गहलोत के निर्देशों पर दिल्ली गए एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल की कोयला मंत्रालय के सचिव के साथ ही कोल इंडिया और पीकेसीएल कोल ब्लॉक के मैनेजमेंट से बातचीत हुई। बातचीत में पॉजिटिव रिस्पॉन्स रहा है। अब लगातार यह प्रेशर मेंटेन रखा जाएगा कि राजस्थान को 20 रैक के करीब कोयला रोजाना मिलता रहे। डील के मुताबिक कोल इंडिया की सब्सिडियरी कंपनियां 8 रैक कोयला रोजाना देंगी। इसके अलावा राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और अडाणी ग्रुप की जॉइंट वेंचर की छत्तीसगढ़ में पारसा ईस्ट और कान्ता बासन कोल माइंस से 12 कोल रैक्स की सप्लाई डिस्पैच करवाई गई है। इस काम के लिए एसई और एक्सईएन लेवल के इंजीनियर अधिकारी वहां भेजे गए हैं। जो लगातार राजस्थान में एनर्जी सेक्रेटरी और विभाग के सीनियर अफसरों से कोऑर्डिनेट कर रहे हैं।

बीते हफ्ते 14 से 16 रैक कोयला रोज मिल पा रहा था
इससे पहले राजस्थान को बीते हफ्ते में 12 अक्टूबर तक 14 से 16 रैक ही मिल पा रही थीं। पीकेसीएल कंपनी से 9 रैक राज्य को मिल रही थीं। जिसमें 3 रैक की बढ़ोतरी हुई है। एनसीएल से 5 रैक और एसईसीएल से एक रैक मिल पाई थी। इन कोल इंडिया की सब्सिडियरी कंपनियों से अब 8 रैक मिलेंगी। यानी 3 रैक बढ़ाई गई हैं। इन एडिशनल 5 रैक के आने से 660-660 मेगावॉट की 2 यूनिट और 1 यूनिट 250 मेगावॉट की पावर प्लांट्स में शुरू की जा सकती है। यानी करीब 1570 मेगावॉट बिजली का प्रोडक्शन बढ़ सकता है। इससे मौजूदा बिजली संकट में काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

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