राजस्थान में जमकर बिजली कटौती, 5 पावर प्लांट यूनिट ठप:महंगा विदेशी कोयला खरीदने से हिचक रही सरकार, बढ़ेगा संकट

जयपुर9 महीने पहले

राजस्थान बिजली और कोयला संकट के बुरे दौर से गुजर रहा है। संकट से निपटने के लिए जमकर बिजली कटौती की जा रही है। राज्य में 5 सरकारी पावर प्लांट यूनिट ठप हैं। कोयले की कमी के चलते उन्हें ठीक कर जल्द चालू तक नहीं किया जा रहा है। दूसरी ओर सरकार केन्द्रीय गाइडलाइंस के मुताबिक महंगा विदेशी कोयला खरीदने से भी हिचक रही है। आगे मॉनसून पीरियड है। अभी कोयला स्टॉक मेंटेन नहीं किया तो आगे बिजली-कोयला संकट और बढ़ेगा।

कोयला मंत्रालय ने 25 अप्रैल को राज्यों को कुल अलॉट कोयले का 10 फीसदी विदेशों से इम्पोर्ट करने की एडवाइजरी जारी की थी। जिसे राजस्थान में अब तक फॉलो नहीं किया गया है। साथ ही केन्द्र ने 5 मई की देर रात से बिजली एक्ट की धारा 11 को भी लागू कर दिया है। जिसमें इम्पोर्टेड कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स को अब अपनी पूरी कैपेसिटी से बिजली जनरेट करनी ही होगी। इससे इम्पोर्टेड कोयले पर आधारित ज्यादा निजी पावर कम्पनियां और कैप्टिव पावर प्लांट पर असर पड़ेगा। राज्य की सरकारी पावर कंपनी राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड अब भी महंगा कोयला खरीदने से बच रही हैं।

कोयला रैक।
कोयला रैक।

विदेशी महंगा कोयला खरीदना मजबूरी, सोच में पड़ी सरकार

सूत्रों के मुताबिक विदेशी कोयला भारत के देशी कोयले के मुकाबले 3-4 गुणा ज्यादा महंगा पड़ रहा है। इम्पोर्टेड कोयला खरीदने के लिए डिस्कशन तो हो चुका है। लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। केन्द्र सरकार की एजेंसी CERC (सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन) के मार्केट इंडेक्स पर कोयले की कीमत निर्भर करेगी। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने राजस्थान को 9.66 लाख मीट्रिक टन विदेशी कोयला खरीदने के लिए कहा है। प्रदेश में अब तक 5.79 लाख मीट्रिक टन कोयला खरीदने पर ही चर्चा छेड़ी गई है।

भारत में लोकल माइंस से कोयला 5000 रुपए मीट्रिक टन रेट पर मिलता है। जबकि विदेशी कोल की रेट 20 से 22 हजार रुपए मीट्रिक टन तक है। राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को को 9.65 लाख मीट्रिक टन कोयला खरीद पर करीब 1500 से 1700 करोड़ रुपए तक खर्च करने होंगे। इतनी बड़ी रेट पर कोयला खरीदने से बिजली कम्पनी हिचक रही है। क्योंकि अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। सरकार जनता पर बहुत ज्यादा बढ़ाकर बिजली फ्यूल सरचार्ज नहीं डालना चाहती है। इस कारण RVUNL और प्रदेश सरकार दोनों सोच में पड़ गए हैं कि कितना कोयला खरीदा जाए और कब खरीदा जाए। लेकिन इससे प्रदेश में कोयला संकट गहराता जा रहा है।

कोयला स्टॉक में लगातार बनी हुई है कमी।
कोयला स्टॉक में लगातार बनी हुई है कमी।

26 के बजाय औसत 5 दिन का कोल स्टॉक बचा

कोयला संकट का सीधा असर यह पड़ रहा है कि राजस्थान में औसत 5 दिन का ही स्टॉक मौजूद है। यह हालात तब हैं जब 5 पावर प्लांट यूनिट बंद पड़ी हैं। इन्हें चालू किया तो यह स्टॉक भी नहीं बचेगा। प्रदेश में गाइडलाइंस के मुताबिक कोयला स्टॉक मेंटेन नहीं किया जा रहा है। कोटा थर्मल पावर स्टेशन पर 8 दिन, सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट पर 5 दिन, सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर स्टेशन की 7 और 8 नम्बर यूनिट पर 5 दिन, छबड़ा थर्मल पावर स्टेश पर 6 दिन, छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर स्टेशन पर 3 दिन, कालीसिंध थर्मल पावर स्टेशन पर 6 दिन का ही कोयला स्टॉक है। औसत 5 दिन का ही कोयला स्टॉक प्रदेश में है। जबकि गाइडलाइंस के मुताबिक 26 दिन का कोयला स्टॉक राजस्थान में होना चाहिए।

सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट।
सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट।

5 पावर प्लांट यूनिट्स ठप

प्रदेश में कई थर्मल पावर प्लांट यूनिट बंद पड़ी हैं। जिनमें कालीसिंध की 2 नम्बर की 600 मेगावाट यूनिट, छबड़ा की 4 नम्बर 210 मेगावाट यूनिट, सूरतगढ़ की 1 नम्बर की 250 मेगावाट और 3 नम्बर की 250 मेगावाट यूनिट, सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल 7 नम्बर की 660 मेगावाट यूनिट शामिल हैं।

बिजली की अधिकतम डिमांड 15401 मेगावाट तक पहुंची।
बिजली की अधिकतम डिमांड 15401 मेगावाट तक पहुंची।

बिजली डिमांड बढ़ी

राजस्थान में बिजली की अधिकतम डिमांड 15401 मेगावाट तक पहुंच गई है। जबकि सभी सोर्सेस से बिजली लेने और खरीद के बावजूद उपलब्धता 12895 तक ही पहुंच सकी है। 2516 मेगावाट बिजली अब भी कम पड़ रही है। बिजली खपत 30 करोड़ यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच चुकी है। जो पिछले साल 19.90 करोड़ यूनिट थी। 5 करोड़ यूनिट से ज्यादा रोजाना बिजली की कमी है। बिजली की डिमांड देशभर के राज्यों में इतनी ज्यादा है कि प्रदेश को 12 रुपए तक महंगी रेट पर भी जरूरत के मुताबिक पूरी बिजली नहीं मिल पा रही है। हालांकि इसलिए राज्य में सरप्लस पावर खरीदने की बजाय बिजली कटौती का सहारा लिया जा रहा है।

ग्रामीण एरिया में बिजली कटौती से लोग परेशान। प्रतीकात्मक तस्वीर।
ग्रामीण एरिया में बिजली कटौती से लोग परेशान। प्रतीकात्मक तस्वीर।

गांवों में 6 से 8 घंटे बिजली कटौती

सम्भागीय मुख्यालयों पर 1 घंटा, जिला मुख्यालयों पर 2 घंटा, नगरपालिका और 5 हजार से ज्यादा आबादी वाले कस्बों में 3 घंटा बिजली कटौती की जा रही है। इसके अलावा भी जमकर ग्रामीण क्षेत्र के फीडरों से बिजली कटौती हो रही है। किसानों को अब केवल 4 घंटे, 3 ब्लॉक में खेतीबाड़ी के लिए बिजली सप्लाई दी जा रही है। इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं पर शाम 6 से रात 10 बजे तक बिजली कंजंप्शन की 50 फीसदी तक तय लिमिट में बिजली दी जा रही है। इसके अलावा अनप्लांड शटडाउन, फीडर से लोड शेडिंग, फाल्ट और टेक्नीकल मेंटीनेंस के नाम पर भी बिजली कटौती हो रही है। कॉलोनियों, मोहल्लों में अलग-अलग इलाके वाइज बिजली कटौती से लोग परेशान हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ कोल माइंस में मॉनसून पीरियड में पानी भरने से माइनिंग होती है प्रभावित।
छत्तीसगढ़ कोल माइंस में मॉनसून पीरियड में पानी भरने से माइनिंग होती है प्रभावित।

आगे और बढ़ेगी दिक्कत

सूत्रों के मुताबिक राजस्थान को कम से कम अगले 3 महीने का कोयला स्टॉक रखने की जरूरत है। रेग्युलर कोयला सप्लाई के साथ छत्तीसगढ़ में आवंटित पारसा कोल माइंस और साथ ही आवंटित नई-पुराने माइंस ब्लॉक से जल्द से जल्द कोयला खनन कर प्रदेश में सप्लाई शुरु करवाने की जरूरत है। क्योंकि जून महीने के बाद मॉनसून पीरियड आ रहा है। पिछले साल की तरह फिर से कोयला माइंस एरिया में भारी बरसात हुई, तो कोल माइंस में पानी भरने से कोयला खनन का काम ठप पड़ सकता है। जिससे कोल सप्लाई घटेगी और बड़ा बिजली संकट पैदा हो सकता है।

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