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दिवाली पर राजस्थान में 1 घंटे की बिजली पड़ी कम:बाजार से खरीदकर देनी पड़ी करीब पौने 2 करोड़ की 60 लाख 39 हजार यूनिट,तब रोशन हुई दीपावली

जयपुर8 महीने पहलेलेखक: नीरज शर्मा
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कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट पर रोशनी का नजारा। - Dainik Bhaskar
कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट पर रोशनी का नजारा।

राजस्थान में दिवाली पर पूरे प्रदेश की डिमांड की 1 घंटे की बिजली कम पड़ गई। दिवाली के दिन बिजली कटौती नहीं करने के मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश थे, इसलिए 60 लाख 39 हजार यूनिट बिजली राजस्थान एनर्जी डवलपमेंट कॉर्पोरेशन (राजस्थान ऊर्जा विकास निगम) को बिजली एक्सचेंज के जरिए बाजार से खरीदनी पड़ी। जिसकी औसत रेट 2.87 रुपए यूनिट पड़ी है। इस हिसाब से 1 करोड़ 73 लाख 31 हजार 930 रुपए की बिजली खरीदनी पड़ी। अनुमान के मुताबिक प्रदेश में करीब 60 लाख यूनिट बिजली के अलग-अलग पावर प्लांट्स एक घंटे में पैदा करते हैं। लगभग 14 करोड़ 40 लाख यूनिट यूनिट बिजली 24 घंटे में पैदा होती है।

कालीसिन्ध थर्मल पावर प्लांट
कालीसिन्ध थर्मल पावर प्लांट

इंडस्ट्रियल लोड निल बराबर, घरेलू खपत बढ़ने से छूटे पसीने

प्रदेश में ये हालात तब हैं, जब दिवाली की छुट्‌टियों के कारण पूरा इंडस्ट्रियल लोड निल यानी ना के बराबर है। इंडस्ट्री और फैक्ट्रियों में छुट्‌टियां होने से काम बन्द रहा और बिजली खर्च नहीं हुई। इसके बावजूद घरों में इस्तेमाल होने वाली बिजली ने ही एनर्जी डवलपमेंट कॉर्पोरेशन और बिजली विभाग के पसीने छुड़ा दिए। बिजली की डिमांड पिछले एक हफ्ते में करीब 2 हजार मेगावॉट तक बढ़ गई है। जिस कारण बिजली उपलब्धता और डिमांड में फर्क बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में बिजली का प्रोडक्शन सीमित हैं,इस कारण अब रेग्युलर बिजली खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है।

दिवाली पर रोशनी से जगमग रहे जयपुर के बाजार
दिवाली पर रोशनी से जगमग रहे जयपुर के बाजार

हाईएस्ट डिमांड से 1989 मेगावाट बिजली कम पड़ी

दिवाली पर बिजली की हाईएस्ट डिमांड 12200 मेगावाट पहुंच गई,जबकि बिजली की उपलब्धता 10211 मेगावाट ही रही। 1989 मेगावाट बिजली हाईएस्ट डिमांड से कम उपलब्ध होने के कारण एक्सचेंज से बिजली खरीदकर प्रदेश में सप्लाई देनी पड़ी। इस तरह मैनेजमेंट से प्रदेश में काम चलाना पड़ रहा है। खुद के बिजली प्रोडक्शन को बढ़ाकर सेल्फ डिपेंडेंट बनने की बजाय जितनी बिजली कम पड़ती है, उतनी खरीद कर ही पिछले कुछ समय से प्रदेश में सप्लाई की जा रही है। इससे ऑल इज वेल नजर आ रहा है।

दिवाली से सप्ताह भर पहले बिजली की पीक ऑवर्स में हाईएस्ट डिमांड 10500 से 10870 मेगावाट तक थी। जो अब बढ़कर 12 हजार मेगावाट से 12200 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। हालांकि दिवाली पर दिनभर की कुल औसत डिमांड 9118 मेगावाट ही रही,जोकि उपलब्धता से कम है। लेकिन पीक आवर्स में ज्यादा डिमांड होने पर पूरा गणित गड़बड़ा जाता है। बिजली को बड़ी मात्रा में स्टोर भी नहीं किया जा सकता है। खुदका पूरा प्रोडक्शन नहीं होने पर बिजली एक्सचेंज से खरीदना या बिजली कटौती करना, ये दो ही रास्ते बचते हैं।

बिजली सब-स्टेशन,जयपुर
बिजली सब-स्टेशन,जयपुर

ट्रांसमिशन लॉसेज,बिजली चोरी,ओल्ड प्लांट्स मशीनरी मेंे खपत ज्यादा

मौजूदा बिजली प्रोडक्शन में कमी का बड़ा कारण कोयले की किल्लत और टेक्नीकल फेलियोर के कारण कई बिजली प्लांट बंद होने के अलावा ट्रांसमिशन लॉसेज का बहुत ज्यादा होना भी है। सूत्रों के मुताबिक ट्रांसमिशन लॉसेज को 25 फीसदी से घटाकर 17 से 20 फीसदी तक लाया गया है। बिजली के डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम में ट्रांसमिट के दौरान बिजली की छीजत और चोरी हो जाती है। बिजली विभाग के सूत्र ये भी बताते हैं कि जो पावर प्लांट बिजली पैदा करते हैं वो खुद ही 10 फीसदी बिजली खपा जाते हैं। पुराने पावर प्लांट्स की मशीनरी अपग्रेड नहीं होने से उनमें ज्यादा बिजली खपत होती है। कई जगह ग्रामीण इलाकों में बिजली चोरी भी काफी ज्यादा है।

राजस्थान में करीब 1.52 करोड़ हैं बिजली कन्ज्युमर्स

राजस्थान में करीब 1.52 करोड़ बिजली के कंज्युमर्स हैं। जिनमें से सबसे ज्यादा 1.20 करोड़ केवल घरेलू कंज्युमर्स हैं। जबकि कॉमर्शियल 14 लाख,इंडस्ट्रियल 3.54 लाख,एग्रीकल्चर के 14.41 लाख के करीब बिजली कनेक्शन हैं। ऐसे में इंडस्ट्री बंद होने पर भी सबसे ज्यादा बिजली का लोड घरेलू कनेक्शन्स ही उठाते हैं।

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