बाढ़ में डूबे 'राणा प्रताप सागर' में फिर बनी बिजली:चम्बल की बाढ़ में डूबा था पन-बिजलीघर, इंजीनियरों ने 4 में से 1 यूनिट चलाई

जयपुरएक वर्ष पहले
बाढ़ में डूबे 'राणा प्रताप सागर' में फिर बनी बिजली।

राजस्थान और मध्यप्रदेश की चम्बल नदी घाटी परियोजना के तहत बने राणा प्रताप सागर बांध से फिर से बिजली प्रोडक्शन शुरू हो गया है। पानी की ताकत से चलने वाले बिजली घर की यूनिट 1 को चालू कर बिजली प्रोडक्शन शुरू कर दिया गया है। पूरी कैपिसिटी में चलने पर इस यूनिट से रोजाना 10.32 लाख यूनिट बिजली बनेगी।

राणा प्रताप सागर बिजली घर
राणा प्रताप सागर बिजली घर

2019 की बाढ़ में डूब गया था पन-बिजलीघर

मॉनसून के दौरान 14 सितम्बर 2019 को भीषण बाढ़ में पन बिजलीघर की चारों यूनिट्स पूरी तरह पानी में डूब गई थीं। 51 साल पुरानी इन यूनिट्स से फिर बिजली प्रोडक्शन के लिए सरकार ने स्कीम चलाई। राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के इंजीनियर्स ने मरम्मत कर यूनिट 1 से बिजली प्रोडक्शन शुरू करने में कामयाबी हासिल की है।

राणा प्रताप सागर बिजलीघर की यूनिट्स
राणा प्रताप सागर बिजलीघर की यूनिट्स

यूनिट 4 से भी जल्द बिजली प्रोडक्शन शुरू होगा

राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर आर.के. शर्मा ने पन-बिजली घर के सभी इंजीनियर्स और कर्मचारियों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने जल्द ही इस बिजली घर की यूनिट नम्बर 4 से भी बिजली प्रोडक्शन शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही यूनिट 4 से भी प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा। इसके बाद बाकी यूनिट्स पर भी काम होगा।

1 नम्बर यूनिट शुरू
1 नम्बर यूनिट शुरू

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1968 में किया था उद्घाटन

साल 1968 में चम्बल नदी पर बने राज्य के राणा प्रताप सागर बांध पर 43 मेगावाट की 4 यूनिट लगाकर 172 मेगावाट कैपिसिटी के पन-बिजलीघर का उद्घाटन तब प्रधानमंत्री रहीं इन्दिरा गांधी ने किया था। साल 1968 के बाद से इस बिजलीघर से 2365 करोड़ यूनिट की सबसे सस्ती और पर्यावरण फ्रेंडली ग्रीन एनर्जी का प्रोडक्शन किया जा चुका है। इस बांध की सबसे बड़ी खासियत है कि यह डैम सर्वाधित क्षमता का बांध है। इसकी भराव क्षमता 352.81 आरएल मीटर है।

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