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R.A.S के नए मायने:राजस्थान में असंभव भी संभव, जाेधपुर में सफलता की आशा, सड़कों पर झाड़ू लगाने वाली अब आरएएस

जाेधपुर21 दिन पहलेलेखक: राजेश त्रिवेदी
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जाेधपुर में सफलता की आशा, सड़कों पर झाड़ू लगाने वाली अब आरएएस - Dainik Bhaskar
जाेधपुर में सफलता की आशा, सड़कों पर झाड़ू लगाने वाली अब आरएएस
  • आरएएस 2018- इंटरव्यू के रिजल्ट के बाद प्रदेश को जल्द मिलेंगे 1051 अफसर, आरपीएससी 10 दिन में भेजेगा नियुक्ति अनुशंसा

​​​​यह जिदभरी आशा की कहानी है। जोधपुर की सड़कों पर झाड़ू लगाने वाली निगम कर्मचारी आशा कंडारा का चयन आरएएस-2018 में हुआ है। आठ साल पहले पति से अनबन के बाद दो बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभाते हुए आशा ने पहले ग्रेजुएशन की। अब आरएएस क्लियर की। परीक्षा के 12 दिन बाद ही उसकी नियुक्ति सफाई कर्मचारी के पद हुई थी। हालांकि नतीजों के लिए दो साल इंतजार करना पड़ा। इस दौरान सड़कों पर झाड़ू लगाया, पर हिम्मत नहीं हारी।

आरएएस में चयनित होने के बाद वह बहुत ही खुश हैं। उसने बताया कि उसने ठान लिया था कि अफसर बनने के लिए कठिन परिश्रम भी क्यों नहीं करना पड़े। उसने बताया कि परीक्षा देने के बाद उसे भरोसा था कि उसका सलेक्शन जरूर होगा। आरएएस में चयनित आशा कंडारा के जीवन की कहानी मुश्किल भरी हैं।

उसने बताया कि वर्ष 1997 में उसकी शादी हुई, लेकिन पांच साल बाद पति ने उसे छोड़ दिया। पति से अलग होते ही उसने सोच लिया कि जिंदगी में कुछ करके दिखाना हैं। एकाउंटेट सेवा से रिटायर्ड पिता राजेंद्र कंडारा की पुत्री आशा ने कठिन परिस्थियों में मेहनत कर वर्ष 2016 में ग्रेजुएशन की।

ग्रेजुएशन करने के एक साल बाद उसका पति से विधिवत तलाक हो गया। विपरित परिस्थियों के बावजूद उसने वर्ष 2018 में सफाई कर्मचारी भर्ती की परीक्षा दी। इसके साथ ही आरएएस प्री परीक्षा की तैयारी के लिए दिन-रात पढाई की। इसके लिए ऑनलाइन पढ़ाई के साथ कोचिंग क्लास भी जाइन की। अगस्त में प्री की परीक्षा दी, अक्टूबर में परिणाम घोषित हुआ तो पास होते ही आरएएस मैन्स की तैयारी में जुट गई।

26 जून 2019 को परीक्षा दी, इसके 12 दिन बाद ही सफाई कर्मचारी के पद पर नियुक्ति का पत्र आया। उसने ज्वाइंनिग दी। उसे पावटा की मुख्य सड़क पर सफाई के लिए बनाई सफाई गैंग में लगाया, लेकिन मुख्य सड़क पर झाड़ू लगाने में भी नहीं हिचकिचाई। जब मंगलवार को आरएएस में चयन हुआ तो उसे इतनी खुशी हुई, मानाे उसका सपना साकार हो गया।

हनुमानगढ़: 3 बहनें एक साथ आरएएस बनीं, स्कूल जाकर सिर्फ 5वीं तक पढ़ा

आरएएस सिस्टर्स : R-रीतू, A-अंशु, S-सुमन
आरएएस सिस्टर्स : R-रीतू, A-अंशु, S-सुमन

भजनलाल सुथार. जाखड़ांवाली (हनुमानगढ़) | की रावतसर तहसील के भैरूसरी में 3 बहनों ने इतिहास रचा। किसान परिवार की 3 बहनों बेटियां रीतू, सुमन और अंशु सहारण का एकसाथ आरएएस-2018 में चयन हुआ है। इनकी दो बहनें पहले से सरकारी सेवा में हैं।

सबसे बड़ी बहन मंजू का चयन 2012 में सहकारिता विभाग में हुआ, जबकि रोमा का आरएएस में 2011 में हो चुका है। अब अंशु ने ओबीसी गर्ल्स में 31, रीतू ने 96 और सुमन ने 98वीं रैंक हासिल की है। पांचों बहनों ने स्कूल जाकर सिर्फ 5वीं तक पढ़ा। इसके बाद पीएचडी तक की पढ़ाई प्राइवेट ही की।

अलवर : दृ़ष्टिबाधित कुलदीप जैनम ने कानूनी लड़ाई से हासिल किया मुकाम

गिरीश शर्मा | उदयपुर

ये हैं अलवर के 29 वर्षीय दृष्टिबाधित कुलदीप जैनम। इन्होंने आरएएस-2018 के दृष्टिहीन वर्ग में 14वीं रैंक हासिल की है। लेकिन इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। दरअसल, 5 अगस्त 2018 को आरएएस प्री हुए। कुलदीप को श्रुति लेखक की सहायता लेनी थी। नियमानुसार वह अपना श्रुति लेखक चुन सकता है, लेकिन आरपीएससी ने इसे खारिज कर दिया। परीक्षा के दिन कुलदीप को जो श्रुति लेखक दिया गया, वह न ताे सही प्रश्न पढ़ सका और न जवाबों को ओएमआर शीट में भरने में दक्ष था।

कुलदीप प्री में फेल हो गए। कुलदीप ने उदयपुर के दृष्टिबाधित मित्र अली असगर बोहरा की सलाह पर हाईकोर्ट में याचिका लगाई। सिंगल बेंच ने याचिका खारिज की तो डबल बेंच में गए। तब कोर्ट ने मेन्स से 25 दिन पहले कुलदीप को मेन्स में बैठने की मंजूदी दी। कहा- यदि वह मेन्स में सफल हो तो प्री में भी सफल माना जाए। मंगलवार को जारी परिणामों में कुलदीप का भी चयन हाे गया। कुलदीप की 3 बड़ी बहनें हैं। सबकी शादी हो चुकी है।
वह माता-पिता के इकलौते सहारे हैं।

72 वर्षीय पिता नरेंद्र कुमार जैमन बिजली निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। 66 वर्षीय मां प्रमिला की देखभाल का जिम्मा भी कुलपति निभा रहे हैं। कुलपति का कहना है कि मेरा सपना आईएएस है, जिसकी तैयारी जारी रखूंगा।

सुपर 35 : राजसमंद में 62 अभ्यर्थियों को कोचिंग दी, पहली बार में ही 35 सफल

हेमंत दाधीच | राजसमंद

आरएएस के परिणाम में ‘विजयी भव योजना’ ने चौंकाने वाले रिजल्ट दिए हैं। राजसमंद में शुरू की गई इस योजना से जुड़े प्रदेश के 62 में 35 अभ्यर्थियों का आरएएस के लिए चयन हुआ है। पहली बार में ही 57% रिजल्ट दिया। विजयी भव योजना की शुरुआत राजसमंद जिला परिषद के एसीईओ डाॅ. दिनेश राय सापेला ने पिछले वर्ष सितंबर में की थी। योजना केवल उदयपुर संभाग के अभ्यर्थियों के लिए शुरू की थी, लेकिन बाद में प्रदेश भर से 62 अभ्यर्थी जुड़ गए। आरएएस परिणाम के टॉप 100 में 8, टीएसपी में टॉप 50 में से 5 व टॉप 500 में 17 अभ्यर्थी विजयी भव से जुड़े हुए हैं।

योजना के तहत अभ्यर्थियों को नि:शुल्क ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया। शिक्षक भी प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टर, एसपी थे। मॉक इंटरव्यू ऑफलाइन व ऑनलाइन कर प्रशिक्षण दिया गया। उदयपुर के सर्वाधिक 12, राजसमंद के 7, जोधपुर, चित्तौड़ के 4-4, अलवर, गंगानगर के 2-2 और बांसवाड़ा, झुंझुंनू, जालोर, जयपुर के 1 अभ्यर्थी का चयन हुआ।

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