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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:राजस्थान सरकार ने 50 दिनों में जिन 25 जिलों में 3,918 कोरोना मौतें बताईं, उनके सिर्फ 512 गांव-ब्लॉक से उठीं 14,482 अर्थियां

जयपुर2 महीने पहले
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राजस्थान में भी पूरे कोरोनाकाल में मरीजों और मौतों के सरकारी आंकड़े संदेह के घेरे में रहे हैं। क्योंकि ये जमीनी हकीकत से बहुत दूर हैं। राज्य सरकार ने 1 अप्रैल से 20 मई तक जिन 25 ग्रामीण जिलों में काेरोना से 3,918 मौतें मानी हैं, भास्कर की पड़ताल में उन्हीं जिलों के महज 512 गांवों-ब्लॉक में इस दौरान 14,482 अंतिम संस्कार हुए हैं।

सामान्य दिनों में यहां डेढ़ महीने में औसतन 7 गुना कम 2,705 मौतें होती हैं। इसलिए गांवों में मौतों का यह आंकड़ा सामान्य नहीं कहा जा सकता। गांव में कोराेना प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार नहीं हो रहे, लेकिन इनमें ज्यादातर कोरोना के ही मरीज थे।

बूंदी जिले के 42 गांवों में ही इस दौरान 314 मौतें हुईं। लेकिन सरकारी आंकड़ों में पूरे जिले में 18 मौतें दर्ज हैं। सबसे ज्यादा 3,034 गांवों वाले श्रीगंगानगर में 48 मौतें बताई गईं, जबकि यहां के 28 गांवों में ही 50 दिन में 517 अर्थियां उठ गई हैं।

श्मशान से आंकड़े जुटाए सरपंच से भी क्रॉस चेक किए
भास्कर के 28 ब्यूरो प्रमुख, 46 रिपोर्टर्स ने श्मशान से आंकड़े जुटाने के अलावा गांव-गांव जाकर लोगों से डेढ़ महीने में मौतों की पड़ताल की। लोगों ने जो आंकड़े बताए, उन्हें सरपंच, ग्राम पंचायत या जनप्रतिनिधि से क्रॉस चेक किया गया। गांव वालों को यह शिकायत भी है कि महामारी के इस दौर में भी गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान नहीं दिया गया।

9 मई को अपर्णा सुशांता (50) ने कोरोना की वजह से दम तोड़ दिया। बेटे दिनेश ने अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।
9 मई को अपर्णा सुशांता (50) ने कोरोना की वजह से दम तोड़ दिया। बेटे दिनेश ने अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।

साथी आए न रिश्तेदार, शव वाहन भी नसीब नहीं
झालावाड़ के सुनेल में 9 मई को अपर्णा सुशांता (50) की घर पर ही कोरोनो से मौत हो गई। बेटे दिनेश ने पुलिस, अस्पताल और प्रशासन से प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगी। लेकिन कोई नहीं आया तो दोनों भाई PPE किट पहनकर शव को ठेले से श्मशान ले गए और अतिम संस्कार किया।

खाली सिलेंडर से ही ऑक्सीजन मास्क लगाया, दम घुटने से मौत
दौसा के हापावास ग्राम पंचायत के बंदड़ी गांव में 90 साल की गोरादेवी की मौत हुई थी। परिजन अंत्येष्टि में लगे थे। इस बीच बेटे शिवराम मीणा (50) की जिला अस्पताल में ऑक्सीजन न मिलने से मौत हो गई। परिजन के बार-बार गुहार करने पर चिकित्साकर्मियों ने खाली सिलेंडर का ऑक्सीजन मास्क लगा दिया था। ऐसे में दम घुटने से उसकी मौत हो गई।

विलासपुर में दाे सगे भाई हरनेक सिंह (42) और सुबेक सिंह (37) एक ही दिन कोरोना की वजह से मौत हो गई।
विलासपुर में दाे सगे भाई हरनेक सिंह (42) और सुबेक सिंह (37) एक ही दिन कोरोना की वजह से मौत हो गई।

अलवर: आधे घंटे में ही दो वेब डिजाइनर भाइयों ने दम तोड़ा
अलवर के विलासपुर में दाे सगे भाई हरनेक सिंह (42) और सुबेक सिंह (37) आधे घंटे में ही दुनिया छोड़ गए। दोनों दिल्ली और गुरुग्राम में वेब डिजायनर थे। कोरोना से बचने के लिए गांव से वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे। गांव में सख्ती ज्यादा नहीं थी। इसलिए दोनों संक्रमित हो गए थे। हरनेक की 4 साल की और सुबेक की 2 साल की बेटी है।

चौमू में 50 अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी का स्टॉक रखा लेकिन 20 दिन में हो गया खत्म
चौमूं के मोरीजा रोड स्थित श्मशान भूमि में लकड़ियों की व्यवस्था एक समिति करती है। यह समिति 50 से ज्यादा अंत्येष्टि के लिए व्यवस्था करके रखती है,लेकिन समिति के सदस्यों ने अप्रैल में श्मशान भूमि जाकर लकड़ियों की स्थिति ही नहीं देखी। उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि अप्रैल के 20 दिनों में 50 शवाें को अंतिम संस्कार हो जाएगा। नतीजा यह हुआ कि लकड़ियां ही खत्म हो गईं। फिर कोविड संक्रमित शव को लाने पर लकड़ियां नहीं मिलीं।

परिवार तबाह, 2 महीने में 3 भाई नहीं रहे
देवली में आवां के चंदेल परिवार में कोरोना से दो भाइयों की पांच दिन के अंदर मौत हो गई। पहले छोटे भाई श्रवण कुमार चंदेल (45) की और पांच दिन बाद ही बडे भाई किशन लाल (55) की जान चली गई। इस दौरान बड़े भाई के दोनों बेटे भी कोरोना पॉजिटिव थे और उनका इलाज जयपुर में चला। उधर सबसे छोटे भाई सागर (35) की करीब दो महीने पहले जयपुर में हत्या कर दी गई थी। इस तरह पूरा परिवार ही तबाह हो गया।

अजमेर: केसरपुरा में 10 दिन में 15 मौतें, लोगों ने टीके लगवाने से मना किया
अजमेर जिले की मसूदा पंचायत समिति के केसरपुरा गांव में लोगों ने बेतुकी शर्त रख दी कि टीकाकरण से पहले लिखकर दो कि टीका लगवाने के बाद मौत नहीं होगी। इसकी वजह यह थी कि अप्रैल के 10 दिनों में इस गांव में 15 लोगों के मौतें हो चुकी थीं। बाद में चिकित्सा विभाग काफी मशक्कत करने के बाद भी यहां सिर्फ एक महिला को ही वैक्सीन लगवा पाया है।

जोधपुर के भावी में 1 महीने में 40 मौतें, श्मशान में शहरों की तरह लाइनें लगीं
जोधपुर के पीपाड़ के पास भावी गांव में प्रशासन और सरकार के इंतजामों की बजाय अब लोग भगवान पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। लगातार वैक्सीनेशन और दवाई के बावजूद मौतों का सिलसिला यहां थम नहीं रहा। भावी गांव में पिछले एक महीने में करीब चालीस मौतें हो चुकी हैं। एक चिता ठंडी होती नहीं कि उससे पहले ही दूसरी अर्थी श्मशान घाट पर पहुंच जाती है।

हनुमानगढ़: एक अप्रैल से 20 मई तक हनुमानगढ़ में सरकारी आंकड़ों में कोविड से सिर्फ 27 मौतों बताई गई हैं, जबकि यहां की कल्याण भूमि और कब्रिस्तान में 643 लोगों का अंतिम संस्कार दर्ज हो चुका है। भादरा ब्लॉक में घोषित 24 की तुलना में 125, पीलीबंगा ब्लॉक में 34 की तुलना में 45, संगरिया ब्लॉक में 5 की तुलना में 40 मौतें हुई हैं। नोहर ब्लॉक में सरकार ने 34 मौतें बताईं, जबकि यहां 80 लोगों की जान जा चुकी है। इसी तरह रावतसर ब्लॉक में 15 की तुलना में 25 मौतें, टिब्बी ब्लॉक में 17 की तुलना में 30 मौतें होने की जानकारी मिली है।

अजमेर: जिले में कुल 141 मौतें बताई गई हैं, जबकि 1,123 गांवों वाले इस जिले के सिर्फ 17 गांवों में ही 78 मौतें हुई हैं। बांदरसिंदरी में 11, गणेशपुरा में एक, खातोलाई में 2, नलु में 2, मुण्डोती में 8, नोहरिया में 2, पाटन में 6, पेडीभाटा में 2, चुरली में 5, तोलामाल में 4, चुदंडी में 5, डिड़वाडा में 12, खड़ाच में 5 और टिहरी में 13 मौतें हुई हैं।

जालोर: जिले में सरकार ने 18 मौतें ही बताईं, जबकि यहां के सिर्फ 42 गांवों में ही 190 लोगों की अंत्येष्टि की गई। धामसीन में 13, धानोल में 10, सिंगावास में 13, पादरली में 18, बागरा में 21, उम्मेदपुर में 7, डोडियाली में 5, हाडेचा में 11, आमली में 14, करड़ा में 20 और सांचौर (32 पंचायतों में) में 58 मौतें हुई हैं।

दौसा: सरकार ने मात्र 25 मौतें घोषित कीं, जबकि 5 ब्लॉक के घरों से ही 1,376 शव निकल चुके हैं। दौसा ब्लॉक में 362, बांदीकुई में 450, लालसोट में 204, महवा में 220, सिकराय में 140 मौतें हुईं हैं।

चूरू: सरकार ने मात्र 33 मौतें ही बताईं जबकि सिर्फ 12 जगहों पर ही 1,459 मौतें हुईं हैं। रतनगढ़ में 500, सुजानगढ़ में 294, सरदारशहर में 235, तारानगर में 95, बीदासर में 87, सादुलपुर में 83, छापर में 53, सालासर/शोभासर में 41, राजलदेसर में 32, सिद्धमुख में 20 और साहवा में 19 मौतें हो चुकी हैं।

सवाई माधोपुर: जिले में कोरोना से मात्र 23 मौतें बताई गईं, जबकि 4 जगहों पर ही 332 शवों का अंतिम संस्कार किया गया है। ऐसी ही स्थति अन्य 19 जिलों में भी है, जहां घोषणा की तुलना में कई-कई गुना ज्यादा मौतें हुई हैं।

मंत्री ने कहा- मौतों का आकलन करवा रहे
कोरोना से मौतों को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा, 'हमने पहली 4,262 मौतों का ग्रामीण और शहरी इलाकों में आकलन करवाया। इसमें से 1,331 मौतें यानी 31.20% ग्रामीण क्षेत्रों में हुई। अब तक कुल 7,806 मौतों का एनालिसिस करवा रहे हैं कि एक महीने में कितनी मौतें गांवों में और कितनी शहरों में हुईं।

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