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...तो माउंट आबू गुजरात और सिरोही बंबई का हिस्सा होता:संविधान सभा में 'ग्रेटर गुजरात' के मुद्दे पर हुआ था विवाद, अछूतों के हकों की पैरवी

जयपुर8 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी

देश का संविधान बनाने वाली संविधान सभा में राजस्थान से 12 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इनमें से आधे सदस्य ही बहस में बोले थे। संविधान सभा में सबसे ज्यादा विवाद ग्रेटर गुजरात के नारा और सिरोही को बंबई प्रांत में और आबू को गुजरात को देने के मुद्दे पर हुआ था। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे जय नारायण व्यास अछूतों को मंदिर प्रवेश का अधिकार नहीं देने पर नाराज हुए थे।

गुजरात का मुद्दा उस समय भी उठा था। मेवाड़ के नेता माणिक्यलाल वर्मा ने तो यहां तक कह दिया था कि ग्रेटर गुजरात का नारा पूरे देश में जहर फैलाएगा। वर्मा ने आबू को गुजरात को देने का विरोध किया तो राजस्थान के नेताओं पर तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल नाराज हो गए।

संविधान सभा में भरतपुर के बाबू राजबहादुर सबसे मुखर प्रतिनिधियों में थे। बाबू राज बहादुर राजस्थान के प्रतिनिधियों में सबसे ज्यादा संविधान सभा की बहस में बोलने वाले नेताओं में शामिल थे। संविधान सभा की बहस में राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने का मुद्दा भी उठा था जो आज तक जस का तस है।अब तक इसे मान्यता नहीं मिली है।

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माणिक्यलाल वर्मा ने कहा था- "ग्रेटर गुजरात" का नारा पूरे देश में अपना जहर फैलाएगा
उदयपुर के प्रतिनिधि माणिक्यलाल वर्मा ने संविधान सभा में कहा था- आबू का गुजरात में विलय कर दिया है। हम कांग्रेस के अनुशासन में बंधे होने के कारण इस पर सवाल नहीं उठा सकते। मैं आज इस संबंध में एक चेतावनी नोट कराना चाहूंगा। आबू को गुजरात में मिला दिया गया है और कल बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर और अन्य जगहों के साथ भी यही होगा। गुजरातियों द्वारा उठाया गया "ग्रेटर गुजरात" का नारा निश्चित रूप से पूरे देश में अपना जहर फैलाएगा। यह प्रवृत्ति बहुत गलत है और राज्य को कमजोर करेगी। यदि आप इस मामले में न्याय करना चाहते हैं, तो आपको पंजाब, बंगाल और महाराष्ट्र के सदस्यों से मिलकर एक आयोग नियुक्त करना चाहिए, जो इस सवाल पर फैसला देगा कि आबू राजस्थान का है या गुजरात का। आयोग के निर्णय के आधार पर भारत सरकार जो चाहे वह कर सकती है और हमें उस पर कोई आपत्ति नहीं होगी।

बीकानेर के प्रतिनिधि ने कहा था- आपके नेता शासकों, जागीरदारों को गाली देते हैं
बीकानेर के प्रतिनिधि जसवंत सिंह ने 13 अक्टूबर 1949 को संविधान सभा में कहा था - हमने पिछले छह महीनों में राजस्थान में मंत्रालय के कामकाज को देखा है। मंत्री विभिन्न स्थानों का दौरा करते रहे हैं। वे आते हैं और जन सभाओं को संबोधित करते हैं। वे शासकों और जागीरदारों को गाली देते हैं। इसके अलावा वे कोई खास काम नहीं करते हैं।

रियासतों में लाइब्रेरी, स्कूल खोलने और अखबार पर थी पाबंदी
संविधान सभा की बहस में जयनारायण व्यास ने आजादी के वक्त कई देसी राज्यों में लगे प्रतिबंधों का जिक्र किया। व्यास ने कहा कि रियासतों के साथ कठिनाई यह थी कि रियासतों के लोगों को अवसर नहीं दिया जाता था। राज्यों में लाइब्रेरी खोलने पर प्रतिबंध है। यह एक सच्चाई है। स्कूल, बोर्डिंग-हाउस खोलने पर भी प्रतिबंध थे। जिन लोगों के लिए स्कूल, पुस्तकालय, बोर्डिंग हाउस खोलने, समाचार पत्र पढ़ने और संचालित करने पर प्रतिबंध है, उनके लिए दुनिया के तरीकों को समझना बहुत मुश्किल है। जब से 1927 में स्टेट्स पीपुल्स कॉन्फ्रेंस बनाई गई थी, तब से भारतीय राज्यों में बहुत जागृति आई है और लोग अब पहले जैसे नहीं थे।

हमने जोधपुर को बंगाल नहीं बनने दिया
जयनारायण व्यास ने कहा था- अकाल के वक्त हमने जोधपुर को बंगाल नहीं बनने दिया। हमने लोगों को बचाया, उन पर बहुत पैसा खर्च किया। हमने उन पर बहुत पैसा खर्च किया। जो लोग सोचते हैं कि हम लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से बहुत आगे नहीं हो सकते हैं, वे महसूस करेंगे कि मानवीय दृष्टिकोण से राज्य कई प्रांतों से बहुत आगे है। मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि अवसर मिलने पर हम उस संस्कृति और उस मानवता को बनाए रखेंगे जिसे हमने तब बरकरार रखा था जब प्रांत शायद इन चीजों को भूल गए थे।

जब मंत्रियों के लिए आचार संहिता लागू करने का मुद्दा छिड़ा
9 नवंबर 1948 को संविधान सभा में राजस्थान के सबसे मुखर सदस्य भरतपुर के बाबू राजबहादुर ने मंत्रियों के आचरण पर सवाल उठाए थे। संविधान सभ में बाबू राजबहादुर ने कहा था हमारे मंत्री अपने जीवन में गांधीवादी आदर्शों का पालन नहीं कर रहे हैं। वे हवाई जहाजों से यात्रा कर रहे हैं। आलीशान घरों में रह रहे हैं। इसलिए मुझे लगता है कि संविधान में हमारे मंत्रियों के लिए एक आचार संहिता देने का प्रावधान होना चाहिए।

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