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गजेंद्र सिंह शेखावत बोले-गहलोत ने ERCP को बनाया राजनीतिक हथियार:13 जिलों के जनहितों से किया पाप, गंगा नहाने से भी मुक्ति नहीं मिलेगी

जयपुर3 महीने पहले
गजेंद्र सिंह शेखावत बोले-गहलोत ने ERCP को बनाया राजनीतिक हथियार  - Dainik Bhaskar
गजेंद्र सिंह शेखावत बोले-गहलोत ने ERCP को बनाया राजनीतिक हथियार 

केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा- ईस्टर्न राजस्थान नहर परियोजना राजस्थान का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। लेकिन गहलोत सरकार ERCP को राजनीतिक हथियार के रूप में काम में लेना चाहती है। इसे लेकर राजस्थान में भ्रम पैदा करने का काम राजस्थान सरकार और CM गहलोत ने किया है। राजस्थान की 13 जिलों की जनता के हितों के साथ गहलोत ने पाप किया है। वो चाहे गंगा नदी में स्नान कर लें या कहीं और जाकर नहा आएं इस पाप से उन्हें मुक्ति नहीं मिल सकती है। गहलोत सरकार ने इस मामले को लटकाने की कोशिश की है और झूठ बोला है। बार-बार राजस्थान सरकार और गहलोत कहते हैं कि मध्यप्रदेश से इस प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृति लेने की जरूरत नहीं है। जबकि जरूरत क्यों है, यह हमने बताया है। 13 जिलों के बीजेपी के जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में इस मसले पर चर्चा की है।

मध्यप्रदेश के कांग्रेस-बीजेपी सरकारों के CM जता चुके आपत्ति

शेखावत ने कहा जनवरी 2020 में मध्यप्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पत्र लिखकर अशोक गहलोत को आपत्ति जताई और भारत सरकार को कॉपी भेजी। जिसमें राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच जल बंटवारे का समझौता नियमों के खिलाफ बताया। कहा-इस पर हमारी भारी आपत्ति है। इसे तुरंत 75 फीसदी वाटर डिपेंडेबल बनाकर रिप्लान करके भारत सराकर को डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा कराई जाए। तब तक इस पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा जाए। इसके बाद 2022 में वहीं आपत्ति बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी दर्ज कराई है। इसके बीच सीडब्ल्यूसी और एमपी सरकार कई बार आपत्ति दर्ज करवा चुके हैं।

गहलोत सरकार प्रोजेक्ट क्लीयरेंस के 4 में से 1 भी पॉइंट को पूरा नहीं कर पाई

केन्द्रीय मंत्री ने कहा ERCP बनाने के लिए पहले उसका टेक्नीकल अप्रैजल और अप्रूवल होता है। फायनेंशियल रूप से इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस होती है। उसके बाद उसकी स्टैट्युटरी क्लीयरेंस ली जाती है। फिर वन विभाग से पर्यावरण स्वीकृति होती है। वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट अपनी क्लीयरेंस देता है। फिर कैबिनेट उसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देती है। इन चार में से 1 भी पॉइंट राजस्थान सरकार अब तक पूरा नहीं कर पाई है। अपनी नाकामियों का ठीकरा केन्द्र सरकार पर फोड़ने की कोशिश लगातार कर रही है। हम तो तैयार बैठे हैं कि राजस्थान सरकार इन कंडीशंस को कम्प्लाय करके लेकर आए। हम तुरंत राजस्थान के करोड़ों लोगों के हित में इसे राष्ट्रीय परियोजना या उससे आगे बढ़कर कैसे फंडिंग होगी उस पर काम करना चाहते हैं।

बीजेपी जनप्रतिनिधि और नेता लोगों को सच्चाई बताएंगे

शेखावत ने कहा पूर्वी राजस्थान के लिए यह प्रोजेक्ट बहुत महत्वपूर्ण है। इन 13 जिलों में प्रदेश की 40 फीसदी आबादी रहती है। राष्ट्रीय परियोजना में फंडिंग पैटर्न 60 फीसदी भारत सरकार और 40 फीसदी राजस्थान का है। उससे आगे बढ़कर ERCP को और ज्यादा फंडिंग कैसे केन्द्र से मिल सकती है इस पर चर्चा की है। मामले की हकीकत बीजेपी के जनप्रतिनिधि और नेता नीचे धरातल तक लोगों को सच्चाई बताएंगे। मैं चाहता हूं कि इस पर और चर्चा हो। तकनीकि जानकारी रखने वाले भी इस पर चर्चा करें।

मध्यप्रदेश के हितों पर हमला होगा,तो कोर्ट के दरवाजे खुले हैं

राजस्थान सरकार अपने स्तर पर ERCP प्रोजेक्ट को बजट दे चुकी है। CM गहलोत ने यहां तक कहा है कि हम अपने स्तर पर प्रोजेक्ट को पूरा कराने में जुटे हैं। इस पर शेखावत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं इसे लेकर राजस्थान सरकार की मंशा पर टिप्पणी नहीं करना चाहता हूँ। लेकिन इंटर स्टेट ही रिवर प्रोजेक्ट बनता है। पूरे देश में 92 फीसदी नदियां इंटर स्टेट रिवर हैं। उन पर कोई भी प्रदेश खुद अपना प्रोजेक्ट बनाकर पूरा कर ले, मैंने तो इसका एक भी उदाहरण अब तक देखा नहीं है। अगर राजस्थान सरकार ने इसे अपने स्तर पर बनाने की कोशिश की। तो मध्यप्रदेश के हितों पर कुठाराघात होगा, निश्चित ही मध्यप्रदेश के पास में भारत के न्यायालयों के दरवाजे खुले हैं। वो जाकर इस पर अपनी आपत्ति दर्ज करवाएगा। इसके लिए वो स्वतंत्र हैं। भारत में लीगल और संवैधानिक व्यवस्थाएं इसके लिए बनी हुई हैं।

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