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किसान संसद में 7वें वेतनमान की तरह MSP की मांग:3 कृषि कानून रद्द करने का रखा प्रस्ताव, लेकिन किसानों की संसद से टिकैत की दूरी पर उठे सवाल

जयपुर12 दिन पहले
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किसान संसद - Dainik Bhaskar
किसान संसद

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर जयपुर में किसान संसद की बैठक हुई। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बुलाई गई किसानों की इस संसद में 7वें वेतनमान की तरह ही एमएसपी को लागू करने की मांग रखी गई। किसान संसद में केन्द्र सरकार की ओर से लागू किए गए 3 कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव भी लाया गया। जयपुर के बाद अब देश के हर ज़िले और फिर गांव लेवल पर किसान संसद करने का ऐलान भी कर दिया गया है। लेकिन किसान संसद के नाम पर बुलाए गए इस सम्मेलन में किसान आंदोलन का देश में नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और नेता राकेश टिकैत शामिल नहीं हुए। जिस से इस किसान संसद में गुटबाज़ी की चर्चाओं के साथ बड़े सवाल खड़े हो गए।

जयपुर के उप जिला प्रमुख मोहन डागर
जयपुर के उप जिला प्रमुख मोहन डागर

एमएसपी पर फसल खरीद के लिए बने कानून

जयपुर के उप ज़िला प्रमुख मोहन डागर ने किसान संसद में कहा कि 7 वां पे कमीशन लागू हो चुका है। लेकिन पूरे देश में एमएसपी के नाम पर किसानों को गुमराह किया जा रहा है। ऐसी कोई काउंटिंग नहीं है कि किस तरह एमएसपी लागू की जा रही है। देश में एमएसपी पर आज तक खरीद नहीं की गई है। डागर ने कहा मैं किसान संसद के माध्यम से कहना चाहूँगा कि तीनों काले कृषि कानून रद्द हों। जिस तरह सातवां वेतनमान लागू हुआ है, उस तरह नियमों के साथ लीगली और लोकसभा में एक्ट के साथ एमएसपी डिसाइड हो। एमएसपी कानून पर ही फसलों की खरीद सुनिश्चित हो,तभी ये देश तरक्की के रास्ते पर जा सकता है।

किसान संसद के आयोजक हिम्मत सिंह गुर्जर
किसान संसद के आयोजक हिम्मत सिंह गुर्जर

हर ज़िले और गांव तक करेंगे किसान संसद

किसान मोर्चा राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष हिम्मत सिंह गुर्जर जयपुर में इस किसान संसद के आयोजक रहे। जिन्होंने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि संसद में बैठे जिन नेताओं ने काले कानून पास किए हैं। हम उन्हें दिखाना चाहते हैं कि संसद ऐसे चलती है। वह नियम के हिसाब से संसद चलती है। बिना चर्चा किए और बिना मोशन लाए जो काले कानून सरकार ने किसानों पर थोपे हैं, उन्हें हम रिजेक्ट करते हैं। देश का किसान यह बता रहा है कि संसद कैसे चलती है और नियम कायदे क्या हैं। तीनों काले कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर हम हर ज़िले और गांव तक इस किसान संसद को लेकर जाएंगे।

कई राज्यों के किसान नेता हुए किसान संसद में शामिल
कई राज्यों के किसान नेता हुए किसान संसद में शामिल

3 केन्द्रीय कृषि कानूनों को रद्द करने का रखा प्रस्ताव

जयपुर के बिड़ला ऑडोटोरियम में हुई किसान संसद में कई पड़ोसी राज्यों और राजस्थान के कई ज़िलों से किसान नेता शामिल हुए। इस सम्मेलन में केंद्र सरकार के 3 कृषि कानूनों और एमएसपी पर चर्चा के बाद इसके खिलाफ प्रस्ताव लाया गया और तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग उठाई गई। इसके अलावा महंगाई, निजीकरण और किसान हित के दूसरे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। संसद नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इसमें उसी तर्ज पर प्रश्नकाल और शून्यकाल भी रखे गए। साथ ही केन्द्र सरकार को यह संदेश दिया गया कि संसद इस तरह चर्चा के साथ चलाई जाती है।

किसान नेता राकेश टिकैत के नहीं आने से उठे सवाल
किसान नेता राकेश टिकैत के नहीं आने से उठे सवाल

राकेश टिकैत के नहीं आने पर सवाल

हालांकि किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत इस किसान संसद में शामिल होने नहीं आए। जिसकी काफी चर्चाएं रहीं। लेकिन उनके अलावा किसान नेता बलवीर राजेवाल, गुरनाम सिंह चढ़ूनी, जोगिन्दर सिंह उगरहा, बूटा सिंह बुर्जगिल, डॉ दर्शन पाल, सुरेश खोत,अभिमन्यु कोहाड़,मनजीत सिंह राय, सुरजीत सिंह फूल,रूल्दू सिंह मानसा, जीकेएस संगठन से रणजीत सिंह राजू, गुजरात से पाटीदार नेता दिनेश बामणिया, धार्मिक मालवीय, संजय रैबारी, मध्यप्रदेश से महेन्द्र सिंह पाटीदार,नरेन्द्र सिंह पाटीदार समेत संयुक्त मोर्चे के 9 में से 6 सदस्य इसमें मौजूद रहे।

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