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कृष्ण जन्माष्टमी:कारी अंधियारी रात में भयो लड्डू-गोपाल, 12 बजते ही सोशल डिस्टेंस के साथ जन्मोत्सव मना; झालर-घंटे की नाद और जय कन्हैया लाल के जयकारों से शहर गूंज उठा

भरतपुर/ मथुराएक महीने पहले
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भरतपुर। किला स्थित बिहारीजी मंदिर में भगवान का यमुना जल से अभिषेक किया गया। अभिषेक के लिए मथुरा से यमुना जी का जल विशेष तौर पर मंगाया गया।
  • मन ही बन गए मंदिर और घर गोकुल-वृंदावन, यमुना जल से बांकेबिहारी जी का स्नान और बारिश ने धोए चरण

(प्रमोद कल्याण)। भादों की अष्टमी। काली अंधियारी रात। कड़कड़ाती बिजली और घनघोर बारिश। करीब 5000 साल पहले कुछ ऐसा ही माहौल था, जब कंस के कारागार में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अवतार लिया। रात्रि में जब वासुदेव जी उन्हें गोकुल लेकर गए तो भगवान के चरण धोने के लिए यमुना जी इस कदर व्याकुल थीं कि लहरें वासुदेव जी के मुंह से भी ऊपर पहुंच रही थीं। बुधवार को जन्माष्टमी की रात भी कुछ ऐसा ही माहौल था।

इस बार यमुना जी में भले ही बाढ नहीं है लेकिन, इंद्रदेव पूरी तरह मेहरबान थे। अंधियारी रात। घनघोर घटाएं और तेज बारिश के बीच आधी रात को कंस कारागार के साथ-साथ हर घर में योगेश्वर कृष्ण ने जन्म लिया। भले ही यमुना जी ने पैर नहीं पखारे (धोए) हों। लेकिन, बारिश ने उनके पैर धोए। मथुरा श्रीकृष्ण जन्म भूमि, द्वारकाधीश, वृंदावन और भरतपुर के किला स्थित बांकेबिहारी जी, राधारमण जी समेत तमाम मंदिर कोरोना संक्रमण की वजह से भक्तों के लिए बंद थे लेकिन, बृजवासियों ने मन को मंदिर और घरों को गोकुल एवं वृंदावन बना लिए।

भरतपुर। बांके बिहारी मंदिर मैं अभिषेक के बाद झांकी सजाई गई।
भरतपुर। बांके बिहारी मंदिर मैं अभिषेक के बाद झांकी सजाई गई।

जन्माष्टमी पर्व का ऐसा उल्लास और माहौल रहा कि कहीं महसूस ही नहीं हुआ कि कोरोना संक्रमण काल का कोई असर भी है। चूंकि सभी को पहले ही पता था कि इस बार मंदिर नहीं खुलेंगे इसलिए अल सुबह से कान्हा के लिए व्रत रखने के साथ घर में ही बच्चों और महिलाओं ने मंदिरों का सजाना शुरू कर दिया था। भव्य श्रृंगार से ठाकुर जी ऐसी मनोहारी छवि निखर कर आई कि आशंका होती थी कि कहीं नजर न लग जाए। शहर की गलियों और मोहल्लों में बने मंदिरों में उतनी बंदिशें नहीं थीं।

छोटे मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं से आबाद रहे
भरतपुर में बुध की हाट, मथुरा गेट, पुराना डाक खाना, वासन गेट समेत तमाम मोहल्लों के छोटे-छोटे मंदिरों में उत्साह और उल्लास था। भले ही संख्या कम हो। लेकिन, ये मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं से आबाद थे।
ज्योतिषाचार्य पंडित राम भरोसी भारद्वाज ने बताया कि पिछले वर्षों के मुकाबले लोगों ने इस बार घर को ही मंदिर मानकर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव ज्यादा उत्साह से मनाया। छोटे मंदिरों में लोगों ने ज्यादा भागीदारी की। क्योंकि जीवन को उल्लास से जीने की बृजवासियों की फितरत है। इसीलिए 7 वार 9 त्यौहार की कहावत बनी है।

मथुरा श्री कृष्ण जन्म स्थल मंदिर में भले ही श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं रहा लेकिन मंदिर में भव्य सजावट की गई।
मथुरा श्री कृष्ण जन्म स्थल मंदिर में भले ही श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं रहा लेकिन मंदिर में भव्य सजावट की गई।

सोशल डिस्टेंस के साथ रात 12 बजे जन्मोत्सव मना। झालर-घंटे की नाद और हाथी-घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की जयकारों से शहर गूंज उठा। कुछ जगहों से रात को भगवान के जन्म और आरती का सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण भी किया गया।

20 लाख के बिके लड्डू गोपाल और श्रृंगार सामग्री
बुधवार को जन्माष्टमी पर अधिकांश लोगों ने घरों में ठाकुर जी को अच्छी तरह से सजाया। इसलिए पोषाक कारोबार में एकाएक तेजी आई। कारोबारी संजय गुप्ता कहते हैं कि कोरोना के कारण लग रहा था कि इस बार मंदी रहेगी। लेकिन, लोगों के उत्साह ने मंदी को दरकिनार कर दिया। लड्डू गोपाल, हिंडोला, पोशाक, मुकुट, कुंडल, माला, तिलक, अंखियन, मंजीर, बांसुरी, फूल बंगला, घंटी, झालर, पूजा थाली, ठाकुरजी के कूलर, एसी, मच्छरदानी सहित बच्चों की श्रीकृष्ण पोशाक के काराेबार ने आर्थिक सन्नाटे को तोड़ दिया। विक्रेता ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि दो दिन में करीब 20 लाख रुपए से ज्यादा का कारोबार होने का अनुमान है।

यमुना जल से किया अभिषेक

भरतपुर में किला स्थित बिहारीजी मंदिर में अभिषेक के लिए मथुरा से यमुना जी का जल विशेष तौर पर मंगाया गया। महंत मनोज भारद्वाज के सानिध्य में 5 वेद पाठियों ने वेद मंत्रों का सस्वर उच्चारण कर यमुना जल और पंचामृत से ठाकुरजी का अभिषेक किया। उन्हें मिंगीपाग, मालपुए और पंजीरी का भोग लगाया गया। राधारमण मंदिर में दोपहर को जन्मोत्सव अभिषेक हुआ। कमेटी उपाध्यक्ष मोहनलाल मित्तल ने बताया कि पंडित वीरेंद्र शर्मा एवं प्रेमी शर्मा ने 11 किलो पंचामृत से अभिषेक किया। कोरोना संक्रमण के डर से पहली बार पंचामृत और प्रसादी का वितरण नहीं हुआ।

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