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उदयपुर:लक्ष्मी विलास का डिस-इंवेस्टमेंट गलत, कलेक्टर ने कब्जे में ली, 252 कराेड़ की हाेटल 7.5 कराेड़ में बेचने का मामला

जोधपुर10 दिन पहले
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उदयपुर का लक्ष्मी विलास होटल-फाइल।
  • पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी सहित 5 के खिलाफ मुकदमे का आदेश
  • आदेश : आरोपियों ने सरकार को नुकसान पहुंचाया : कोर्ट

उदयपुर के बेशकीमती लक्ष्मी विलास होटल के डिस-इन्वेस्टमेंट काे सीबीआई कोर्ट ने आखिर गलत मान लिया है। कोर्ट ने बुधवार को आदेश जारी कर कहा कि इस होटल को षड्यंत्र पूर्वक अपराध की बुनियाद पर हासिल किया गया था, इसलिए भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 18-क में कुर्क किया जाना चाहिए। कलेक्टर काे रिसीवर नियुक्त कर आदेश की तहरीर भी हाथोहाथ भिजवा दी। आदेश मिलते ही उदयपुर कलेक्टर चेतन देवड़ा ने होटल काे राज्य सरकार के कब्जे में ले लिया।

करीब 252 करोड़ के इस होटल का डिस-इन्वेस्टमेंट महज 7.50 करोड़ रुपए में एनडीए की पूर्ववर्ती सरकार में विनिवेश मंत्री रहे अरुण शौरी के समय हुआ था। साल 2014 में यूपीए सरकार के वक्त इसकी सीबीआई जांच हुई, जिसमें भ्रष्टाचार मानते हुए पूर्व विनिवेश मंत्री शौरी, सचिव प्रदीप बैजल, पर्यटन सचिव रवि विनय झा, फाइनेंशियल एडवाइजर आशीष गुहा, निजी वैल्यूअर कंपनी कांति करमसे और भारत होटल्स लिमिटेड प्रतिनिधि ज्योत्सना सूरी पर केस दर्ज किया गया था।

फिर केंद्र में एनडीए की सरकार आ गई और सीबीआई का रवैया बदल गया। सीबीआई ने पहले जिन साक्ष्यों पर 243.46 करोड़ का घोटाला माना था, पांच साल बाद उसी सीबीआई को न तो कोई आपराधिक साजिश दिखी और न ही किसी की मिलीभगत।

सब कुछ नियमानुसार मानकर सीबीआई ने अगस्त, 2019 में क्लोजर रिपोर्ट लगा केस बंद करने का फैसला ले लिया। परंतु सीबीआई के स्पेशल जज पूरण कुमार शर्मा क्लाेजर रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने उच्च स्तर के अफसर से फिर से जांच कराने के आदेश दे दिए। दोबारा जांच रिपोर्ट पेश हुई और बुधवार को कोर्ट ने होटल संपत्ति काे कुर्क करने के आदेश दे दिए।

आदेश : आरोपियों ने सरकार को नुकसान पहुंचाया : कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की ही जांच में पहले जमीन की कीमत 193 करोड़ और अन्य संपत्ति की कीमत 58 करोड़ रुपए मानी थी। यानि कुल 252 करोड़ के होटल को महज 7.52 करोड़ में बेचना युक्तिसंगत नहीं है। इसमें पद का दुरुपयोग करते हुए सरकार को सदोष हानि व भारत होटल को लाभ पहुंचाया गया है।

इन आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 व 120 बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में अपराध बनना पाया जाता है। इसलिए फौजदारी मुकदमा दर्ज हो और सभी आरोपी गिरफ्तारी वारंट से तलब हो। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 18 क में कुर्की की कार्रवाई की जाकर राज्य सरकार के अधीन कर देना चाहिए। कोर्ट ने कलेक्टर को रिसीवर नियुक्त किया तथा उन्हें अपने निर्देशन में होटल का संचालन किसी दूसरी होटल संस्था से कराने और हर तीन महीने का हिसाब-किताब कोर्ट में पेश करने को कहा है।

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