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  • Loss Of Life, 55 Injured In 24 Districts Due To Lightning, Flood Waters; The Chief Minister Held A Review Meeting And Instructed To Send A Quick Report Of The Loss, The Situation Of The Kota Division

मानसून के 68 दिन में 80 की मौत:बूंदी में सबसे ज्यादा 16 और जयपुर में 15 लोगों ने दम तोड़ा; बिजली गिरने, बाढ़ में बहने और दीवार गिरने से गई हैं जानें

जयपुर4 महीने पहले

राजस्थान में इस साल मानसून सीजन (जून, जुलाई और अगस्त) में अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा 16 लोगों की मौत बूंदी जिले में हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक कर बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी ली। इसी दौरान इसका खुलासा हुआ। आपदा राहत प्रबंधन के प्रमुख शासन सचिव आनंद कुमार ने बताया कि इस पूरे मानसून (करीब 68 दिन) में बिजली गिरने, बारिश के पानी में बहने सहित अन्य प्राकृतिक आपदा से 80 लोगों की जान चली गई है। 55 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। उन्होंने बताया पिछले दिनों कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़ और सवाई माधोपुर में हुई तेज बारिश से नुकसान का आकलन कराया जा रहा है।

25 फीसदी तक फसल खराब होने की आशंका
कोटा संभाग में हुई बाढ़ के कारण कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ के कुछ जिलों में फसल के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। कोटा जिले के कई गांव के खेतों में पानी भर गया है। सबसे ज्यादा सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई है। बूंदी, बारां जिला प्रशासन और कोटा प्रशासन की ओर से 5 से 25 फीसदी तक फसल बर्बाद होने की आशंका जताई जा रही है।

बूंदी के केशवारायपाटन क्षेत्र में मकान गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई थी। (फाइल फोटो)
बूंदी के केशवारायपाटन क्षेत्र में मकान गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई थी। (फाइल फोटो)

CM गहलाेत ने मांगी रिपोर्ट
मुख्यमंत्री गहलोत ने आपदा राहत प्रबंधन के प्रमुख शासन सचिव को जल्द से जल्द बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करके उसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के लिए कहा, ताकि इसका प्रस्ताव तैयार करके मुआवजे के लिए केन्द्र सरकार को भेजा जाए।

जयपुर में 11 जुलाई की रात आमेर के सामने वाच टावर पर बिजली गिरने से 11 लोगों की मौत हो गई थी।
जयपुर में 11 जुलाई की रात आमेर के सामने वाच टावर पर बिजली गिरने से 11 लोगों की मौत हो गई थी।

कोटा कलेक्टर में दिखा आपदा प्रबंधन नियमों की जानकारी का अभाव
वीसी में कोटा कलेक्टर उज्जवल राठौड़ में आपदा राहत प्रबंधन के नियमों की जानकारी का अभाव दिखा। राठौड़ ने वीसी के दौरान मुख्यमंत्री से कहा कि बाढ़ग्रस्त लोगों के खाने के प्रबंधन के लिए इंदिरा रसोई से व्यवस्था कराने का प्रावधान करें, ताकि टेण्डर की प्रक्रिया से बचा जा सके। इस पर आपदा राहत प्रबंधन के प्रमुख शासन सचिव ने बीच में टोका। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान पहले से है। इसके लिए टेण्डर प्रक्रिया करने की जरूरत नहीं है। SDRF फंड में ये प्रावधान है कि जहां भी कहीं लोग प्राकृतिक आपदा में फंसते है, उनके लिए 7 दिन तक खाने का प्रबंधन कलेक्टर की अनुमति से किया जा सकता है। इसके लिए कलेक्टर को किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

कोटा में आई बाढ़ का पानी कई कॉलोनियों में भर गया था। सड़क पर चलने लगी थी नाव।
कोटा में आई बाढ़ का पानी कई कॉलोनियों में भर गया था। सड़क पर चलने लगी थी नाव।

इन जिलों में हुई इतनी मौत
कोटा 6, बूंदी 16, धौलपुर 3, जयपुर 15, सवाई माधोपुर 4, टोंक 8, जोधपुर, करौली, चित्तौड़गढ़, जोधपुर और उदयपुर में 3-3, बारां 2, भरतपुर, भीलवाड़ा में 2-2 और झालावाड़, डूंगरपुर, जैसलमेर, बांसवाड़ा, दौसा, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, अजमेर और अलवर में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है।

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