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कोरोना का एनालिसिस:राजस्थान में 14 महीने बाद कोरोना के सबसे कम केस, अब नए वैरिएंट डेल्टा प्लस के डर से पाबंदियां कुछ महीने जारी रहेगी

जयपुर16 दिन पहलेलेखक: दिनेश पालीवाल
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राजस्थान में कोरोना का संक्रमण अब कंट्रोल में आ गया है। अप्रैल-मई में आई दूसरी लहर ने जिस तरह कहर बरपाया था और हर रोज 15 से 18 हजार नए केस मिल रहे थे, इसके मुकाबले अब 100 से भी कम मरीज रोजाना आ रहे हैं। 6 जुलाई को प्रदेश में केवल 47 केस ही मिले, जो पिछले 14 माह में मिले केसों में सबसे कम है। पहली लहर का जनवरी-फरवरी में जब डाउनफॉल आया था, तब सरकार ने सभी गतिविधियों जैसे स्कूल, सिनेमा, शादी-समारोह को पूरी तरह अनलॉक कर दिया था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। वीकेंड और नाइट कर्फ्यू के अलावा स्कूल, कॉलेज, सिनेमाघर सहित कई संस्थाएं पूरी तरह बंद हैं और कई अन्य पाबंदियां हैं लागू हैं। इसके पीछे कारण काेराना के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस का डर है। एक्सपर्ट के अनुसार अभी कुछ समय तक पाबंदियां जारी रह सकती हैं।

पहली लहर के डाउनफॉल के एक माह में दूसरी लहर

पहली लहर के डाउनफॉल आने के बाद दूसरी लहर महज एक माह के अंतराल में ही आ गई थी, उसे देखकर सरकार और विशेषज्ञ मान कर चल रहे हैं कि काेरोना की तीसरी लहर जल्द आ सकती है। कई विशेषज्ञ और एजेंसियां ये मान रही हैं कि तीसरी लहर अगस्त-सितंबर में आ सकती है। ऐसे में उन्होंने इस तीसरी लहर के खतरे को कम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों के वैक्सीनेशन की जरूरत बताई है।

पहली लहर में यूं आया डाउनफॉल

तारीखकेस
19 दिसंबर989
22 दिसंबर807
31 दिसंबर689
2 जनवरी467
5 जनवरी397
12 जनवरी293
24 जनवरी167
31 जनवरी95
7 फरवरी75
16 फरवरी60
23 फरवरी76
25 फरवरी99

डेल्टा वैरिएंट ने मचाई थी तबाही

राजस्थान सहित देश के ज्यादातर राज्यों में अप्रैल-मई में कोरोना की दूसरी लहर के लिए नए वैरिएंट डेल्टा प्लस को जिम्मेदार माना गया। पहली लहर के बाद दूसरी लहर इतनी जल्दी आएगी, इसका अंदाजा भी किसी ने नहीं लगाया था और न ही ये अनुमान लगा पाए थे कि यह इतनी घातक होगी। यही कारण रहा कि इस बार दूसरी लहर में बुजुर्गों के साथ-साथ यंग एज ग्रुप के लोग भी इसकी चपेट में आए। पिछले दिनों अमेरिका के सबसे बड़े महामारी एक्सपर्ट एंथनी फौची ने भी डेल्टा वैरिएंट को ज्यादा खतरनाक माना है। फौची का कहना है कि कोरोना संक्रमण खत्म करने की कोशिशों पर डेल्टा वैरिएंट सबसे बड़ा खतरा है। उनका कहना है कि कोरोना के ओरिजिनल वैरिएंट के मुकाबले डेल्टा वैरिएंट काफी तेजी से फैलता है। इससे बीमारी की गंभीरता भी बढ़ जाती है।

8 अप्रैल 2020 को 40 मरीज मिले जो सबसे कम थे

राजस्थान में एक मार्च 2020 में कोरोना ने दस्तक दी थी। इटली से आए एक पर्यटक में कोरोना के लक्षण दिखने के बाद उसके सैंपल जांच के लिए भिजवाए गए थे, इसमें संक्रमण की पुष्टि हुई थी। हालांकि वह पर्यटक इलाज के बाद ठीक भी हो गया था, लेकिन अस्पताल से डिस्चार्ज होने के तीन दिन बाद ही उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद से मरीजों की संख्या बढ़ने लगी थी। कोरोना केसों के बढ़ने का सिलसिला नवंबर अंत तक चला था। 8 अप्रैल, 2020 को राजस्थान में 40 मरीज मिले थे, जो सबसे कम है।

नवंबर में आया था पहली लहर का पीक, फरवरी में डाउनफॉल के बाद सबकुछ कर दिया था अनलॉक

नवंबर में दीपावली बाद कोरोना के केसों में जबरदस्त बढ़ोतरी होने लगी। नवंबर के आखिरी 10 दिन के अंदर कोरोना के केसा 2500 से 3400 के बीच आने लगे थे। 24 नवंबर को सबसे ज्यादा 3314 केस आए थे, जो पहली लहर के सर्वाधिक एक दिवसीय केस थे। दिसंबर के पहले सप्ताह के बाद से केसाें में कमी आने लगी। दिसंबर 2020 से कोरोना केस कम होने लगे थे। जनवरी से सरकार ने पाबंदियों में ढील देनी शुरू कर दी थी। फरवरी में केसों की संख्या वापस 100 से कम आने लग गई थी। तब राज्य सरकार ने स्कूल, सिनेमाघर, शादी समारोह सभी तमाम गतिविधियों पर लगाई पाबंदी को हटा दिया था। इस बीच 16 जनवरी से जब वैक्सीनेशन शुरू हुआ तो लोगों की उम्मीद जगी की अब कोरोना से हर कोई बच जाएगा।

दूसरी लहर में यूं आया डाउनफॉल

तारीखकेस
16 मई10,290
21 मई6225
27 मई3454
31 मई1498
4 जून1006
11 जून446
14 जून277
20 जून144
30 जून100
1 जुलाई75
6 जुलाई47

अब 28 फीसदी जनता को पहली डोज, लेकिन फिर भी डर ज्यादा

राजस्थान में कोरोना की पहली लहर के बाद जब सब अनलॉक हो गया था तब लोगों में कोरोना का डर भी लगभग खत्म हो गया था। इस बार परिस्थितियां वैसी नहीं है। ये तब है जब राज्य सहित पूरे देश में वैक्सीनेशन शुरू हो चुका है। राजस्थान में अब तक कुल आबादी का लगभग 28 फीसदी लोग ऐसे है, जिनको कम से कम वैक्सीन की एक डोज दी जा चुकी है। इसके बावजूद जनता और सरकार दोनाें तीसरी लहर को लेकर डरे हुए हैं।

यूं ही रुका रहा वैक्सीनेशन तो कंट्रोल करना मुश्किल

राजस्थान में कोरोना की पहली लहर के बाद जब सब अनलॉक हो गया था तब लोगों में कोरोना का डर भी लगभग खत्म हो गया था। इस बार परिस्थितियां वैसी नहीं है। ये तब है जब राज्य सहित पूरे देश में वैक्सीनेशन शुरू हो चुका है। 16 जनवरी से वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद से अब तक कुल आबादी के लगभग 28 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनको कम से कम वैक्सीन की एक डोज लगी है। पिछले कुछ दिनों से वैक्सीनेशन की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जो अच्छे संकेत नहीं है। मई-जून में हर रोज औसतन 2 से ढाई लाख लोगों को टीके लग रहे थे, लेकिन जुलाई के शुरूआती पांच दिनों में स्थितियां विकट हो गई है।

वैक्सीनेशन की स्थिति

राजस्थान को अब तक मिली डोज : 2 करोड़ 56 लाख 71,930
डोज लगी : 2 करोड़ 58 लाख 41,517 (पहली डोज : 2.14 करोड़, दूसरी डोज : 43.92 लाख)
हेल्थ केयर वर्कर : 9,63,481 (पहली डोज : 5,52,396 दूसरी डोज : 4,11,085)
फ्रंट लाइन वर्कर : 11,58,596 (पहली डोज : 6,98,820 दूसरी डोज : 4,59,776)
45 या उससे ज्यादा एजग्रुप : 1 करोड़ 56 लाख 94,709 (पहली डोज : 1,22,89,454, दूसरी डोज : 34,05,255)
18-44 एजग्रुप : 80,24,731 (पहली डोज :79,08,807 दूसरी डोज : 1,15,924)

डाउनफॉल के दो बड़े कारण, जाने एक्सपर्ट क्या बताते है

सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) के सीनियर प्रोफेसर और मेडीकल यूनिट के हैड डॉ. रमन शर्मा के मुताबिक ये डाउनफॉल पहली लहर से भी ज्यादा है। इसके पीछे एक कारण यह माना जा सकता है कि कई वायरस ऐसे होते हैं जो एक समय बहुत तेजी से स्प्रैड होते हैं, लेकिन वे कुछ समय बाद खुद ही इनएक्टिव (निष्क्रिय) हो जाते हैं। कोरोना का नए वैरिएंट डेल्टा में भी ऐसा ही शायद हुआ हो। क्योंकि पहली वेव बहुत लम्बे समय तक चली थी, तब वायरस का वैरिएंट अलग था। इसके अलावा एक दूसरा कारण नेचुलर एंटीबॉडीज का बनना भी मान सकते हैं। हालांकि अभी इतनी वैक्सीन नहीं लगी है कि पूरे प्रदेश में यह कहा जा सके कि हार्ड इम्यूनिटी बन गई, लेकिन जिस तेजी से पिछले दिनों वायरस फैला और कई लोग एसिमटोमेटिक (बिना लक्षण दिखे) बीमार होकर ठीक भी हो गए। उससे उनमें भी एंटीबॉडी बन गई, जो एक कारण मान सकते हैं। डॉक्टर शर्मा की माने तो राजस्थान में कोरोना के केस भले ही कम हो गए हो, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वैक्सीन लगा ली हो या नहीं लगाई हो उन्हें अब भी कोरोना प्रोटोकॉल की पालना करना जरूरी है। मास्क सबसे ज्यादा जरूरी है साथ ही भीड़-भाड़ वाले कार्यक्रमों में न जाए तो अच्छा है।

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