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बगावत पर बोले यूडीएच मंत्री धारीवाल:​​​​​​​माकन-खड़गे बात करने नहीं, सिर्फ एक लाइन का प्रस्ताव पास कराने आए थे, यह विधायकों को मंजूर नहीं

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: बाबूलाल शर्मा

अशोक गहलोत अगर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाते हैं तो राजस्थान का अगला सीएम कौन होगा? इसको लेकर विधायकों की रायशुमारी के लिए आए केंद्रीय ऑब्जर्वर मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन से मिलने से पहले ही कांग्रेस विधायकों ने रविवार को बगावती तेवर अपना लिए। विधायक दल की बैठक से पहले यूडीएच व संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल के घर विधायकों की बैठक हुई और यहां से विधायकों ने एक साथ विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के घर जाकर इस्तीफा सौंप दिया।

कांग्रेस प्रभारी अजय माकन इस पर खफा हैं और उनका कहना है कि विधायक दल की बैठक से पहले धारीवाल के घर विधायकों का बैठक करना अनुशासनहीनता है। माकन के इस बयान के बाद दैनिक भास्कर ने शांति धारीवाल से बात की। धारीवाल ने माकन पर पलटवार किया है।

उन्होंने कहा कि माकन का विचार कुछ और ही है। वे विधायकों से बात करना ही नहीं चाहते थे। वे तो सीएम का फैसला हाईकमान पर छोड़ने का एक लाइन का प्रस्ताव पास कराने आए थे। सारे विधायक यह मान रहे थे कि अगर माकन और खड़गे के साथ मीटिंग की तो उन लोगों को पुरस्कृत किया जाएगा जिन लोगों ने कांग्रेस की पीठ में छुरा घोंपा था। यह किसी भी विधायक को मंजूर नहीं था। इसलिए यह सबकुछ हुआ।

पढ़िए- धारीवाल से भास्कर की पूरी बातचीत…

सवाल: माकन कह रहे हैं कि विधायकों का मीटिंग करना अनुशासनहीनता है?

जवाब: मेरा सीधा जवाब है, मेरी 50 साल की राजनीति हो गई। पचास साल में हमने कभी अनुशासन नहीं तोड़ा और न अब तोड़ेंगे। हमेशा हाईकमान का फैसला मानते रहे हैं, लेकिन अपनी बात कहने का अधिकार तो हमें है ही ना।

सवाल: ऑब्जर्वर्स के साथ मीटिंग करने से पहले आपने घर पर मीटिंग क्यों की? आपने विधायकों को फोन करके अपने घर बुलाया?

जवाब: मैं संसदीय कार्यमंत्री हूं इसलिए सारे विधायक अपनी बात कहने मेरे घर आ गए। मीटिंग से पहले ही सारे विधायक घर आ गए थे। मैंने किसी को फोन नहीं किया, लोग अपने आप आए थे। आने से पहले फोन करते रहे- हम आपके पास आ रहे हैं, हमारी बात सुनो। बात करते-करते साढ़े आठ बज गए।

सवाल: विधायक दल की मीटिंग में न जाकर आप सीपी जोशी के यहां क्यों चले गए? आप सबने इस्तीफे क्यों दिए?

जवाब: मेरे घर पर मीटिंग में विधायकों ने यह फैसला कर लिया कि हमारी बात नहीं सुनेंगे तो हम इस्तीफा देंगे। हर विधायक यह मान रहा था कि उन लोगों को पुरस्कृत किया जाएगा जिन लोगों ने कांग्रेस की पीठ में छुरा घोंपा था। जिन लोगों ने सरकार को गिराने की कोशिश की। यह किसी भी विधायक को मंजूर नहीं था। इसलिए सीपी जोशी के यहां इस्तीफा देने चले गए।

सवाल: बात सुनने के लिए ही तो ऑब्जर्वर आए थे?

जवाब: वे बात करने ही तो नहीं आए। वे तो प्रस्ताव पास कराने आए थे। मीटिंग से पहले प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा ने बताया कि एक लाइन का प्रस्ताव पास कराने का हुक्म हुआ है। मतलब ऑब्जर्वर बात करना ही नहीं चाहते थे। वे तो प्रस्ताव पास कराना चाहते थे कि सबकुछ हाईकमान पर छोड़ा जाता है। इस पर विधायकों ने कहा कि हम तो इस्तीफा देंगे, हमारी बात ही नहीं सुनी जा रही है।

सवाल: लेकिन जब विधायक माकन और खड़गे से मिलते तो यह सब बातें होती?

जवाब: मिल लिए ना हम ऑब्जर्वर्स से। कल दो-दो बार मिले हैं। उन्होंने तब भी यही कहा कि एक लाइन का प्रस्ताव पास करना है। यह विधायकों को मंजूर नहीं था।

सवाल: आप सबने इस्तीफे दे दिए, स्वीकार होंगे या क्या होगा?

जवाब: अब माकन साहब यह कह रहे हैं कि हम अनुशासनहीन है तो इसका मतलब है कि माकन साहब का विचार कुछ और ही है।

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1. विधायक दल की बैठक में नहीं पहुंचे गहलोत समर्थक, माकन बोले- अनुशासनहीनता

गहलोत गुट ने विधायक दल की बैठक का बहिष्कार कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने तक यानी 19 अक्टूबर तक ये गुट किसी भी मीटिंग में शामिल नहीं होगा। शर्तें भी रखी हैं। पहली- सरकार बचाने वाले 102 विधायकों यानी गहलोत गुट से ही सीएम बने। दूसरी- सीएम तब घोषित हो, जब अध्यक्ष का चुनाव हो जाए। तीसरी- जो भी नया मुख्यमंत्री हो, वो गहलोत की पसंद का ही हो। पूरी खबर पढ़ें

2. विधायकों को तवज्जो मिलेगी या हाईकमान राय थोपेगा?

अब तक की स्थिति में संख्या बल के मामले में पायलट गुट कमजोर दिख रहा है। गहलोत के समर्थन में शांति धारीवाल के घर हुई बैठक में 70 से ज्यादा विधायक पहुंचे, जबकि सचिन पायलट के घर चुनिंदा MLA ही दिखे।

यदि ऐसा होता है तो पायलट गुट कमजोर पड़ेगा और संख्या बल के सामने हाईकमान भी किसी अन्य नाम पर विचार कर सकता है। पढ़िए पूरी खबर

3.गहलोत-पायलट खेमों की लड़ाई में तीसरे को फायदा होने की संभावना

राजस्थान में सवा दो साल पहले आए सियासी संकट का दूसरा पार्ट वापस देखा जा रहा है। इस बार किरदार बदले हुए हैं। अशोक गहलोत खेमे के विधायकों के सचिन पायलट को सीएम बनाए जाने की संभावनाओं पर बगावती तेवर दिखाने से संकट के हालात बने हैं। पूरी खबर पढ़ें

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